Thursday, 20 August 2026
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11th-13th JPSC: 342 अफसरों की नौकरी का क्या होगा? JPSC पर हाईकोर्ट के स्टे से नया मोड़

INT News20 August 2026 at 06:54 pm

रांची. झारखंड पब्लिक सर्विस कमिशन की 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का मामला अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है. साल 2024 मे निकाली गई इस भर्ती प्रक्रिया में पहले 342 अभ्यर्थियों का चयन हुआ और नियुक्तियां दी गईं, फिर राज्य सरकार ने इन नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया और अब झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के रद्द करने वाले फैसले पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. इससे 342 चयनित अधिकारियों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है.

विवाद के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी

11वीं-13वीं JPSC परीक्षा के लिए विज्ञापन संख्या 01/2024 जारी किया था. परीक्षा प्रक्रिया 2024 में आगे बढ़ी और मुख्य परीक्षा भी आयोजित हुई. बाद में मेन्स एग्जाम के जारी रिजल्ट और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई. मामला इतना आगे बढ़ा कि जनवरी 2026 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 342 सफल अभ्यर्थियों को मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया. अदालत ने माना कि मामले का फैसला इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति को सीधे प्रभावित कर सकता है.

साल 2025 में विवाद के बीच 342 की नियुक्ति

विवाद के बावजूद JPSC ने फाइनल रिजल्ट जारी किया. कुल 342 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांटे गए. यानी उस समय तक आयोग की प्रक्रिया इस मुकाम पर पहुंच चुकी थी कि अभ्यर्थी का सिर्फ चयन नहीं हिआ, बल्कि उन्हें सरकारी सेवा में नियुक्त भी दी जा चुकी थी. यही प्रक्रिया पूरे विवाद को और गंभीर बनाती है.

सरकार का बड़ा फैसला

अगस्त 2026 में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की. 11वीं-13वीं JPSC समेत 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया. झारखंड सरकार ने इस कड़ी कार्रवाई के पीछे CID जांच में सामने आए तथ्यों और अनियमितताओं से जुड़े मामलों को आधार बनाया है. सरकार के इस फैसले का सीधा असर उन सभी 342 अधिकारियों पर पड़ा, जिन्हें नियुक्ति मिली थी.

हाईकोर्ट ने लगा दी रोक

सरकार के इस फैसलें के बाद मामला फिर झारखंड हाईकोर्ट में पहुंच गया. 20 अगस्त को हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले के विरूद्ध दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने रोक लगा दी. अदालत के इस आदेश से चयनित 342 अभ्यर्थियों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है. याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह सवाल भी उठाया गया कि परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने से पहले क्या पर्याप्त जांच हुई थी. सरकार के पास ऐसा क्या ठोस साक्ष्य है, जिसके आधार पर पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द किया जा सकता है.

हाईकोर्ट के स्टे के बाद क्या होगा

हाईकोर्ट का यह आदेश अंतिम फैसला नहीं है.इस मामले में अब अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी.अगली सुनवाई में सरकार को अपने फैसले का आधार अदालत के सामने रखना होगा.