Tuesday, 11 August 2026
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पठानकोट में जलालिया व शिंगारवां नालों पर बनेंगे पुल:सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की मांग पूरी, कैबिनेट मंत्री बोले- ₹40.18 करोड़ से दशकों पुराना संकट होगा खत्म

INT News11 August 2026 at 04:29 pm

जिला पठानकोट के भोआ विधानसभा क्षेत्र के लोगों की दशकों से चली आ रही मांग पूरा होने जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में बहते जलालिया और शिंगारवां नालों पर दो नए पुल बनने जा रहे हैं। पुलों पर ₹40.18 करोड़ की लागत आएगी। इसी महीने शुरू होने वाले इस प्रोजेक्ट से रावी पार के 65 गांवों की लगभग 1 लाख से अधिक आबादी को सीधा फायदा मिलेगा, जिन्हें अब तक जलभराव और आवाजाही के भारी संकट से जूझना पड़ता था। इसके साथ ही, भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात बीएसएफ और भारतीय सेना को भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत और सुगम आवाजाही की बड़ी सुविधा मिलेगी। कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने जलालिया और शिंगारवां नालों पर से दो बड़े पुलों के टेंडर पास होने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि लंबे समय से प्रतीक्षित हलका भोआ में दो बड़े पुलों के निर्माण के लिए पंजाब सरकार द्वारा मंजूरी मिलने के बाद अब उनके टेंडर भी ओपन और क्लियर हो चुके हैं। मंत्री कटारूचक्क ने बताया कि इन दोनों पुलों का निर्माण कार्य इसी अगस्त महीने में युद्ध स्तर पर शुरू कराने की पूरी तैयारी कर ली गई है। सीमावर्ती क्षेत्र और सेना-बीएसएफ को मिलेगा बड़ा फायदा कैबिनेट मंत्री ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि इन पुलों के निर्माण से रावी पार बसे करीब 64 से 65 गांवों के लोगों को आवागमन में बहुत बड़ी राहत मिलेगी। चूंकि यह क्षेत्र भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है, इसलिए संवेदनशील परिस्थितियों और आपातकालीन समय में भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल और पुलिस प्रशासन के वाहनों की आवाजाही भी अब बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से हो सकेगी। अगस्त महीने में ही शुरू होगा निर्माण कार्य लाल चंद कटारूचक्क ने कहा कि हलके में सड़कों का निर्माण कार्य पहले से ही युद्ध स्तर पर चल रहा है। अब इन दोनों बड़े पुलों के टेंडर कंपलीट हो चुके हैं और संबंधित ठेकेदारों व कंपनियों को काम आवंटित कर दिया गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि जल्द से जल्द काम शुरू किया जाए। हम इसी अगस्त महीने के भीतर किसी भी दिन निर्माण कार्य का औपचारिक शुभारंभ करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की मान सरकार जनता द्वारा जताई गई उम्मीदों पर खरा उतरने और हलका भुआ के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रही है।

दशकों से इन समस्याओं से जूझ रहे थे लोग जलालिया नाले पर पुल न होने के कारण स्थानीय लोगों, खासकर रावी पार के गांवों के निवासियों को लंबे समय से निम्नलिखित गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। बरसात में गांवों का संपर्क कटना: मानसून और भारी बारिश के दिनों में जलालिया नाले में पहाड़ियों से अचानक भारी पानी (उफान) आ जाता था। पुल न होने से जलस्तर बढ़ते ही रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता था और रावी पार के दर्जनों गांवों का मुख्य शहर और जिला मुख्यालय से संपर्क कट जाता था। लंबा चक्कर लगाने की मजबूरी: जब नाले में पानी का बहाव तेज होता था, तो लोगों को अपने गंतव्य (जैसे बमियाल या पठानकोट) तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर लंबा वैकल्पिक और जोखिम भरा रास्ता तय करना पड़ता था, जिससे समय और ईंधन दोनों की भारी बर्बादी होती थी। इमरजेंसी और स्वास्थ्य सुविधाओं में रुकावट: नाले में पानी आने पर सबसे ज्यादा दिक्कत मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में होती थी। एम्बुलेंस और अन्य वाहन नाला पार नहीं कर पाते थे, जिससे आपातकालीन स्थिति में जान का खतरा बना रहता था। किसानों की फसलों की ढुलाई में बाधा: इलाके के किसानों को अपनी फसलें, सब्जियां और दूध मंडी तक पहुंचाने में भारी परेशानी आती थी। रास्ता बंद होने पर या तो फसलें समय पर मंडी नहीं पहुंच पाती थीं या परिवहन का खर्च बहुत बढ़ जाता था। सीमा सुरक्षा के आवागमन में परेशानी: यह इलाका भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (बमियाल सेक्टर) से सटा है। जलालिया नाले पर पुल न होने से संवेदनशील परिस्थितियों और बारिश के दिनों में सीमा सुरक्षा बल, भारतीय सेना और पुलिस के वाहनों की आवाजाही भी बुरी तरह प्रभावित होती थी। बच्चों की पढ़ाई का नुकसान: बारिश के दिनों में नाला उफान पर होने के कारण स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं का रास्ता बंद हो जाता था, जिससे कई दिनों तक उन्हें घर पर ही रहना पड़ता था।