समाचार · पश्चिम बंगाल
अभी अंडे बरस रहे थे, अब ईंटें चलेंगी, 2,000 से ज्यादा फरार पंचायत प्रधानों को मंत्री दिलीप घोष की चेतावनी

खास बातें
स्वेच्छा से ऑफिस आयें और काम करें : घोष
ठप पड़ा ग्रामीण विकास, काम लटके
Dilip Ghosh Warning: किसी को डरने की जरूरत नहीं : दिलीप
काम नहीं करना तो इस्तीफा दें : पंचायत मंत्री
कोलकाता से अमित शर्मा की रिपोर्ट
Dilip Ghosh Warning: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नयी सरकार ने बेहद आक्रामक और सख्त रुख अपनाया है. राज्य के पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में करीब 2,000 पंचायत प्रधान इस समय या तो पूरी तरह निष्क्रिय हैं या फिर डर के मारे फरार चल रहे हैं.
स्वेच्छा से ऑफिस आयें और काम करें : घोष
फरार और छिपे हुए पंचायत प्रतिनिधियों को अल्टीमेटम देते हुए पंचायत मंत्री ने अल्टीमेटम दे दिया है. दिलीप घोष ने कहा- कार्यालय आने से डरने की जरूरत नहीं है. अभी तक आपके विरोध में अंडे फेंके जा रहे थे, लेकिन अगर अब भी काम पर नहीं लौटे, तो ईंटें भी चल सकती हैं. इसलिए बेहतर होगा कि स्वेच्छा से वापस आयें और जनता का काम शुरू करें.
ठप पड़ा ग्रामीण विकास, काम लटके
दिलीप घोष ने कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बड़ी संख्या में पंचायत प्रधानों के कार्यालय न आने या इलाका छोड़कर भाग जाने के कारण ग्रामीण विकास पूरी तरह ठप हो गया है. जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और अन्य बुनियादी प्रशासनिक सेवाओं के लिए पंचायत दफ्तरों से रोज निराश होकर लोगों को लौटना पड़ रहा है. नयी ग्रामीण परियोजनाओं के भुगतान रुके हुए हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण सड़क निर्माण, नयी टेंडर प्रक्रियाएं और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.
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Dilip Ghosh Warning: किसी को डरने की जरूरत नहीं : दिलीप
पंचायत मंत्री ने कहा कि चूंकि ये प्रतिनिधि जनता के वोट से चुनकर आये हैं और सरकारी वेतन ले रहे हैं, इसलिए दफ्तर आकर जनता की सेवा करना उनका संवैधानिक दायित्व है. राजनीति में विरोध होना आम बात है. इसलिए उन्हें किसी से डरने की आवश्यकता नहीं है.
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काम नहीं करना तो इस्तीफा दें : पंचायत मंत्री
अपील के साथ-साथ दिलीप घोष ने बेहद कड़ा और डराने वाला संदेश भी दिया. उन्होंने कहा कि यदि फरार प्रधान स्वेच्छा से दफ्तर नहीं लौटते हैं, तो सरकार पुलिस को उनके घरों पर भेजकर उन्हें जबरन कार्यालय खिंचवाकर लायेगी. सरकारी योजनाओं को अटकाने वाले इन नेताओं के घगरों का जनता घेराव भी कर सकती है. उन्होंने कहा कि अगर काम करने की हिम्मत या इच्छा नहीं है, तो तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे दीजिए.
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