Tuesday, 11 August 2026
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भारत-चीन सीमा पर सैलाब बहा ले गया बैली ब्रिज, कई वाहन बहे; अब कैसे हैं हालात

INT News11 August 2026 at 07:48 am

पूरन भिलंगवाल, ज्योतिर्मठIndia-China Border Flash Flood: भारत-चीन सीमा पर नीती घाटी में सोमवार को भारी बारिश से तमक नाला उफान पर आ गया। इससे नाले पर हाल में बना बैली ब्रिज बह गया। बाढ़ में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के एक वाहन और उसमें मौजूद एक कर्मचारी के भी बहने की सूचना है। लापता कर्मचारी की तलाश की जा रही है। इस पुल के बहने से भारत का चीन सीमा से संपर्क कट गया है। दूसरी ओर, ग्रामीणों ने बाढ़ में दो पिकअप वाहनों के बहने की आशंका जताई है। हालांकि, प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है।ज्योतिर्मठ से करीब 40 किलोमीटर आगे नीती घाटी को जोड़ने वाली सड़क पर तमक नाले में पिछले साल आई बाढ़ में पक्का पुल बह गया था। इसके बाद बीआरओ ने यहां बैली ब्रिज का निर्माण किया था। इस पुल को पिछले माह वाहनों की आवाजाही के लिए खोला गया था। सोमवार दोपहर बाद भारी बारिश से तमक नाले में बाढ़ आ गई। इसमें बैली ब्रिज बह गया। इस दौरान ब्रिज के निकट खड़ा बीआरओ का एक वाहन भी बाढ़ की चपेट में आ गया। उप जिलाधिकारी जोशीमठ चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बीआरओ के वाहन और एक कर्मचारी के बहने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल को मौके के लिए रवाना किया गया है। तहसीलदार जोशीमठ को मौके पर भेजा जा रहा है। पुल बहने से अलग-थलग पड़े गांवों में सुविधाएं बहाल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है।गांवों और सैन्य चौकियों का संपर्क कटाबैली ब्रिज बहने से नीती घाटी के दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है। इनमें नीती, बंपा, गामली, फरकिया, गुरकुटी, कैलाशपुर, मेहरगांव, मलारी, कोषा, झेलम, द्रोणागिरी, जुम्मा और लोंग गांव शामिल हैं। इसके अलावा बैली ब्रिज टूटने से नीती घाटी में मौजूद सेना और आईटीबीपी की मलारी, गमशाली, लफथल, रिमखिम और सुमना स्थित चौकियां भी अलग-थलग पड़ गई हैं।सीएम धामी ने राहत एवं बचाव कार्य के दिए निर्देशदेहरादून। चमोली जिले के ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में सैलाब के कारण बैली ब्रिज बहने की घटना का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संज्ञान लिया है। उन्होंने तत्काल सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन से घटना की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निचले क्षेत्रों में आवश्यक एहतियाती कदम उठाने, संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थिति सामान्य होने तक प्रभावित मार्ग पर आवाजाही प्रतिबंधित रखने के निर्देश दिए।एक महीने पहले बनकर तैयार हुआ था बैली ब्रिजभारत-चीन सीमा पर बसे दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले नीति बॉर्डर हाईवे पर तमक नाले के ऊपर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से करीब एक माह पहले बनाया गया बैली ब्रिज पहली ही बरसात में बह गया। पुल के बहने से सरहद पर द्वितीय पंक्ति के रक्षक के रूप में तैनात रहने वाले ग्रामीण फिलहाल मुख्यधारा से कट गए हैं।ग्रामीणों के मुख्य मार्ग से कटने की सूचना मिलते ही प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव दल को घाटी में भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि सीमांत क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।ग्रामीणों की आवाजाही का रहता है इंतजारगर्मी की दस्तक के साथ मार्च-अप्रैल में नीति घाटी के दर्जनों गांवों के निवासी अपने मूल प्रवास गांवों में लौटते हैं और सर्दी शुरू होने पर अक्टूबर के आसपास तराई वाले गांवों में वापस आ जाते हैं। गर्मियों के दौरान सीमांत क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की आवाजाही बनी रहती है। साथ ही सीमा पर तैनात सुरक्षा चौकियों का संपर्क भी ग्रामीणों से बना रहता है।ग्रामीण गर्मियों में कृषि के साथ भेड़-बकरी पालन भी करते हैं और सीमा से जुड़े दुर्गम इलाकों तक पहुंचते हैं। इससे सीमांत क्षेत्र में भारतीय मौजूदगी मजबूत होती है। साथ ही सीमा क्षेत्र की गतिविधियों की जानकारी भी ग्रामीण सुरक्षा बलों तक पहुंचाते हैं।बंद रहा गंगोत्री हाईवेजिले में सोमवार सुबह से हो रही बारिश के कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग सुनगर के पास भूस्खन के कारण बाधित हो गया। जिसके चलते मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूर्णत: बंद हो गई और सड़कें दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंची बीआरओ की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सांय पांच बजे दो पहिया वाहनों के लिए मार्ग सुचारू किया। उधर चमोली जिले के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नन्दकिशोर जोशी ने बताया कि लगातार बारिश से जिले की 20 सड़कें मलबा, पत्थर और बोल्डर आने से अवरुद्ध रहीं।जलजला थमने के बाद बनेगा वैकल्पिक मार्गतमक नाले में जलजला थमने के बाद वैकल्पिक सड़क अथवा आवागमन मार्ग बनाने का काम शुरू किया जाएगा। प्रशासन और बीआरओ को उम्मीद है कि देर रात तक नाले का जलस्तर कम हो सकता है। इसके बाद मौके पर आवागमन बहाल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की जाएगी। सूत्रों के अनुसार प्रशासन की ओर से बीआरओ को ह्युम-पाइप की मदद से वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ के कारण नाले का स्पान करीब 70 मीटर से अधिक चौड़ा हो गया है। ऐसे में यू-पाइप के जरिए मार्ग तैयार करने में तीन से चार दिन का समय लग सकता है।खाद्यान की कमी नहीं होने देंगे: एसडीएमएसडीएम ज्योतिर्मठ चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि राहत एवं बचाव दल को तमक भेज दिया गया है। टीम मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेगी और प्राथमिकता के आधार पर जरूरी कार्य शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि घाटी में रहने वाले लोगों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है। एसडीएम ने बताया कि खाद्य आपूर्ति निरीक्षक से जानकारी ली गई है। सितंबर तक के लिए आवश्यक खाद्यान्न ग्रामीणों तक पहले ही पहुंचाया जा चुका है। सीमांत गांवों के आसपास छोटी-बड़ी दुकानें भी हैं, जहां आवश्यक सामान उपलब्ध है। यदि किसी प्रकार की खाद्यान्न की आवश्यकता सामने आती है तो उसे तत्काल ग्रामीणों तक पहुंचाया जाएगा।

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