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प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की होगी जांच, सुप्रीम कोर्ट बनाएगा हाई-पावर्ड कमेटी

हाई पावर्ड कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश करेंगे. इसमें एक पूर्व हाई कोर्ट जज और सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी शामिल किया जाएगा.
समिति के गठन और उसके कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को जारी करेगा आदेश
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं, ने बताया कि पूर्व CBI निदेशक और पूर्व DGP में से एक-एक व्यक्ति की सहमति मिल चुकी है. दोनों में से कोई भी संबंधित राज्यों से नहीं है. कोर्ट समिति के गठन और उसके कामकाज से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद बुधवार को औपचारिक आदेश जारी करेगा.
सीजेपी सौरव दास ने FIR को लेकर सरकार की मंसा पर उठाया सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, "जब कोर्ट सरकार से उन FIRs की लिस्ट मांग रहा है जिन्हें रद्द किया जाना है, तो आप उसे कोर्ट में क्यों नहीं सौंप रहे हैं? लेकिन सरकार कोर्ट में इस मामले में हिचकिचाहट दिखा रहे हैं. हमारे साथ देरी करने वाली चालें न चलें. हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने लगभग 2,800 पक्के अपराधियों की पहचान की है; अगर उन्हें उनके खिलाफ कार्रवाई करनी है, तो वह बिल्कुल अलग मामला है. छात्रों से जुड़ा मुद्दा उनके खिलाफ दर्ज FIRs को रद्द करने का है."
पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन से जुड़े मामलों की होगी जांच
प्रस्तावित समिति देश के अलग-अलग हिस्सों में परीक्षा पेपर लीक के आरोपों को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े कई मुद्दों की जांच करेगी. इनमें पुलिस की कथित ज्यादती, सुरक्षाकर्मियों पर हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के यौन उत्पीड़न जैसे आरोप भी शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट के पास संवैधानिक और कानूनी मुद्दों पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरी मामलों में समिति को पूरी जांच खत्म होने का इंतजार नहीं करना होगा. वह तत्काल ध्यान देने वाले मामलों पर अंतरिम रिपोर्ट भी अदालत के सामने पेश कर सकती है. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि कुछ संवैधानिक और कानूनी मुद्दों पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास ही रहेगा. इनमें फेस रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल, निगरानी, निजता और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़े सवाल शामिल हैं.
छात्रों पर दर्ज FIR को लेकर भी कोर्ट ने दिया बड़ा संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR को खत्म करने की संभावना पर भी विचार करने के संकेत दिए हैं. कोर्ट ने राज्यों से कहा कि वे ऐसी FIR की पहचान करें, जिनमें छात्रों या प्रदर्शनकारियों पर कोई गंभीर आपराधिक आरोप शामिल नहीं है. पीठ ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए FIR रद्द करने पर विचार कर सकती है. हालांकि, गंभीर आपराधिक मामलों या गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के मामलों को अलग तरीके से देखा जाएगा. कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मुकदमों का युवा छात्रों के जीवन और भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.
जंतर-मंतर प्रदर्शन और संसद मार्च का मामला
सुप्रीम कोर्ट में इन याचिकाओं पर सुनवाई ऐसे समय हो रही है, जब कथित परीक्षा पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्रों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किए थे. जंतर-मंतर पर कई हफ्तों तक चले प्रदर्शनों का नेतृत्व कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) ने किया था. इसमें भूख हड़ताल के बाद संसद की ओर मार्च भी किया गया था.
20 जुलाई को सीजेपी की अगुआई में छात्रों ने किया था संसद मार्च
20 जुलाई को CJP के नेतृत्व में हजारों छात्रों ने संसद मार्च किया था. प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे थे. संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए रोकने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया. इसके बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें कथित तौर पर पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट किए जाने का दावा किया गया. दिल्ली पुलिस ने हालांकि अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा था कि प्रदर्शनकारियों के एक हिस्से के हिंसक होने और कथित तौर पर पथराव करने के बाद बल प्रयोग किया गया.
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