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ट्राइबल ब्लड मैन राजेश मार्डी ने पेश की मानवता की मिसाल, गम्हरिया के थैलेसीमिया पीड़ित मासूम को लिया गोद

जमशेदपुर : जमशेदपुर में 'ट्राइबल ब्लड मैन' के नाम से अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके चर्चित रक्तदाता राजेश मार्डी ने एक बार फिर इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश की है. गम्हरिया प्रखंड के रायमाड़ा गांव निवासी लखिंद्र हेंब्रम के तीन वर्षीय बेटे प्रिंस हेंब्रम की गंभीर स्थिति को देखते हुए राजेश मार्डी ने उसे गोद लेने का निर्णय लिया है. मासूम प्रिंस संभवतः थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और उसके शरीर में प्राकृतिक रूप से खून नहीं बनता, जिसके कारण उसे हर महीने 'बी पॉजिटिव' (B+) ब्लड चढ़ाने की दरकार रहती है.
गांव पहुंचकर जाना मासूम का हाल
अपने जीवन में अब तक 82 बार रक्तदान कर चुके आदिवासी रक्तदाता राजेश मार्डी को जब इस मासूम की लाचारी के बारे में पता चला, तो वे बुधवार को अपने साथी रक्तदाता सीताराम हेंब्रम के साथ सीधे रायमाड़ा गांव पहुंचे. वहां उन्होंने बच्चे के माता-पिता से मुलाकात कर उसका कुशलक्षेम जाना और परिजनों का ढांढस बंधाया.
मजदूरी कर परिवार पालने वाले पिता के सामने था संकट
बच्चे के पिता लखिंद्र हेंब्रम ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वे एक बेहद गरीब परिवार से आते हैं. वे छोटी-मोटी खेती-बाड़ी के साथ एक स्थानीय कंपनी में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. बीते करीब 9 महीनों से उनके 3 वर्षीय मासूम बेटे को लगातार हर माह खून की जरूरत पड़ रही है. सीमित आमदनी और तंगहाली के बीच हर महीने समय पर खून का इंतजाम करना उनके लिए असंभव सा होता जा रहा था.
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आजीवन नि:शुल्क खून उपलब्ध कराने का संकल्प
परिजनों की इस बेबसी को देखते हुए राजेश मार्डी ने तुरंत प्रिंस को गोद लेने की घोषणा की. उन्होंने आश्वस्त किया कि मासूम को जब भी खून की जरूरत पड़ेगी, वे जमशेदपुर ब्लड सेंटर के माध्यम से उसे निशुल्क रक्त उपलब्ध कराएंगे. इस फैसले से असहाय माता-पिता की आंखों से आंसू छलक आए और उन्होंने राजेश मार्डी के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया.
अब तक 13 बच्चों को ले चुके हैं गोद
राजेश मार्डी का यह सेवाभाव केवल इसी बच्चे तक सीमित नहीं है. समाज के जरूरतमंद और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों की मदद के लिए वे हमेशा आगे रहते हैं. प्रिंस को मिलाकर वे अब तक कुल 13 जरूरतमंद बच्चों को गोद ले चुके हैं, ताकि खून की कमी के अभाव में किसी मासूम की जिंदगी खतरे में न पड़े.
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