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गणेशोत्सव से पहले ग्वालियर में महंगी होंगी प्रतिमाएं:14 सितंबर से गणेशोत्सव, मूर्तिकार दे रहे अंतिम आकार; दूसरे जिलों से भी आते हैं श्रद्धालु
हिंदू धर्म में भगवान गणपति को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से सभी काम बिना रुकावट पूरे होते हैं। इसी वजह से किसी भी शुभ काम या पूजा से पहले भगवान गणेश की वंदना की जाती है। इस साल गणेशोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी से होगी। ग्वालियर में हर साल की तरह इस बार भी गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर की कई गणेश उत्सव समितियां पंडाल और सजावट की तैयारी में लगी हैं, वहीं मूर्तिकार गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। मूर्तिकार दिनेश ने बताया कि इस बार गणपति की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं की जेब पर भारी पड़ सकती हैं। मूर्तिकारों के अनुसार, मिट्टी, रंग, सजावट का सामान और मजदूरी की लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर प्रतिमाओं की कीमत पर पड़ा है। इस साल गणेश प्रतिमाओं के दाम में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की आशंका है। कई गणेश उत्सव समितियों ने अपनी पसंद और पंडाल के आकार के हिसाब से प्रतिमाओं की बुकिंग भी शुरू कर दी है। घर पर पूजा के लिए छोटी और साधारण गणेश प्रतिमाएं लगभग 200 रुपए से लेकर 4,200 रुपए तक मिल रही हैं। पर्यावरण को बचाने के लिए ईको-फ्रेंडली मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं की मांग भी तेजी से बढ़ी है। इनकी कीमत आकार और डिजाइन के हिसाब से लगभग 500 से 4,500 रुपए तक है। सार्वजनिक गणेश उत्सव समितियों के लिए बन रही बड़ी प्रतिमाओं की कीमत 15 हजार रुपए से शुरू होकर आकार, डिजाइन और सजावट के आधार पर लाखों रुपए तक पहुंच रही है। ग्वालियर में बनने वाली गणेश प्रतिमाओं की मांग सिर्फ शहर तक ही नहीं है। आसपास के जिलों से भी गणेश उत्सव समितियां और श्रद्धालु यहां आते हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि ग्वालियर में बनने वाली प्रतिमाओं में भव्यता, आकर्षक डिजाइन और बारीक कारीगरी होती है, जिस वजह से बाहर के जिलों से भी ऑर्डर मिलते हैं।