Wednesday, 12 August 2026
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खिलचीपुर शनिदेव मंदिर में 106वां स्थापना दिवस:जन्मोत्सव पर चांदी के आभूषणों से श्रृंगार, MP-राजस्थान से पहुंचे श्रद्धालु

INT News12 August 2026 at 03:35 pm

राजगढ़ जिले के खिलचीपुर स्थित नाहरदा के प्राचीन शनिदेव मंदिर में बुधवार को हरियाली अमावस्या के अवसर पर शनिदेव प्रतिमा का 106वां स्थापना दिवस और जन्मोत्सव धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश और राजस्थान से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। चांदी के आभूषणों से हुआ शनिदेव का विशेष श्रृंगार शनिदेव के जन्मोत्सव और स्थापना दिवस के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। भगवान शनिदेव का आकर्षक श्रृंगार किया गया और उन्हें चांदी के आभूषणों से सजाया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर शनिदेव के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने तेल और प्रसाद चढ़ाकर किया अभिषेक मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं ने शनिदेव को तेल, प्रसाद और अगरबत्ती अर्पित की। भक्तों ने विधि-विधान के साथ पूजा की और भगवान का अभिषेक किया। हरियाली अमावस्या के विशेष अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती रही। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ विशेष अभिषेक मंदिर के पुजारी बाबूलाल जोशी और सुनील जोशी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शनिदेव का विशेष अभिषेक कराया। धार्मिक विधि पूरी होने के बाद महाआरती की गई। महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भगवान शनिदेव के जयकारे लगाए। सुबह से देर रात तक जारी रहेगा दर्शन का सिलसिला स्थापना दिवस और जन्मोत्सव के चलते मंदिर में सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला जारी रहेगा। मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहेगा। दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी भी वितरित की जा रही है। मध्य प्रदेश और राजस्थान से पहुंचे श्रद्धालु हरियाली अमावस्या पर होने वाले विशेष आयोजन को लेकर नाहरदा मंदिर में मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के साथ राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मंदिर में पहुंचकर शनिदेव के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। भीड़ को देखते हुए पुलिस ने संभाली व्यवस्था मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के अलग-अलग स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं की आवाजाही और भीड़ को व्यवस्थित करने में जुटे हुए हैं, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो। गाड़गंगा नदी में बहकर आई थी शनिदेव की प्रतिमा मंदिर के पुजारी सुनील जोशी के अनुसार नाहरदा स्थित शनिदेव मंदिर में स्थापित प्रतिमा को लेकर एक पुरानी मान्यता है। बताया जाता है कि कई साल पहले शनिदेव की यह प्रतिमा गाड़गंगा नदी में बहकर आई थी। उस समय खिलचीपुर रियासत के दीवान उग्रसेन को सपने में शनिदेव ने प्रतिमा के नदी में होने की जानकारी दी थी। मान्यता के अनुसार इसके बाद प्रतिमा को नदी से बाहर निकालकर नाहरदा में नदी किनारे स्थापित किया गया। उस समय मंदिर के आसपास घना जंगल हुआ करता था। बाद में खिलचीपुर रियासत के राजा दुर्जनसाल सिंह के समय वर्ष 1920 में हरियाली अमावस्या के दिन मंदिर का निर्माण कराया गया और शनिदेव की प्रतिमा की विधिवत स्थापना की गई। स्वयंभू प्रतिमा के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं भक्त नाहरदा परिसर में स्थित शनिदेव मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां स्थापित शनिदेव की प्रतिमा को स्वयंभू माना जाता है। मान्यता के अनुसार प्रतिमा पांडे पर सवार शनिदेव के स्वरूप में है। इसी आस्था के चलते हरियाली अमावस्या और अन्य विशेष अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। स्थापना दिवस पर देर रात तक चलते हैं धार्मिक आयोजन हरियाली अमावस्या पर हर साल मंदिर में शनिदेव प्रतिमा के स्थापना दिवस और जन्मोत्सव के अवसर पर विशेष आयोजन किए जाते हैं। इस दौरान मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के अलावा राजस्थान से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन, पूजा-अर्चना, अभिषेक और प्रसादी का सिलसिला देर रात तक चलता है। इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से नाहरदा मंदिर परिसर में धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है।