समाचार · मध्य प्रदेश
हरदा में 35 करोड़ के CBG प्लांट का विरोध:विशेष ग्राम सभा की मांग; ग्रामीण बोले- जबरन काम हुआ तो होगा आंदोलन
हरदा जिले के टिमरनी ब्लॉक के चौकड़ी गांव में प्रस्तावित 35 करोड़ रुपये के कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार को जिला पंचायत में आयोजित जनसुनवाई के दौरान चौकड़ी समेत आसपास के गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे और प्लांट के खिलाफ विशेष ग्राम सभा बुलाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर वे आधिकारिक रूप से इस परियोजना का विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। जनसुनवाई में उठी विशेष ग्राम सभा की मांग ग्रामीणों ने कलेक्टर सहित जिला प्रशासन के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर विशेष ग्राम सभा आयोजित करने की अनुमति मांगी। उनका कहना है कि प्लांट निर्माण शुरू होने से पहले गांव की राय लेना जरूरी है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। चार गांवों के लोग कर रहे विरोध चौकड़ी गांव के साथ आसपास के चार गांवों के ग्रामीण भी इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे स्वच्छ ऊर्जा या ग्रीन एनर्जी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिस स्थान पर प्लांट स्थापित किया जा रहा है, वह कृषि और ग्रामीण आबादी के बीच स्थित है, जिससे भविष्य में कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। पानी की कमी को लेकर सबसे बड़ी चिंता ग्रामीणों के अनुसार, चौकड़ी क्षेत्र पहले से ही जल संकट से जूझ रहा है। गांव में भूजल स्तर 250 फीट से भी नीचे पहुंच चुका है। उनका दावा है कि यदि सीबीजी प्लांट शुरू हुआ तो प्रतिदिन करीब 40 से 50 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होगी, जिससे गांव और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल एवं सिंचाई का संकट और गहरा सकता है। खेती और पर्यावरण पर असर की आशंका ग्रामीणों ने आशंका जताई कि प्लांट के लिए बड़े पैमाने पर नेपियर घास की खेती कराई जाएगी, जिससे पारंपरिक फसलों की खेती प्रभावित होगी और कृषि भूमि की उत्पादक क्षमता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा प्लांट से निकलने वाली दुर्गंध और अन्य पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे आसपास रहने वाले लोगों का जीवन प्रभावित होगा। जबरन निर्माण हुआ तो करेंगे उग्र आंदोलन ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर जबरन निर्माण कार्य शुरू किया गया तो वे चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। इसके तहत पुरुष, महिलाएं और बच्चे बारी-बारी से अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल पर बैठेंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि गांव की सहमति के बिना किसी भी कीमत पर परियोजना को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।