Sunday, 6 September 2026
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बालाघाट में दो CMHO बदले:अब शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दाहिया को जिम्मेदारी, 31 बच्चों की मौत का दावा

INT News6 September 2026 at 09:41 pm

बालाघाट जिले के आदिवासी अंचल बैहर और परसवाड़ा के गांवों में फैली बीमारी से बच्चों की मौत और गंभीर स्थिति का असर स्वास्थ्य विभाग में साफ दिखाई दे रहा है। बिगड़ते हालातों के बीच महज चार दिनों के भीतर दो बार मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) बदल दिए गए हैं। 2 सितंबर को सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप को हटाकर तत्कालीन सीएमएचओ को प्रभार सौंपा गया था। इसके ठीक चौथे दिन रविवार शाम जारी आदेश में उन्हें भी हटाकर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शत्रुघन दाहिया को बालाघाट का नया सीएमएचओ नियुक्त कर दिया गया है। मौतों के आंकड़ों को लेकर घमासान जून के आखिरी सप्ताह से शुरू हुए मौतों के सिलसिले के बीच 6 सितंबर तक करीब 31 आदिवासी बच्चों की जान जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि, पूर्व सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप और प्रशासनिक अमले का दावा है कि मौतों का आंकड़ा 8 से 12 के बीच ही है। विपक्ष और स्थानीय प्रतिनिधि लगातार प्रशासन पर आंकड़े छिपाने का आरोप लगा रहे हैं। अस्पतालों में बढ़ाए गए बेड मामले की गंभीरता को देखते हुए बालाघाट अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में बिस्तरों की संख्या 50 से बढ़ाकर 138 कर दी गई है। इसके साथ ही बिठली, बैहर और लांजी के स्वास्थ्य केंद्रों में भी पीड़ित बच्चों को भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है। उधर क्षेत्रीय विधायक संजय उईके ने आरोप लगाया है कि जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है और सरकार आदिवासी बच्चों की सुरक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान नहीं दे रही है। इस संवेदनशील मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री से त्वरित समाधान की मांग की है। हाईकोर्ट पहुंचा मामला यह पूरा मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंच चुका है। याचिकाकर्ता आगामी सुनवाई के दौरान प्रभावित इलाकों की जमीनी हकीकत कोर्ट के सामने पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इस त्रासदी के पीछे केवल स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि वनांचल क्षेत्रों में फैली भीषण कुपोषण की समस्या और दूषित पेयजल भी बीमारी के पैर पसारने की मुख्य वजह बने हुए हैं।