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ग्वालियर में ‘निर्भया कैफे’ योजना टेंडर के बाद अटकी:पांच महीने में जगह नहीं ढूंढ पाई नगर निगम, एक करोड़ में तैयार होने हैं 10 कैफे
विधवा और निराश्रित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ग्वालियर स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन की ‘निर्भया कैफे’ योजना शुरु होने से पहले ही अटक गई है। शहर में 10 कैफे खोलने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और निर्माण एजेंसी भी तय कर दी गई है, लेकिन 6 माह में किसी भी कैफे के लिए जगह फाइनल नहीं हो सकी है। इसके चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। फरवरी में जारी हुआ था टेंडर योजना के तहत शहर के अलग-अलग स्थानों पर 10 कैफे बनाए जाने हैं। इनका संचालन पूरी तरह महिलाओं द्वारा किया जाएगा। स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन ने फरवरी 2026 में इसके लिए टेंडर जारी किए थे। तीन फर्मों ने टेंडर में हिस्सा लिया था। इनमें से दो के आवेदन निरस्त होने के बाद एक फर्म को काम सौंपा गया। स्मार्ट सिटी की ओर से संबंधित फर्म को लेटर ऑफ एलोकेशन (LOA) भी जारी किया जा चुका है। हर कैफे पर 10 लाख रुपए खर्च प्रत्येक निर्भया कैफे के निर्माण पर करीब 10 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें 30 प्रतिशत राशि यानी करीब 3 लाख रुपए स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन देगा, जबकि शेष 70 प्रतिशत यानी करीब 7 लाख रुपए इच्छुक वेंडर को खर्च करने होंगे। इस हिसाब से 10 कैफे की पूरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1 करोड़ रुपए है। करीब एक दर्जन सरकारी परिसरों में जगह तलाशी स्मार्ट सिटी ने कैफे के लिए करीब एक दर्जन सरकारी परिसरों को चिह्नित किया था। इनमें संभागीय आयुक्त कार्यालय, स्मार्ट सिटी कार्यालय, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय क्रमांक-1, जिला अस्पताल, एमएलबी कॉलेज, जीडीए मुख्यालय, जीवाजी यूनिवर्सिटी, पद्मा विद्यालय और साइंस कॉलेज सहित अन्य स्थान शामिल हैं। अधिकांश संस्थानों ने जगह देने से किया इनकार स्मार्ट सिटी की ओर से चिह्नित स्थानों में से अधिकांश संस्थानों ने कैफे के लिए जगह उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है। वहीं कुछ संस्थानों की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। ऐसे में निर्माण एजेंसी तय होने और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद परियोजना जमीन पर शुरू नहीं हो पा रही है। महिला सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई योजना नगर निगम आयुक्त एवं स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन के प्रभारी संघ प्रिय ने बताया कि शहर में 10 निर्भया कैफे बनाए जाने हैं और इनका संचालन पूरी तरह महिलाओं द्वारा किया जाएगा। योजना का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार का अवसर देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। अब कैफे के लिए उपयुक्त स्थान मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा।