Sunday, 27 September 2026
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भोपाल में पर्यावरण और वन्यजीवों पर कार्यशाला:वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व पर चर्चा; एक्सपर्ट बोले- शहर की प्लानिंग अभी से एनवायरनमेंट-फ्रेंडली हो

INT News26 September 2026 at 07:52 pm

भोपाल में टाइगर, लेपर्ड और अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी के बीच इंसानों और वन्यजीवों के बीच को-एग्जिस्टेंस यानी साथ रहने के तरीके को लेकर एक्सपर्ट्स ने लोगों और प्रशासन की भूमिका पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि वन्यजीवों से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते समय सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि किसी इलाके या वन्यजीव की लोकेशन सार्वजनिक होने से वहां लोगों की आवाजाही बढ़ सकती है। यह बात भोपाल में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन क्लाइमेट एंड को-एग्जिस्टेंस नैरेटिव्स में सामने आई। 26 और 27 सितंबर को पर्यावरण परिसर स्थित ईपीसीओ कॉन्फ्रेंस हॉल में हो रही इस कार्यशाला में पर्यावरण विशेषज्ञ, वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोग, पत्रकार, शोधकर्ता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और सरकारी संस्थाओं से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। भोपाल में वन्यजीवों के साथ बढ़ रहा मेलजोल लास्ट वाइल्डरनेस फाउंडेशन की विद्या वेंकटेश ने कहा कि भोपाल के आसपास बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीव मौजूद हैं। शहर के लोग और वन्यजीव एक-दूसरे के साथ रहने के तरीके सीख रहे हैं। उन्होंने मुंबई का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां तेंदुओं के साथ इंसानों के सह-अस्तित्व को लेकर लंबे समय से काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक वन्यजीवों की संख्या और शहर की क्षमता के बीच प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है। हिडन वॉटरफॉल की लोकेशन शेयर करने से बढ़ती है भीड़ मोमेंटम वर्क्स, बेंगलुरु के श्रीराम ने कहा कि वन्यजीवों के इलाकों या जंगलों में मौजूद प्राकृतिक जगहों की लोकेशन सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने से वहां लोगों की भीड़ बढ़ सकती है। उन्होंने झरनों का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी छिपे हुए झरने की लोकेशन वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचते हैं। कई बार लोग प्लास्टिक और अन्य कचरा भी छोड़ देते हैं, जिससे वहां रहने वाले वन्यजीवों और पूरे प्राकृतिक वातावरण पर असर पड़ता है। शहर बढ़ रहा, प्लानिंग अभी से जरूरी कार्यशाला के आयोजक विकास सिंह बघेल ने कहा कि भोपाल में अभी शहर के विकास की योजना बनाते समय पर्यावरण को ध्यान में रखने की पर्याप्त गुंजाइश है। पिछले कुछ वर्षों में शहर में निर्माण और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तेजी से हुआ है। ऐसे में आगे की प्लानिंग इस तरह करने की जरूरत है कि पानी, साफ हवा और यातायात जैसी समस्याएं भविष्य में गंभीर रूप न लें। पर्यटन से स्थानीय लोगों को रोजगार विद्या वेंकटेश ने कहा कि जंगल और वन्यजीव वाले क्षेत्रों में पर्यटन स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का माध्यम बन सकता है। उन्होंने कुनो का उदाहरण देते हुए बताया कि पर्यटन बढ़ने के साथ होटल, गाइड और सफारी वाहनों से जुड़े रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण पर भी रखी बात कार्यशाला में ऑस्ट्रेलिया के वन अर्थ, वन ब्रीथ एंड थर्ड पोल मैगजीन के संस्थापक क्रेग कूपर सहित पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने भी विचार रखे। कार्यशाला में जलवायु परिवर्तन, वन्यजीव संरक्षण और इंसानों के साथ उनके संतुलित सह-अस्तित्व से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।