समाचार · छत्तीसगढ़
बीएसपी लोहा चोरी केस में पूर्व GM को मिली जमानत:बीएसपी में स्क्रैप यार्ड की निगरानी और स्टॉक रिकॉर्ड में लापरवाही के आरोप में थे जेल में बंद
भिलाई स्टील प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस से 250 टन लोहा चोरी और फ्लू डस्ट के अवैध परिवहन से जुड़े मामले में भिलाई स्टील प्लांट के पूर्व जीएम हिमांशु भूषण मलिक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने 10 अगस्त को मलिक की पहली जमानत याचिका मंजूर कर दी। पुरानी भिलाई पुलिस ने उन्हें 9 जुलाई को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वे जेल में थे। बीएसपी से लोहा चोरी का यह मामला पुरानी भिलाई थाने में दर्ज है। मामला बीएसपी के ब्लास्ट फर्नेस विभाग से फ्लू डस्ट के अवैध परिवहन और स्क्रैप चोरी से जुड़ा है। पुलिस की शुरुआती जांच में दो ट्रकों CG-04-QT-8797 और CG-08-AW-1475 के जरिए बीएसपी के ब्लास्ट फर्नेस विभाग से फ्लू डस्ट ले जाने की शिकायत सामने आई थी। जांच के दौरान पुलिस को ट्रकों में ले जाए जा रहे कुछ फेरस स्क्रैप के बीएसपी की संपत्ति होने का भी संदेह हुआ। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और स्क्रैप की चोरी व कथित हेराफेरी से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आने लगी। मास्टरमाइंड समेत 17 आरोपी जा चुके हैं जेल
इस मामले में पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड संजय सिंह समेत 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में स्क्रैप यार्ड से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आई। इसी जांच के आधार पर पूर्व जीएम हिमांशु भूषण मलिक को भी आरोपी बनाया गया और 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का आरोप था कि मलिक स्क्रैप यार्ड के संचालन और निगरानी से जुड़े थे। उनके जिम्मे यार्ड की निगरानी और स्क्रैप के स्टॉक का रिकॉर्ड बनाए रखना था। पुलिस के मुताबिक, स्टॉक रिकॉर्ड सही तरीके से नहीं रखा गया और यार्ड की निगरानी में भी लापरवाही हुई। जांच एजेंसी का दावा था कि इसी वजह से स्क्रैप की कथित चोरी और हेराफेरी को आसानी हुई। एफआईआर में नहीं है नाम दर्ज
हालांकि हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने इन आरोपों को चुनौती दी। मलिक की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कोर्ट को बताया कि उनका नाम एफआईआर में नहीं था। उनके खिलाफ मुख्य आधार सह-आरोपी का मेमो बयान है और इस बयान की स्वतंत्र पुष्टि करने वाला ठोस सबूत नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मलिक केवल स्क्रैप यार्ड की निगरानी के लिए जिम्मेदार थे, जबकि प्लांट की सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF के पास थी। ऐसे में सिर्फ निगरानी में लापरवाही के आरोप पर उन्हें चोरी में शामिल नहीं माना जा सकता। बचाव पक्ष ने कोर्ट को यह भी बताया कि मलिक जांच में सहयोग कर रहे थे और जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी के सामने पेश हुए। उनकी ओर से गिरफ्तारी के समय जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात भी कही गई। राज्य की ओर से जमानत का विरोध किया गया। हालांकि कोर्ट ने केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलों को देखने के बाद मलिक को जमानत देने का फैसला किया। चार्जशीट कोर्ट में पेश
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मलिक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। मामले में चार्जशीट पहले ही कोर्ट में पेश की जा चुकी है और वे 9 जुलाई से हिरासत में हैं। इसके अलावा इसी मामले में एक सह-आरोपी को 4 अगस्त को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने मलिक को भी समानता के आधार पर जमानत का हकदार माना। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल पूरा होने में समय लग सकता है। दो स्थानीय जमानतदार और व्यक्तिगत बंधपत्र पेश करने के बाद मलिक को रिहा किया जाएगा। हालांकि जमानत के साथ कोर्ट ने कई शर्तें भी लगाई हैं। उन्हें ट्रायल की तय तारीखों पर उपस्थित रहना होगा। गवाहों की गवाही के दौरान अनावश्यक स्थगन नहीं मांग सकेंगे। आरोप तय होने और कोर्ट में उनका बयान दर्ज होने जैसी महत्वपूर्ण तारीखों पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहना होगा।