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बिहार में 1.30 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी, इन 6 कंपनियों के नाम आए सामने, मिलेगा बंपर रोजगार

INT News14 September 2026 at 08:47 am

पटना से आशुतोष दीक्षित की रिपोर्ट

Bihar Electricity Investment: बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को लेकर नया अपडेट है. क्रिलोस्कर ब्रदर लिमिटेड, हिंदुस्तान पावर एक्सचेंज, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज समेत करीब 6 कंपनियों ने राज्य में निवेश करने के लिए रुचि जाहिर की है. अगले चरण की बातचीत भी जल्द होने की उम्मीद है.

अगले 5 सालों में निवेश की प्लानिंग

बताया जा रहा है कि अगर सब कुछ सही रहा तो जल्द राज्य में सौर और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. सरकार ने बिहार में बिजली क्षेत्र में पांच साल में 1.30 लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा है. इतने बड़े निवेश से आने वाले दिनों में न सिर्फ बिजली क्षेत्र का आधारभूत ढांचा मजबूत होगा, बल्कि बड़ी संख्या में रोजगार के साधन भी मुहैया होंगे.

बिहार सरकार का लक्ष्य

बिहार सरकार ने साल 2030 तक 24 हजार मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी और 6 गीगावॉट घंटे स्टोरेज का लक्ष्य रखा है. इसके लिए बड़े निवेश की जरूरत है. अभी तक जो ब्लू प्रिंट तैयार किया गया है उसके तहत बिहार में अगले पांच सालों में बिजली क्षेत्र में 1,33,541 करोड़ रुपये का निवेश लाने की योजना है.

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कहां-कहां कितना किया जाएगा खर्च?

इसमें बिजली उत्पादन पर 32,679 करोड़, ट्रांसमिशन पर 24,603 करोड़, वितरण पर 25,909 करोड़ और रखरखाव पर 2,370 करोड़ रुपये खर्च किए जायेंगे. इतनी भारी भरकम राशि जुटाने के लिए ऊर्जा विभाग ने भी पूरी ताकत झोंक दी है. सरकार ने निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 तैयार किया है.

निवेशकों से हुई बातचीत

इसी साल छह और सात अगस्त को नई दिल्ली में सीआईआई की ओर से आयोजित कॉन्फ्रेंस 6 अगस्त को भुवनेश्वर और 10 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा मंत्री, ऊर्जा सचिव और अन्य अधिकारियों की निवेशकों से बात हो चुकी है. इसी का नतीजा है कि तीन बड़ी कंपनियों के साथ ही कुछ और बड़े निवेशकों ने भी बिहार में अपार संभावनाओं को देखते हुए निवेश के लिए कदम आगे बढ़ाया है.

घाटे से मुनाफे की ओर बढ़ रहीं बिजली कंपनियां

राज्य के बिजली क्षेत्र में तेजी से बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं. जिसका फायदा भी निवेशकों को गिनाया गया है. प्रति महीने 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने के बावजूद बिहार की बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति तेजी से सुधरी है. साल 2022 में 2,218 करोड़ रुपये के घाटे की तुलना में 2026 में 2,375 करोड़ रुपये का अस्थायी लाभ दर्ज किया गया है. राज्य सरकार मुफ्त बिजली देने पर भी हर साल करीब 2300 करोड़ रुपये खर्च कर रही है.

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