Friday, 7 August 2026
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उत्तराखंड के रवि टम्टा का कमाल, बनाई उड़ने वाली कार; 1.5 घंटे का सफर 12 मिनट में- VIDEO

INT News7 August 2026 at 02:50 pm

अगर सच्चे दिल से मेहनत करें तो कुछ भी नामुमकिन नहीं...! उत्तराखंड के रवि टम्टा की उपलब्धि भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने उड़ने वाली कार यानी फ्लाइंग कार का आविष्कार किया है। रवि टम्टा का कहना है कि वह पिछले 10 साल से इस पर काम कर रहे थे। उन्होंने परीक्षण के तौर अल्मोड़ा के मैदान पर इसे कुछ देर उड़ाया। उनका दावा है कि यह भारत में इस तरह का पहला आविष्कार है।रवि टम्टा अल्मोड़ा जनपद के रहने वाले हैं। वह प्रदेश के युवा इनोवेटर हैं। उन्होंने और उनकी टीम ने HAPIDA SKYNeX के प्रोटोटाइप (उड़ने वाली कार) का सफल प्रारंभिक परीक्षण कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रवि ने साबित कर दिया कि सपनों की उड़ान संसाधनों से नहीं, संकल्प से तय होती है।बेहद कम संसाधनों में रवि और उनकी टीम ने पर्सनल स्काई मोबिलिटी की दिशा में बेहतरीन प्रयास किया है। यदि यह तकनीक आगे सभी परीक्षणों में सफल होती है तो यह देश में परिवहन की दिशा में नई क्रांति ला सकती है। रवि खुद इस उपलब्धि को लेकर काफी खुश और उत्साहित हैं।रवि टम्टा बोले- 1.5 घंटे का सफर 12 मिनट मेंएक मीडिया प्लेटफॉर्म से बातचीत में रवि टम्टा ने कहा कि उन्हें इस उपलब्धि की बेहद खुशी है। पिछले कई समय से इस पर काम कर रहा था कि कैसे इसे बना सकते हैं। काफी समय से सपना था फ्लाइंग कार का। दस साल तक लगातार संघर्ष के बाद मैं इसे सफल कर पाया हूं। अपनी पहली उड़ान के बारे में बोलते हुए रवि ने कहा कि अभी इसमें समय लगेगा, हालांकि अल्मोड़ा के मैदान पर उन्होंने परीक्षण के तौर पर कार को उड़ाया। मैदान से उनके घर की दूरी 40 किलोमीटर है। अगर मैं रोड से जाता तो तकरीबन 1.5 घंटे लगते, लेकिन मैं इस फ्लाइंग कार से मैदान से अपने घर सिर्फ 12 मिनट में ही पहुंच सकता हूं।बताया-कितना मुश्किल था सफररवि ने कहा कि अभी मुझे परमिशन लेनी है। इसलिए ज्यादा उड़ान नहीं भर पाया हूं। हवा में सफर करना, जमीन के मुकाबले चुनौतीपूर्ण होता है। काफी समय मैंने इस पर मेहनत की। उन्होंने दावा किया है कि भारत की पहली फ्लाइंग कार है।फ्लाइंग कार बनाने का विचार कैसे आयारवि टम्टा ने कहा कि मेरे इस आविष्कार के पीछे के विजन की बात करें तो मैं स्पष्ट कर दूं कि अगर कोई मेडिकल इमरजेंसी हो या ट्रैफिक जाम... उसे देखते हुए यह आविष्कार काफी अहम है। आठ से 10 साल बाद आप देखेंगे कि यह हर घर में नॉर्मल बात होगी। हम इसे हर घर तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे।