Tuesday, 7 July 2026
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सहकारिता से रुकेगा पलायन और मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, हजारीबाग सम्मेलन में बोलीं मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की

INT News7 July 2026 at 08:42 pm

हजारीबाग से जयनारायण की रिपोर्ट

Hazaribagh News: कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की ओर से मंगलवार को हजारीबाग स्थित विनोबा भावे विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में प्रमंडलीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की शामिल हुईं. कार्यक्रम में प्रमंडल के विभिन्न सहकारी समितियों के अध्यक्ष, सचिव, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया. सम्मेलन के दौरान मंत्री ने झारखंड सहकारिता निबंधन पोर्टल का रिमोट के माध्यम से शुभारंभ किया. साथ ही राज्य में मिलेट मिशन की भी शुरुआत की गई. कार्यक्रम में सहकारिता के विस्तार, किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई.

जागरूकता से ही आएगा बदलाव

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि किसी भी बदलाव की पहली शर्त जागरूकता है. यदि लोग जागरूक नहीं होंगे तो विकास का सपना अधूरा रह जाएगा. उन्होंने स्वीकार किया कि झारखंड की सहकारिता व्यवस्था में अभी भी कुछ लोगों का वर्चस्व बना हुआ है और सहकारिता को सीमित दायरे में रखने की कोशिश की जाती है. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का भी मानना था कि सहकारिता के माध्यम से समाज का समग्र विकास संभव है. इसके लिए सत्ता और संसाधनों का विकेंद्रीकरण जरूरी है. देश के कई राज्यों ने सहकारिता की ताकत को पहचाना है और वहां इसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है.

दक्षिण राज्यों का उदाहरण दिया

मंत्री ने कहा कि भारत के दक्षिणी राज्यों की आबादी देश की कुल आबादी का लगभग 20 प्रतिशत है, लेकिन देश की जीडीपी में उनकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है. इसके पीछे सहकारिता आधारित विकास मॉडल की बड़ी भूमिका रही है. उन्होंने बताया कि हाल ही में मनाए गए सहकारिता सप्ताह के दौरान राज्य में डेढ़ लाख से अधिक नए सदस्यों का पंजीकरण किया गया. उनका कहना था कि मजबूत सहकारिता व्यवस्था झारखंड से पलायन रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

ग्रामीण इकोनॉमी सेंटर बनेंगे लैंप्स और पैक्स

मंत्री ने कहा कि वर्तमान में झारखंड में सहकारिता का दायरा खाद, बीज वितरण और कृषि उपज की खरीद तक सीमित है. आने वाले समय में लैंप्स और पैक्स को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. उन्होंने घोषणा की कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले लैंप्स और पैक्स के ऋण का मूलधन और ब्याज सरकार वहन करेगी. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी.

दुग्ध उत्पादन में बढ़ी भागीदारी

शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि वर्ष 2014 में झारखंड में प्रतिदिन केवल 40 हजार लीटर दूध का संग्रह होता था, जबकि वर्तमान में यह बढ़कर लगभग तीन लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है. उन्होंने कहा कि राज्य के करीब 70 हजार किसान झारखंड मिल्क फेडरेशन से जुड़कर काम कर रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में अब मोती की खेती जैसे नवाचारों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय के नए स्रोत विकसित हो रहे हैं.

विधायकों ने उठाए स्थानीय मुद्दे

सम्मेलन में बरही विधायक मनोज यादव ने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष हजारीबाग में पर्याप्त धान क्रय केंद्र नहीं खोले गए, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पाया. उन्होंने सरकार से बरही में कोल्ड स्टोरेज की स्थापना और गौरियाकरमा पशु फार्म के आधुनिकीकरण की मांग की. रामगढ़ विधायक ममता देवी ने कहा कि कई जिलों में किसानों को समय पर धान बीज उपलब्ध नहीं हो पाया. उन्होंने बताया कि रामगढ़ में कृषि विभाग के कई कार्यालय नहीं होने से किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वहीं मांडू विधायक निर्मल महतो ने वर्ष 2022 की उस योजना का मुद्दा उठाया, जिसमें विष्णुगढ़ और टाटीझरिया के पशुपालकों को दुधारू गाय खरीदने के लिए राशि दी गई थी, लेकिन अब तक खरीदारी पूरी नहीं हो सकी.

नई योजनाओं की दी गई जानकारी

झारखंड निबंधन सहयोग समिति के शशि रंजन ने बताया कि 29 जून से 6 जुलाई तक मनाए गए सहकारिता सप्ताह के दौरान राज्यभर में 80 हजार से अधिक नए सदस्य बनाए गए हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड सहकारिता निबंधन पोर्टल की शुरुआत से सहकारी समितियों के पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल होगी. कृषि निदेशक पंकज कुमार ने कहा कि कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने मिलेट मिशन शुरू किया है. इस योजना के तहत सभी प्रज्ञा केंद्रों पर किसानों का पंजीकरण किया जाएगा और प्रत्येक किसान को प्रति हेक्टेयर तीन हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी. डायरी निदेशक डॉ. संजीव रंजन ने बताया कि राज्य में 70 हजार डेयरी कम्युनिटी सोसायटी बनाने का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने कहा कि देश के कुल दूध उत्पादन में झारखंड की हिस्सेदारी अभी केवल 1.6 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.

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उत्कृष्ट समितियों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान इंडियन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, हैदराबाद की कामिनी सिंह ने वनोपज के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर प्रस्तुति दी. सम्मेलन में हजारीबाग उपायुक्त हेमंत सती, जिला सहकारिता पदाधिकारी मनोज कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे. इस अवसर पर झासकोफिस, झासकोलैंफ, पैक्स और झामोफेड से जुड़े प्रतिनिधियों को निबंधन प्रमाण पत्र प्रदान किए गए. उत्कृष्ट कार्य करने वाली सहकारी समितियों को परिसंपत्तियां और टूलकिट भी वितरित किए गए. कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देना और किसानों को आधुनिक योजनाओं से जोड़ना रहा.

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