Tuesday, 11 August 2026
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पत्रकार छत्रपति हत्या मामले सिरसा डेरा प्रमुख को नोटिस:सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, अंशुल बोले-हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच पर सवाल खड़े किए

INT News11 August 2026 at 03:25 pm

सिरसा के पत्रकार छत्रपति हत्या मामले में सिरसा डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की एक बार फिर मुश्किलें बढ़ सकती है। मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका हो गई है और इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को नोटिस जारी किया है। दावा है कि डेरा प्रमुख की ओर से उनके वकील पेश हुए और तीन जजों की पीठ ने मामले को सुना और उनकी मांग पर याचिका दायर की। जानकारी के अनुसार, करीब पांच माह पहले पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा प्रमुख को राहत देते हुए मामले में बरी कर दिया था, बाकी तीन आरोपियों की सजा को बरकरार रखा था। इसी फैसले के खिलाफ पत्रकार छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई थी। अंशुल छत्रपति का आरोप है कि हाई कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि सीबीआई ने अपनी जांच में डेरा प्रमुख को साजिशकर्ता बनाया था। अंशुल छत्रपति ने मीडिया को दिए बयान में बताया, पिता पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या मामले में हमने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दायर की थी। उस मामले में हमने छूट मांगी थी कि याचिका दायर की जाए। क्योंकि डेरा सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत राम रहीम को सीबीआई ने जांच में मुख्य साजिशकर्ता बनाया था। सीबीआई पंचकूला की अदालत ने गुरमीत राम रहीम सहित तीन सह आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। सिलसिलेवार ढंग से जानिए क्या कहा 10 अगस्त को मामले को सुनी अंशुल बोले, उस जांच और फैसले के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा कोर्ट में अपील थी। उस अपील पर गुरमीत राम रहीम सहित सह तीनों आरोपियों की सजा को अपहेल्ड किया गया। पंजाब एंड हरियाणा कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हमने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया औरि एसएलपी दायर की थी। 10 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की पीठ ने मामले को सुना और उनकी अपील को दायर किया गया। गुरमीत राम रहीम के वकील ने लिया नोटिस अंशुल बोले, सुप्रीम कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम सहित तीनों सह आरोपियों को नोटिस दिया गया। उस समय उनका वकील मौजूद था और नोटिस रिसिव किया गया। ये उनके लिए राहत की बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को नोटिस किया है। अब आगे की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ी जाएगी। हमारा पुरजोर विरोध है, जो पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट का आरोपियों की अपील पर फैसला था। वो फैसला कहीं भी जायज नहीं था। इन सुबूतों पर बनाया था साजिशकर्ता अंशुल ने मीडिया के सामने पक्ष रखते हुए कहा, सीबीआई ने लंबे समय तक जांच की और डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को षडयंत्रकर्ता बनाया और दो शूटर थे, जिन्होंने मेरे पिता पर गोलियां बरसाईं। एक डेरे का मैनेजर किशनलाल, जिसका लाइसेंसी रिवॉल्वर था। लाइसेंसी रिवॉल्वर, वॉकी-टॉकी सेट और बाकी सुबूतों एवं गवाह के आधार पर इस और इशारा कर रहे थे कि डेरा प्रमुख इसमें शामिल है। हाई कोर्ट ने इन सब चीजों को नजरअंदाज किया। सीबीआई के फैसले को बरकरार रखने की मांग अंशुल ने आगे कहा, इसी फैसले के खिलाफ याचिका दायर कर मांग की कि सीबीआई पंचकूला के फैसले को बरकरार रखा जाए और उसे इस मामले में सजा सुनाई जाए। ये भी कहूंगा कि सीबीआई हमारे देश की प्राइमरी जांच एजेंसी है। सीबीआई ने इस मामले की जांच की और सीबीआई इसे यहां तक लेकर गई। अदालत ने जो फैसले सुनाए, उसमें सीबीआई की कड़ी मेहनत और जांच थी। इसके बावजूद जिस प्रकार पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट का फैसला आया और हाई कोर्ट के उस ऑर्डर ने सीबीआई की जांच पर सवाल खड़े किए। सीबीआई रही नदारद अंशुल बोले, ये देश की प्राइमरी जांच एजेंसी की साख पर बट्‌टा है। मेरा जांच एजेंसी और सीबीआई के निदेशक से अनुरोध है कि इस मामले में सीबीआई नदारद है। इस मामले में एसएलपी जल्द मूव करनी चाहिए। हम शिकायतकर्ता आज सुप्रीम कोर्ट में खड़े हैं, जबकि इन केस की असल मालिक की प्रोसेक्यूशन की ओर से सीबीआई नदारद है। कहीं न कहीं ये देरी सवाल खड़े करता है और शंका पैदा करता है। इसमें देरी क्यों है? मुझे लगता है कि सीबीआई को इस मामले में जल्द एसएलपी मूव करनी चाहिए, क्योंकि ये देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की साख पर धब्बा है। 5 माह पहले हाई कोर्ट ने किया था बरी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा के राम रहीम को बरी कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने 3 आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की सजा को बरकरार रखा है। इससे पहले 17 जनवरी 2019 को पंचकूला की स्पेशल CBI कोर्ट ने राम रहीम समेत बाकी सभी आरोपियों को 7 साल कैद की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस हत्याकांड में राम रहीम के साजिशकर्ता होने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। जिस वजह से राम रहीम को बरी कर दिया गया।