समाचार · उत्तर प्रदेश
अब 8वीं के बाद नहीं रुकेगी बेटियों की पढ़ाई, आवासीय स्कूलों में 88 हजार से ज्यादा छात्राएं, NEET-UPSC तक की तैयारी

UP News (पवन तोमर): उत्तर प्रदेश में आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के लिए आगे की पढ़ाई का रास्ता आसान हो रहा है. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अब छात्राओं को छठी से 12वीं कक्षा तक निशुल्क शिक्षा दी जा रही है. इसका असर नामांकन पर भी दिख रहा है. इन आवासीय विद्यालयों में छात्राओं की संख्या बढ़कर 88,248 हो गई है, जबकि पहले यह आंकड़ा 72,680 था. पढ़ाई के साथ यहां छात्राओं को डिजिटल शिक्षा, खेल और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर भी दिए जा रहे हैं.
आठवीं के बाद भी जारी रख सकेंगी पढ़ाई
पहले कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की व्यवस्था थी. इसके बाद कई छात्राओं को आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण आगे की पढ़ाई छोड़नी पड़ती थी. वर्ष 2017 के बाद इस व्यवस्था का विस्तार किया गया और शिक्षा का दायरा 12वीं कक्षा तक बढ़ाया गया. इससे ग्रामीण और वंचित परिवारों की बेटियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिला है.
स्मार्ट क्लास और लैब से मिल रही तकनीकी शिक्षा
इन विद्यालयों में अब पारंपरिक पढ़ाई के साथ तकनीक आधारित शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है. स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब के माध्यम से छात्राओं को डिजिटल शिक्षा दी जा रही है. वहीं, एस्ट्रोनॉमिकल लैब के जरिए विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों को समझने का मौका मिल रहा है. इसका उद्देश्य छात्राओं में प्रयोगात्मक शिक्षा और तकनीकी जानकारी के प्रति रुचि बढ़ाना है.
छात्रवृत्ति की रकम सीधे बैंक खातों में
छात्राओं को आर्थिक परेशानी के कारण पढ़ाई न छोड़नी पड़े, इसके लिए छात्रवृत्ति की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है. आवासीय विद्यालयों में रहने वाली छात्राओं के लिए भोजन, सुरक्षित आवास और देखभाल की व्यवस्था भी की गई है. इससे दूरदराज के क्षेत्रों की छात्राओं को पढ़ाई जारी रखने में मदद मिल रही है.
नीट और यूपीएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी पर भी जोर
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राएं अब स्कूली शिक्षा के साथ आगे की चुनौतियों के लिए भी तैयार हो रही हैं. उन्हें नीट, यूपीएससी और रक्षा सेवाओं जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके अलावा एनसीसी और स्काउट-गाइड जैसी गतिविधियों के जरिए उनमें अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है.
शिक्षा के साथ कौशल विकास पर भी ध्यान
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के मुताबिक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में शैक्षिक सुविधाओं के विस्तार के साथ छात्राओं के व्यक्तित्व विकास और कौशल निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े क्षेत्रों की बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है.
Also Read: बरेली में पेंशनरों को मिलेगी राहत, अब घर बैठे मोबाइल से जमा करें जीवन प्रमाण पत्र, दफ्तर जाने की झंझट खत्म