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दिल्ली जंतर-मंतर प्रदर्शनः राहुल गांधी के बयान पर सवाल, रुपेश पाण्डेय ने कहा- संस्थाओं पर सवाल खड़े करना गलत

दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए युवा उद्यमी एवं राजनीतिक रुपेश पाण्डेय ने कहा कि बिना किसी निष्पक्ष जांच और आधिकारिक तथ्यों के सीधे केंद्रीय गृह मंत्री पर आरोप लगाना राजनीतिक अवसरवाद का परिचायक है. रुपेश पाण्डेय ने कहा कि इस प्रकार के बयान न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अनावश्यक सवाल खड़े करते हैं, बल्कि गंभीर मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास भी प्रतीत होते हैं.
उन्होंने कहा- जब भी देश में कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई घटना सामने आती है, कांग्रेस बिना तथ्यों का इंतजार किए केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को कठघरे में खड़ा करने लगती है. विपक्ष की भूमिका सवाल पूछने की है, लेकिन बिना जांच पूरी हुए किसी पर आरोप लगाना केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है.
रुपेश पाण्डेय ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन और पुलिस की संवैधानिक जिम्मेदारी है. यदि किसी कार्रवाई को लेकर कोई शिकायत या विवाद है, तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली पुलिस कानून के दायरे में रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करती है. किसी भी घटना का आकलन जांच रिपोर्ट तथा आधिकारिक तथ्यों के आधार पर होना चाहिए, न कि राजनीतिक बयानों के आधार पर. लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है.
गृह मंत्री के कार्य की सराहना करते हुए रुपेश पाण्डेय ने कहा- अमित शाह के नेतृत्व में देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. ऐसे में हर घटना पर बिना सबूत गृह मंत्री को निशाना बनाना उचित नहीं है. जनता अब तथ्यों और जवाबदेही पर आधारित राजनीति चाहती है, न कि हर मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति.
अपने बयान के अंत में रुपेश पाण्डेय ने कहा कि देश की राजनीति में स्वस्थ संवाद और रचनात्मक विपक्ष की आवश्यकता है. उन्होंने राहुल गांधी से अपील की कि वे संवेदनशील मामलों में तथ्यों के सामने आने से पहले राजनीतिक निष्कर्ष निकालने से बचें और लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा जांच प्रक्रिया का सम्मान करें.