समाचार · उत्तराखंड
पहले पीटा, फिर फांसी पर लटका दिया; देहरादून में शिक्षिका की मौत मामले में परिजन

देहरादून में दहेज के लिए परेशान किए जाने के कारण संदिग्ध हालात में मरी एक सरकारी स्कूल टीचर के परिवार ने मामले में शामिल लोगों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और केस को गढ़वाल जिले के श्रीनगर शहर में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया है। मृतका के परिवार ने उसके पति, सास और ननद पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने महिला की हत्या करने के बाद उसके शव को फंदे से लटका दिया। मृतका के पति उत्तराखंड सचिवालय में पर्सनल सेक्रेटरी हैं।समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए मृतका के चचेरे भाई रितांशु कंडारी ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और अपनी बहन की मौत के हालात पर गहरा संदेह जताया। कंडारी ने कहा कि यह हम सभी परिवार वालों के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। जब से उसके ससुर का निधन हुआ, उसका पति, सास और ननद शामिल उसे प्रताड़ित कर रहे थे। वे लोग ससुर की मौत के लिए उसे ही जिम्मेदार ठहरा रहा था। वे उसे 'मनहूस' कहते थे और आरोप लगाते थे कि जब से वह घर में आई है, तभी से ये सब बुरी चीजें हो रही हैं।अपनी बहन को एक मजबूत और हिम्मत वाली लड़की बताते हुए कंडारी ने इस दावे को खारिज कर दिया कि उसने अपनी मर्जी से आत्महत्या की। उन्होंने कहा कि वह बहुत हिम्मत वाली लड़की थी। हमारी बहन जैसी मजबूत लड़की ऐसा कदम नहीं उठा सकती थी। हमने उससे घर आने को कहा था और वह सुबह लौटने के लिए तैयार भी थी। हमें नहीं पता कि उसके बाद क्या हुआ। हमें पूरा शक है कि उन्होंने उसे पीटा और फिर फांसी पर लटका दिया।कंडारी ने आगे आरोप लगाया कि जब पीड़िता का परिवार जवाब मांगने अस्पताल पहुंचा तो आरोपी के परिवार ने उनके साथ मारपीट की। पुलिस की कार्रवाई में देरी पर सवाल उठाते हुए कंडारी ने कहा कि मौत के साफ सबूत होने के बावजूद उन्हें अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है? कंडारी ने बताया कि अधिकारियों ने शनिवार को बयान दर्ज किए और परिवार को जल्द ही गिरफ्तारी का भरोसा दिलाया। कंडारी ने कहा कि पुलिस ने आज बयान दर्ज किए और हमें बताया कि जल्द ही गिरफ्तारियां होंगी। हम मांग करते हैं कि सरकार पूरी तरह निष्पक्ष रहे। मैंने राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन कुसुम खंडवाल से भी बात की है जो इस मामले पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। अपने स्थानीय विधायक के साथ मिलकर हम मांग करते हैं कि इस मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में हो और इसे देहरादून से श्रीनगर ट्रांसफर किया जाए।