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केन-बेतवा परियोजना के विरोध में चिताओं पर लेटीं महिलाएं:छतरपुर में आंदोलन का तीसरा दिन, जबरन बेदखली और दवा पानी रोकने के आरोप लगाए
मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत अन्य विकास परियोजनाओं से विस्थापित ग्रामीणों का 'चिता आंदोलन' तीसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर भ्रष्टाचार और दमनकारी रवैये के आरोप लगाए हैं। आंदोलन शुक्रवार से शुरू हुआ था। आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापन से पहले उन्हें न तो उचित नोटिस दिया गया और न ही सभी प्रभावित परिवारों को पूरा मुआवजा मिला। उनका आरोप है कि ग्राम सभा और आम सभा की अनदेखी कर मनमाने तरीके से मुआवजा तय किया गया, जिससे कई परिवार अब भी वंचित हैं। देखें तस्वीरें… महिलाओं ने लगाए घूस मांगने के आरोप आदिवासी महिलाओं और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन के कुछ लोगों ने घूस मांगी और पुलिस का डर दिखाकर उन्हें उनकी पुश्तैनी जमीन छोड़ने के लिए दबाव बनाया। एक महिला ने कहा कि इस तरह का अन्याय सहने से बेहतर है कि उन्हें मार दिया जाए। राशन, पानी और दवाएं रोकने का आरोप आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि आंदोलन स्थल पर राशन, पानी, बिजली और दवाओं की आपूर्ति रोक दी गई है। आदिवासी महिलाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें गंदा पानी पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनका कहना है कि इन हालात से आंदोलनकारियों का मनोबल तोड़ने की कोशिश की जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ता ने दी चेतावनी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि विस्थापन से बड़ा कोई दर्द नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजनाओं के नाम पर अधिकारी और नेता आपदा में भी अवसर तलाश रहे हैं। उनके अनुसार, अपात्र लोगों को लाभ दिया जा रहा है, जबकि वास्तविक प्रभावितों को पूरा मुआवजा नहीं मिल रहा। भटनागर ने कहा कि यह केवल आरोप नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि वे जल्द ही हर परियोजना के "काले सच" को प्रमाणों के साथ सार्वजनिक करेंगे।