Monday, 6 July 2026
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अहमदाबाद-भावनगर हाईवे से एक करोड़ की एम्बरग्रीस के साथ एक व्यक्ति को पकड़ा

INT News5 July 2026 at 10:04 pm

Ahmedabad. गुजरात पुलिस के स्टेट मॉनिटरिंग सेल (एसएमसी) की टीम ने अहमदाबाद-भावनगर हाईवे पर राज चामुंडा होटल के पास कार्रवाई करते हुए रविवार को एक करोड़ रुपये मूल्य की एम्बरग्रीस (व्हेल मछली की उल्टी) बरामद की है। मामले में एक व्यक्ति को पकड़ा है। पकड़े गए आरोपी का नाम मेहुल चौहान है। यह अहमदाबाद जिले की धोलेरा तहसील के पीपली गांव का रहने वाला है। इसके पास से अलग-अलग आकार के पांच सफेद, क्रीम, गोल्ड ब्राउन रंग के ठोस टुकड़े बरामद किए हैं। प्राथमिक जांच में यह एम्बरग्रीस होने की पुष्टि हुई है। इसका वजन एक किलो 10 ग्राम है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत एक करोड़ से ज्यादा है। एसएमसी की टीम ने इस मामले में वन विभाग के कर्मचारियों तथा एफएसएल अधिकारियों को बुलाकर प्राथमिक जांच कराई गई, जिसमें बरामद पांचों टुकड़ों के एम्बरग्रीस (व्हेल मछली की उल्टी) होने की पुष्टि हुई है। इस मामले में धोलेरा पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई है। भावनगर के व्यक्ति से ली थीपूछताछ में मेहुल चौहान ने बताया कि वह करीब दो महीने पहले भावनगर में हीरा घिसने का काम करता था। उसी दौरान हीरा फैक्ट्री के कार्यालय में कार्यरत भावनगर के करचलियापरा निवासी पवन कोली ने उसे एम्बरग्रीस का यह जखीरा सुरक्षित रखने के लिए दिया था। बेचने पर कमीशन देने की बात कही थी। जिससे वह एम्बरग्रीस को अपने गांव पीपली ले आया। प्रवीण चौहान उर्फ कोलीने खरीदार मिलने की जानकारी दी, जिससे वो इसे लेकर प्रवीण चौहान को एम्बरग्रीस देने जा रहा था। उसी समय रास्ते में पकड़ा गया। परफ्यूम बनाने में होता है उपयोग एसएमसी के तहत एम्बरग्रीस का उपयोग उच्च गुणवत्ता वाले इत्र (परफ्यूम) को बनाने में किया जाता है। यह सुगंध को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए फिक्सेटिव के रूप में काम करती है। सुगंध को अधिक समृद्ध बनाती है। भारत में एम्बरग्रीस का व्यापार, संग्रह और बिक्री प्रतिबंधित है, क्योंकि यह व्हेल मछली से जुड़ा उत्पाद माना जाता है। व्हेल एक संरक्षित प्रजाति है। व्हेल को भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। एम्बरग्रीस की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत अधिक कीमत होने के कारण इसकी तस्करी और अवैध व्यापार का खतरा रहता है। यदि व्यापार को अनुमति दी जाए तो व्हेल के अवैध शिकार को बढ़ावा मिल सकता है, इसलिए भारत में इसके कब्जे, खरीद-फरोख्त और व्यापार पर कानूनी कार्रवाई की जाती है।