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कॉमनवेल्थ गोल्ड से एक कदम दूर हिसार का अंकुश पंघाल:कनाडा के बॉक्सर को 5-0 से हराया, 9 साल की मेहनत; फाइनल में पहुंचा
हिसार जिले के छोटे से गांव भेरिया के 22 वर्षीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए एक और पदक पक्का कर दिया है। पुरुषों के 80 किलोग्राम भार वर्ग के सेमीफाइनल में अंकुश ने कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 के एकतरफा अंतर से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। इस जीत के साथ भारत का कम से कम सिल्वर मेडल सुनिश्चित हो गया है, जबकि अब अंकुश की नजर गोल्ड मेडल पर है। रिंग में अंकुश ने शुरुआत से ही आक्रामक और तकनीकी खेल दिखाया। उनकी सटीक पंचिंग, बेहतरीन फुटवर्क और काउंटर अटैक के सामने कनाडाई मुक्केबाज टिक नहीं पाया। जजों ने सभी पांचों स्कोर अंकुश के पक्ष में दिए। गांव की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे अंकुश की यह सफलता नौ साल की मेहनत, अनुशासन और परिवार के त्याग का परिणाम मानी जा रही है। जानिए यहां तक कैसे पहुंचे अंकुश… 11 साल की उम्र में शुरू की बॉक्सिंग : अंकुश ने वर्ष 2017 में महज 11 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की थी। छह भाई-बहनों के परिवार में पले-बढ़े अंकुश का खेलों की ओर रुझान अपनी बहन और भाई को देखकर बढ़ा। कोच प्रवीण सावंत की सलाह पर पिता सुरेश पंघाल ने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए रोज गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर प्रशिक्षण केंद्र तक ले जाना और वापस लाना अपनी दिनचर्या बना लिया। उस समय लोगों ने उनकी छोटी कद-काठी और कम उम्र को लेकर कई ताने भी दिए, लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी। पहली हार के बाद छोड़ना चाहते थे बॉक्सिंग : अंकुश के करियर में सबसे कठिन दौर 2018 में आया, जब वे अपनी पहली स्टेट चैंपियनशिप के फाइनल में हार गए। इस हार से निराश होकर उन्होंने बॉक्सिंग छोड़ने का फैसला तक कर लिया था। तब पिता सुरेश और कोच प्रवीण सावंत ने उन्हें समझाया कि एक हार से सफर खत्म नहीं होता। इसके बाद अंकुश ने दोगुनी मेहनत के साथ वापसी की और लगातार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करते हुए अब कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल तक पहुंच गए। रोज पांच घंटे करते हैं अभ्यास : गोल्ड मेडल के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अंकुश प्रतिदिन सुबह दो घंटे और शाम तीन घंटे अभ्यास करते हैं। उनकी ट्रेनिंग में फिटनेस, पंचिंग स्पीड, फुटवर्क और काउंटर अटैक पर विशेष फोकस किया जाता है। कोच का कहना है कि फाइनल मुकाबले के लिए भी रणनीति इसी आधार पर तैयार की जा रही है। काउंटर अटैक और राइट स्ट्रेट उनकी ताकत : कोच प्रवीण सावंत के मुताबिक अंकुश की सबसे बड़ी ताकत उनकी काउंटर अटैक तकनीक है। वे पहले प्रतिद्वंद्वी को हमला करने का मौका देते हैं और फिर सही समय पर उसके पंच को मिस करवाकर तेज काउंटर अटैक करते हैं। उनका राइट स्ट्रेट और लेफ्ट हुक पंच विरोधी पर भारी पड़ता है। यही तकनीक सेमीफाइनल में भी उनकी जीत का बड़ा कारण बनी।