Sunday, 9 August 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

समाचार · झारखंड

फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से बदली गीता की जिंदगी

INT News9 August 2026 at 12:48 pm

राजेश गुप्ता की रिपोर्ट

लोहरदगा : लोहरदगा के भंडरा प्रखंड की मसमानो पंचायत की रहने वाली गीता कुमारी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तीकरण की एक अद्भुत मिसाल बन चुकी है. कभी मजबूरी में समाज की प्रताड़ना झेलते हुए देसी शराब बेचने वाली गीता आज पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर एक सम्मानजनक जिंदगी जी रही हैं. गीता कुमारी अपने पति आनंद राम और दो बच्चों के साथ रहती हैं.कुछ समय पहले तक उनके परिवार के पास आजीविका का कोई स्थाई साधन नहीं था. संसाधनों की भारी कमी के कारण पूरे परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी गीता के कंधों पर आ गई थी.

मजबूरी में बेचनी पड़ी शराब

कोई अन्य विकल्प न मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में देसी शराब बेचने का रास्ता चुनना पड़ा.इस अवैध और सामाजिक रूप से निंदनीय काम से घर चलाने के लिए थोड़ी-बहुत आमदनी तो हो जाती थी, लेकिन इसके बदले गीता को समाज में भारी बदनामी और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता था. शराब की बिक्री के कारण उनके घर के आसपास हमेशा अशांत और असुरक्षित माहौल बना रहता था, जिससे उनके मासूम बच्चों के भविष्य और शिक्षा पर भी बेहद बुरा असर पड़ रहा था. इस दलदल से बाहर निकलने की तड़प ने आखिरकार गीता के जीवन को एक नया मोड़ दिया.

वर्ष 2025 रहा गीता का जिंदगी का टर्निंग पॉइंट

गीता इस अपमानजनक जिंदगी से बाहर निकलना चाहती थीं और उनकी यह तलाश अगस्त 2025 में पूरी हुई. वे झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ''फूलो झानो आशीर्वाद अभियान'' से जुड़ीं. इस कल्याणकारी पहल का उद्देश्य हड़िया-शराब के निर्माण और बिक्री से जुड़ी महिलाओं को चिन्हित कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है. योजना के तहत गीता को न केवल आर्थिक मदद का भरोसा मिला, बल्कि एक नई शुरुआत के लिए काउंसलिंग भी दी गई.

ये भी पढ़ें: लोहरदगा में 20, 24 और 27 अगस्त को ड्राइविंग लाइसेंस शिविर, किन इलाकों में लगेगा जानिए...

ये भी पढ़ें: विश्व आदिवासी महोत्सव के रंग में रंगी राजधानी रांची, कलाकारों का उत्साह चरम पर

सफलता और आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

अभियान के माध्यम से नवंबर 2025 में गीता को समय पर वित्तीय सहायता प्राप्त हुई. आर्थिक मदद मिलते ही उन्होंने पहला कदम उठाते हुए शराब बेचने का धंधा हमेशा के लिए बंद कर दिया. इस राशि का सही उपयोग करते हुए गीता ने स्थानीय बाजार के मुख्य चौक पर फास्ट-फूड का अपना एक स्टाल शुरू किया. प्रशासन और अभियान की टीम से मिले निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने उनका हौसला बढ़ाया. आज गीता आत्मनिर्भर होकर पूरी कुशलता से अपना व्यवसाय संभाल रही हैं. उनके इस प्रयास से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उन्हें समाज में खोया हुआ सम्मान भी वापस मिल गया है. गीता की यह कहानी साबित करती है कि अगर सही समय पर सही दिशा और सरकारी योजनाओं का साथ मिले तो विपरीत परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है.