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जिम बेल्ट में ट्विशा की स्किन के टिश्यू मिले:तो क्या बच जाएंगे गिरिबाला और समर्थ; ट्विशा ने आत्महत्या की या गला घोंटा गया
ट्विशा शर्मा की मौत मामले में 12 जुलाई को एक नया अपडेट आया। दिल्ली AIIMS ने 11 पन्नों की फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, जांच में जिस जिम्नास्टिक बेल्ट को फंदा बताया जा रहा था, उस पर ट्विशा के स्किन टिश्यू मिले हैं। तो क्या इस रिपोर्ट का फायदा उठाकर गिरिबाला और समर्थ बच जाएंगे; समझेंगे एमपी एक्सप्लेनर में… सवाल-1: जिम बेल्ट में ट्विशा की स्किन के टिश्यू मिलने के मायने क्या हैं? जवाब: दिल्ली AIIMS ने CBI को अपनी हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच रिपोर्ट सौंपी है। इसमें दावा किया गया है कि ट्विशा की मौत में इस्तेमाल हुए जिम बेल्ट पर उसके अपने स्किन टिश्यू मिले हैं, और DNA प्रोफाइलिंग से यह कंफर्म हो गया है कि ये टिश्यू ट्विशा के ही हैं। फोरेंसिक साइंस का एक बुनियादी नियम है, जिसे लोकार्ड्स एक्सचेंज प्रिंसिपल कहा जाता है। यानी जब भी दो चीजें एक-दूसरे के सीधे संपर्क में आती हैं, तो उनके बीच मटेरियल का आदान-प्रदान होता है। फोरेंसिक एक्सपर्ट कहते हैं, 'ट्विशा का स्किन टिश्यू उस बेल्ट पर मिला है, इसका मतलब है कि उसी बेल्ट से उसका गला कंप्रेस हुआ है।' यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी हथियार पर खून का सैंपल मैच हो जाए। इससे सिर्फ इतना तय होता है कि चोट उसी चीज से आई। यह नहीं बताता कि वह चोट किसने पहुंचाई, और किस नीयत से। क्रिमिनल वकील शुभांक दीक्षित का कहना है कि, ‘टिश्यू मिलना यह तय नहीं करता कि यह हत्या थी या आत्महत्या। यह दोनों केसेस में मिल सकता है- हैंगिंग में भी, स्ट्रैंगुलेशन में भी। इससे सिर्फ इतना साबित होता है कि उसी बेल्ट से कंप्रेशन हुआ। गला घोंटा गया या फांसी लगाई गई, यह तय नहीं होता।' सवाल-2: इस रिपोर्ट से समर्थ और गिरिबाला की मुश्किलें बढ़ेंगी या राहत मिलेगी? जवाब: सिर्फ इस रिपोर्ट से मुश्किलें बढ़ने या राहत मिलने जैसा कुछ नहीं है। भारतीय कानून में हत्या का आरोप साबित करने के लिए दो तरीके हैं- पहला- हत्या का कोई पुख्ता सबूत हो (हथियार, चश्मदीद गवाह, CCTV फुटेज), या फिर परिस्थितिजन्य सबूतों (सरकमस्टेंशियल एविडेंस) की एक ऐसी कड़ी बनाई जाए, जिससे आरोपी के निर्दोष होने की कोई गुंजाइश न बचे। ट्विशा के केस में अभी तक न तो कोई चश्मदीद गवाह है, न ही ऐसा कोई सीधा सबूत, जिससे साबित हो कि गिरिबाला या समर्थ ने बेल्ट से गला घोंटा। अगर मेडिकल एविडेंस और गवाहों के बयानों में विरोधाभास पैदा होता है, तो कानूनन इसका फायदा सीधे आरोपी को मिल जाता है- क्योंकि जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की है कि वो अपना केस 'बियॉन्ड रीजनेबल डाउट' यानी संदेह से परे साबित करे, आरोपी की नहीं कि वो खुद को निर्दोष साबित करे। फॉरेंसिक रिपोर्ट को कोर्ट में सिर्फ एक 'एक्सपर्ट ओपिनियन' जितनी अहमियत मिलती है। यह किसी निष्कर्ष के लिए बाध्यकारी नहीं होती। जब तक सारे सवालों के जवाब सामने नहीं आते और CBI की पूरी चार्जशीट अदालत में पेश नहीं होती, गिरिबाला और समर्थ के बचने या न बचने पर पक्के तौर पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। सवाल-3: हत्या के आरोप से बच गए, फिर भी सजा मिलना तय क्यों है? जवाब: अगर कोर्ट में यह साबित हो भी जाता है कि ट्विशा ने खुद फांसी लगाई थी और गिरिबाला या समर्थ हत्या के आरोपों से बच निकलते हैं, तब भी सजा हो सकती है। इसके दो बड़े कारण हैं… 1. आत्महत्या के लिए उकसाना: वकील शुभांक का मानना है कि, ट्विशा के वकील और जांच एजेंसी के पास ट्विशा की कुछ पुरानी चैट्स और गवाहों के बयान हैं। अगर यह साबित हो गया कि ट्विशा को इस कदर मानसिक प्रताड़ना दी गई थी कि उसे मरने पर मजबूर होना पड़ा, तो आरोपियों पर धारा 108 के तहत सजा पक्की है। इसमें 10 साल तक की जेल हो सकती है। 2. सबूतों से छेड़छाड़: ट्विशा केस सबसे बड़ी चूक यह हुई कि लिगेचर (जिम बेल्ट) जिसमें स्किन टिश्यू मिले हैं उसे घटनास्थल से तुरंत जब्त नहीं किया गया। वह तीन दिनों तक एक पुलिसकर्मी की गाड़ी में पड़ा रहा। अगर आरोपियों ने लोकल स्तर पर प्रभाव डालकर सबूतों को छिपाने, नष्ट करने या जांच भटकाने की कोशिश की है, तो उन पर धारा 238 (सबूत मिटाना) के तहत भी केस चलेगा। इसके अलावा, सुसाइड की थ्योरी में भी झोल है। एक्सपर्ट बताते हैं, जो सुसाइड करता है, वो आखिरी वक्त में फंदा छुड़ाने की कोशिश में गले पर स्ट्रगल के निशान छोड़ता है। लेकिन ट्विशा के केस में ऐसा कोई मार्क नहीं मिला। यानी, भले ही किसने गला घोंटा यह सीधे साबित न हो पाए, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्य (सरकमस्टेंशियल एविडेंस) और पुलिस की लापरवाही की थ्योरी से सजा हो सकती है। सवाल 4: दिल्ली AIIMS की सीलबंद रिपोर्ट में और क्या-क्या हो सकता है? जवाब: रिपोर्ट कोर्ट के निर्देश पर सीलबंद है, इसलिए अंदर क्या है यह अभी जांच एजेंसी ही जानती है। लेकिन क्रिमिनल लॉयर्स और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसे मामलों में एम्स का मेडिकल बोर्ड मुख्य रूप से 4 प्वाइंट्स पर अपनी फाइंडिंग्स दी होगी। 1. लिगेचर मार्क (गले के निशान) का एंगल: फॉरेंसिक साइंस का नियम है कि हैंगिंग में गले पर 'V' शेप का निशान बनता है, जबकि स्ट्रैंगुलेशन (गला घोंटने) में निशान 'O' शेप (Horizontal) होता है। रिपोर्ट में इस बात की सबसे ज्यादा संभावना होगी कि ट्विशा के गले का निशान जिम बेल्ट की चौड़ाई और पैटर्न से कितना मैच कर रहा है। 2. हायोइड बोन का टूटना: गले की यह V-आकार की हड्डी आमतौर पर गला घोंटने पर टूटती है, जबकि फांसी लगाने पर अक्सर सुरक्षित रहती है। रिपोर्ट में गले की इंटरनल इंजरी की बारीकी से जानकारी हो सकती है, जो मर्डर या सुसाइड का सबसे बड़ा निर्णायक सबूत होती है। 3. टाइम ऑफ डेथ का मिसमैच: क्या मौत के समय और आरोपियों द्वारा बताए गए घटना के समय में कोई अंतर है? हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच (ऊतकों का अध्ययन) यह बता सकती है कि शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई किस वक्त रुकी थी। अगर आरोपियों की कहानी और मेडिकल टाइमलाइन में अंतर हुआ, तो यह एक बड़ा सुबूत होगा। 4. एंटीमॉर्टम इंजरी: रिपोर्ट में यह साफ किए जाने की संभावना है कि शरीर या बेल्ट पर मिले टिश्यू 'मौत से पहले' (संघर्ष के दौरान) के हैं या 'मौत के बाद' (शव को फंदे पर लटकाने के दौरान) के। सवाल 5: जांच एजेंसी को अभी किन सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं? जवाब: ट्विशा केस में अब भी कई ऐसी मिसिंग लिंक्स हैं, जिनके जवाब CBI की फाइनल चार्जशीट ही तय करेगी… 1. टाइम ऑफ डेथ और डेटा डिलीशन: केस का सबसे बड़ा सस्पेंस डिजिटल टाइमलाइन है। अगर AIIMS की रिपोर्ट से मौत का एक सटीक समय मान लीजिए रात 9 बजे तय होता है, लेकिन CBI की डिजिटल जांच में पता चलता है कि ट्विशा के फोन से चैट्स मौत के बाद जैसे रात 10 बजे डिलीट की गई हैं, तो यह केस पूरी तरह पलट जाएगा। सवाल आएगा कि मौत के बाद वह डिवाइस कौन चला रहा था? 2. इतने महीनों बाद स्किन टिश्यू का बचना: फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और बचाव पक्ष के वकील इस पर सबसे बड़ा सवाल उठा सकते हैं। अगर बेल्ट को शुरुआत में ही पुलिसकर्मी की गाड़ी में 2 दिन तक छोड़ दिया गया था, तो उस पर मौजूद टिश्यू की सैंपल क्वालिटी इतने महीनों तक कैसे सुरक्षित रही? जांच एजेंसी को कोर्ट में बेल्ट की चेन ऑफ कस्टडी साबित करनी होगी कि सबूत के साथ बीच में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई। 3. क्या बेल्ट पर तीसरे शख्स का भी DNA है: अभी तक सिर्फ ट्विशा के टिश्यू मिलने की बात सामने आई है। लेकिन अगर बेल्ट से गला घोंटा गया था, तो क्या बेल्ट पर किसी और का पसीना या स्किन के अंश मिले हैं? यह एंगल अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है कि AIIMS ने आरोपियों के सैंपल इस दिशा में जांचे हैं या नहीं। 4. समर्थ का शरण देने वाला कौन था: घटना के बाद जब लुकआउट नोटिस जारी हुआ, तब भी समर्थ कुछ दिनों तक फरार रहा। इस दौरान वह कहां छिपा रहा और किसने उसे पुलिस से बचाया? कानून के मुताबिक अपराधियों को पनाह देना भी अपराध है, इसलिए चार्जशीट में कुछ नए नाम भी जुड़ सकते हैं। 5. पुलिस की लापरवाही थी या साजिश: शुरुआती जांच में इतनी बड़ी चूक कि जिस जिम बेल्ट में स्किन टिश्यू मिले हैं उसे पोस्टमार्टम में पेश नहीं किया गया। पीड़ित परिवार का सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या यह एक साजिश के तहत किया गया। केस से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ट्विशा शर्मा के स्किन टिश्यू जिम बेल्ट पर मिले:दिल्ली AIIMS ने 11 पेज की फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंपी ट्विशा केस- CBI ने 80kg की डमी फंदे पर लटकाई:सास-पति के सामने सीन रीक्रिएट, अबॉर्शन की सलाह देने वाली डॉक्टर से पूछताछ होगी ट्विशा केस-CBI के सवालों से घबराईं पूर्व जज गिरिबाला सिंह:एंग्जाइटी-घबराहट की शिकायत की; सीसीटीवी, बॉडी पर चोटों के निशान को लेकर जवाब तलब