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दिल्ली मेट्रो का सफर अपने रिस्क पर, CCTV भी जरूरी नहीं; उपभोक्ता आयोग ने ऐसा क्यों कहा

दिल्ली मेट्रो में सामान के साथ सफर कर रहे हैं तो अपने रिस्क पर करें। सामान चोरी होता है तो मेट्रो प्रबंधन जिम्मेदार नहीं होगा। सीसीटीवी भी अनिवार्य नहीं है...। उत्तराखंड उपभोक्ता आयोग ने एक मामले में फैसला सुनाया। मामला मेट्रो में आई फोन चोरी से जुड़ा है।दरअसल, उत्तराखंड के रुद्रपुर ऊधमसिंहनगर निवासी अनिरुद्ध सुंदरियाल ने 17 सितंबर 2024 को तीस हजारी से कश्मीरी गेट के लिए मेट्रो पकड़ी। इस दौरान उनका आईफोन-15 चोरी हो गया। अनिरुद्ध ने मेट्रो प्रबंधन की सेवाओं में कमी ठहराते हुए हर्जाने की मांग को लेकर आयोग में अपील की थी।उत्तराखंड आयोग पहुंचा मामलाउन्होंने आयोग को बताया कि चोरी के बाद कश्मीरी गेट थाने में केस दर्ज कराया। जांच के लिए पुलिस के साथ मेट्रो भवन पहुंचे तो प्रबंधन ने सहयोग नहीं किया। मेट्रो में लगे सीसीटीवी की फुटेज देने में टालमटोल की गई। आरटीआई से पता चला कि रेड लाइन की 39 में से सिर्फ नौ मेट्रो में सीसीटीवी लगे थे। वह जिस ट्रेन से सफर कर रहे थे, उसमें सीसीटीवी थे ही नहीं।आयोग ने कहा- मेट्रो प्रबंधन का दोष नहींआयोग अध्यक्ष कुमकुम रानी और सदस्य बीएस मनराल ने अनिरुद्ध की इन तमाम दलीलों को सुनने के बाद साफ किया कि मेट्रो में यात्री के सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी खुद की है। इसके लिए मेट्रो प्रबंधन को सेवा में कमी का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।सीसीटीवी अनिवार्य नहींआयोग ने सुरेंद्र सिंह भोला केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर कहा कि अपने सामान की निगरानी यात्री का काम है। ट्रेनों में सीसीटीवी लगाना प्रबंधन का नीतिगत विशेषाधिकार है। यह सेवा अनिवार्य नहीं है।