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बटाला गैंगरेप- केस रद्द करने पर हाईकोर्ट पहुंची पीडि़ता:बोली- पुलिस आरोपियों के दबाव में काम किया, दे रहे धमकियां, निष्पक्ष जांच व सुरक्षा की मांग
बटाला के चर्चित सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। पीड़िता, उसके परिजनों और अधिवक्ता ने एक प्रेसवार्ता का आयोजन कर पंजाब पुलिस की भूमिका और मामले की कैंसिलेशन रिपोर्ट (रद्द करने की रिपोर्ट) पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका सीधा आरोप है कि प्रभावशाली आरोपियों को बचाने की नीयत से पुलिस ने एकतरफा जांच करते हुए मामला अदालत से रद्द करवाने की अर्जी लगा दी है, जबकि यह विषय अभी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है।इस दौरान मांग की गई कि मामले की निष्पक्ष जांच किसी अन्य जिले की वरिष्ठ पुलिस एजेंसी या सीबीआई (CBI) को सौंपी जाए। पीड़िता और उसके पूरे परिवार को तत्काल प्रभाव से सरकारी सुरक्षा मुहैया कराई जाए। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस ने दाखिल की कैंसिलेशन रिपोर्ट पीड़िता के अधिवक्ता परुण भागोवालिया ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए पूरे घटना क्रम और पुलिस की जांच पर सवाल उठाया। पीड़िता की आपबीती: "7 दिनों तक बंधक बनाकर किया गया अत्याचार" प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़िता ने रोते हुए अपनी आपबीती साझा की। उसने बताया कि उसे एक सोची-समझी साजिश के तहत बहाने से एक घर में बुलाया गया था, जहाँ उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद उसे लगातार सात दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और कई लोगों ने उसके साथ दरिंदगी (गैंगरेप) की। पीड़िता ने कहा कि उसका सरकारी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण भी करवाया गया था जिसके साक्ष्य मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद पुलिस पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाकर आरोपियों को क्लीन चिट देने पर तुली है। पीड़ित परिवार को मिल रही धमकियाँ, CBI जांच और सुरक्षा की गुहार पीड़िता के पिता ने बदहवासी में बताया कि आरोपी और उनके समर्थक बेहद प्रभावशाली हैं। पूरा परिवार खौफ के साए में जीने को मजबूर है और उन्हें केस वापस लेने के लिए लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। डर का माहौल इतना गहरा है कि परिवार बटाला जाने से भी कतरा रहा है।