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Analysis: नीरज कुमार vs अनंत सिंह की सियासी जंग से किसका बढ़ेगा दबदबा?

INT News24 October 2026 at 04:54 pm

Bihar MLC Election 2026 बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर शुक्रवार को मतदान संपन्न हो गया. इन सीटों के नतीजे 27 अक्टूबर को आएंगे. हालांकि, पूरे चुनाव के दौरान सबसे अधिक चर्चा पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की रही. इस सीट पर जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार चुनाव मैदान में हैं. वहीं, उनकी ही पार्टी के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन कर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मनाही के बावजूद अनंत सिंह ने डॉ. अनुज के पक्ष में चुनाव प्रचार भी किया.

यही वजह है कि पटना स्नातक सीट के परिणाम पर सबकी निगाहें टिकी हैं. इस चुनाव में जीत-हार का असर न केवल जदयू के दो प्रमुख नेताओं के बीच सियासी समीकरण पर पड़ सकता है, बल्कि अनंत सिंह के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं. इसके अलावा, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बाद इस चुनाव के नतीजों से भाजपा के पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक के रुझान को लेकर भी संकेत की संभवाना है.

चुनाव को लेकर जदयू में दो गुटों की चर्चा

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम चाहे जो हो, अनंत सिंह पर पार्टी की कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज हैं. अनंत सिंह भी कार्रवाई की आशंका के बीच कह चुके हैं, “न मरने का गम, न जीने की खुशी।” उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग नजरिये से देख रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चुनाव परिणाम के बाद जदयू के सामने अनुशासन और राजनीतिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी. यदि नीरज कुमार चुनाव हारते हैं और डॉ. अनुज सिंह की जीत में अनंत सिंह की भूमिका अहम मानी जाती है, तो पार्टी के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है. वहीं, नीरज कुमार की जीत की स्थिति में भी अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बना रह सकता है, क्योंकि उन्होंने खुले तौर पर पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया है.

गौरतलब है कि इस मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने भी दो बार हस्तक्षेप किया था. इसके बावजूद अनंत सिंह अपने रुख पर कायम रहे और डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार किया. अब चुनाव परिणाम के बाद पार्टी इस पूरे घटनाक्रम से कैसे निपटती है, इस पर सबकी नजर रहेगी.

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जदयू के नए पावर सेंटर को चुनौती?

अनंत सिंह के रुख को जदयू के भीतर उभरते नए शक्ति केंद्रों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. उन्होंने इस चुनाव में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और निशांत कुमार की बात नहीं मानी. हालांकि, अनंत सिंह ने दोनों नेताओं का नाम लेकर सीधे तौर पर कोई हमला नहीं किया. एक सवाल के जवाब में उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि वे लोग पार्टी के मालिक हैं और कहीं भी जा सकते हैं. उनके इस बयान को पार्टी के भीतर जारी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है. ऐसे में पटना स्नातक सीट का चुनाव अब केवल नीरज कुमार और डॉ. अनुज सिंह के बीच मुकाबले तक सीमित नहीं रह गया है. इसके नतीजे जदयू के आंतरिक समीकरणों, पार्टी अनुशासन और अनंत सिंह के साथ नेतृत्व के रिश्तों को लेकर भी अहम माने जा रहे हैं. हालांकि, पार्टी की ओर से किसी कार्रवाई पर अंतिम फैसला चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा.

सवर्ण वोटर किसके साथ?

बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए भी अहम माना जा रहा है. बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में सवर्ण मतदाताओं के रुख को लेकर उठे सवालों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि भाजपा अपने पारंपरिक वोट बैंक माने जाने वाले इस वर्ग का भरोसा कायम रख पायी है या नाराजगी अब भी बरकरार है. इस चुनाव में जन सुराज ने सभी आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं. ऐसे में उसके प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी. जन सुराज को मिलने वाला समर्थन भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक को कितना प्रभावित करता है, यह चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. खासकर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम इस लिहाज से महत्वपूर्ण होगा. यदि जन सुराज अपने प्रदर्शन से बीजेपी, कांग्रेस और आरजेडी के वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल रहता है, तो इसका असर केवल भाजपा तक सीमित नहीं रहेगा. राजद और कांग्रेस समेत अन्य दलों के लिए भी यह अपने सामाजिक समीकरणों और मतदाता आधार की समीक्षा करने का संकेत हो सकता है.

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