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दोनों किडनियों में कैंसर की गठानें:फिर भी नहीं निकाली एक भी किडनी; इंदौर में डॉक्टरों ने लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से दोनों बचाई
इंदौरमें डॉक्टरों ने 45 वर्षीय मरीज की दोनों किडनियों में मौजूद कैंसर की गांठों को निकालकर दोनों किडनियों को बचाने में सफलता हासिल की है। दरअसल दोनों किडनियों में एक साथ कैंसर होना बेहद दुर्लभ स्थिति है। ऐसे मामलों में कैंसर को निकालने के साथ दोनों किडनियों को बचाए रखना डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती होती है। गुना निवासी बैंककर्मी संतोष वर्मा को जनवरी 2026 में यूरिन में खून आने की शिकायत हुई थी। इसके बाद दायी तरफ कमर में दर्द होने पर जांच कराई गई। जांच में दोनों किडनियों में गांठें दिखाई दीं। इनमें दायी किडनी की गांठ अपेक्षाकृत बड़ी थी। पूरी किडनी निकालने के बजाय सिर्फ कैंसर की गांठ हटाई ज मरीज का इलाज केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स दो चरणों में किया गया। पहली सर्जरी 13 जुलाई 2026 को हुई। इसमें लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से दायी किडनी में मौजूद केवल कैंसर की गांठ को निकाला गया और किडनी के स्वस्थ हिस्से को सुरक्षित रखा गया। इसके बाद दूसरी किडनी की जांच में भी कैंसर की गांठ की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने 11 अगस्त 2026 को दूसरी सर्जरी की और बाईं किडनी की भी सिर्फ कैंसर वाली गांठ निकाल दी। इस तरह दोनों ऑपरेशन में पूरी किडनी निकालने के बजाय कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाकर स्वस्थ टिश्यू को बचाया गया। इससे मरीज की दोनों किडनियां सुरक्षित रखने में सफलता मिली। दोनों किडनियों में कैंसर, सिर्फ 1-2% मामलों में डॉक्टरों के बताया कि दोनों किडनियों में एक साथ कैंसर होना बहुत दुर्लभ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक ऐसे मामले करीब 1 से 2 प्रतिशत मरीजों में ही देखने को मिलते हैं। ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती कैंसर की गांठ निकालने के साथ किडनी की कार्यक्षमता को बनाए रखना होती है। किडनी में रक्त का प्रवाह अधिक होने के कारण गांठ निकालने के दौरान ब्लीडिंग को नियंत्रित करना और ऑपरेशन के बाद स्वस्थ हिस्से की मरम्मत करना भी जटिल होता है। अब किडनी की कार्यक्षमता सामान्य दोनों सर्जरी के बाद मरीज की किडनी की कार्यक्षमता संतोषजनक रही। ऑपरेशन के करीब तीन दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 15 अगस्त की जांच में मरीज का क्रिएटिनिन स्तर 1.29 mg/dl दर्ज किया गया। फिलहाल मरीज स्वस्थ है और अपनी सामान्य दिनचर्या शुरू कर चुका है। डॉक्टर बोले- समय पर जांच से बच सकती है किडनी यूरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ जुल्का ने बताया कि एक ही मरीज की दोनों किडनियों में कैंसर होना बेहद दुर्लभ स्थिति है। ऐसे मामलों में कैंसर के इलाज के साथ किडनी को बचाना भी महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि मरीज की दोनों किडनियों की सर्जरी अलग-अलग चरणों में की गई। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से सिर्फ कैंसर की गांठें निकाली गईं और स्वस्थ हिस्से को सुरक्षित रखा गया। डॉ. जुल्का के अनुसार, करीब 15 हजार सर्जरी के अनुभव में जटिल मामलों के सफल इलाज के लिए सटीक प्लानिंग और सर्जिकल तकनीक महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि यूरिन में खून आना या लंबे समय तक कमर में दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच होने से किडनी कैंसर की पहचान शुरुआती दौर में हो सकती है और इलाज के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। एक्सपर्ट्स की टीम के समन्वय से संभव हुआ इलाज हॉस्पिटल्स के एचसीओओ तारिक ताजदार ने कहा कि ऐसे जटिल मामलों में एक्सपर्ट्स बीच बेहतर समन्वय और उपचार के प्रत्येक चरण में सावधानी जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में दोनों किडनियों को सुरक्षित रखते हुए कैंसर की गांठों को निकालना मरीज के लिए महत्वपूर्ण परिणाम रहा। अस्पताल का प्रयास रहता है कि जटिल मामलों में भी मरीज की जरूरत के अनुसार उपचार की पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संचालित किया जाए।