Thursday, 27 August 2026
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बिलासपुर में बिजली संकट पर हाईकोर्ट सख्त:CSPDCL के एमडी से मांगी टाइम-बाउंड रिपोर्ट, जलभराव की समस्या पर निगम कमिश्नर से भी मांगा जवाब

INT News27 August 2026 at 09:24 pm

बिलासपुर में मानसून के दौरान खराब बिजली व्यवस्था और जलभराव को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने बिजली कंपनी CSPDCL के एमडी और नगर निगम कमिश्नर से व्यक्तिगत शपथ-पत्र मांगा है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से पूछा है कि पिछले आदेशों के बाद अब तक क्या काम हुआ है और बाकी काम कब तक पूरा होगा। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। अधिकारियों को पेंडिंग कामों की स्पष्ट समय-सीमा और उनकी निगरानी करने वाले अधिकारियों के नाम भी बताने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। कंपनी ने कोर्ट को बताया- पुराने पोल बदल रहे जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान बिजली कंपनी ने कोर्ट को बताया कि शहर में पुराने और खराब सीमेंट के पोल हटाकर उनकी जगह लोहे के पोल लगाए जा रहे हैं। आंधी-तूफान के दौरान खतरा पैदा करने वाले विज्ञापन और होर्डिंग्स की पहचान कर उनकी सूची नगर निगम को भेजी गई है। कंपनी ने बताया कि लोखंडी में एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सब-स्टेशन बनाने के लिए ग्राम पंचायत से जमीन का प्रस्ताव मिल गया है। वहीं, सलवाली नाला और मंगला रिवर व्यू में 33/11 केवी सब-स्टेशन बनाने के लिए कलेक्टर को आवेदन भेजा गया है। इसके अलावा मंगला और कोनी में दो नए बिजली जोन बनाने की प्रक्रिया भी चल रही है। पूछा- कब तक बदले जाएंगे खंभे हाईकोर्ट ने बिजली कंपनी से पूछा कि बचे हुए बिजली के खंभे कब तक बदले जाएंगे और नए सब-स्टेशन कब शुरू होंगे। कोर्ट ने सरकार से मिले फंड के इस्तेमाल का पूरा हिसाब भी मांगा है। वहीं, नगर निगम कमिश्नर ने शपथ-पत्र में बताया कि नेहरू चौक स्थित विकास भवन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे काम कर रहा है। 17 जुलाई को एक दिन में करीब 400 मिमी बारिश हुई थी। इसके बाद बिलासपुर को केंद्र सरकार के राष्ट्रीय शहरी बाढ़ जोखिम प्रबंधन कार्यक्रम में शामिल कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। हाईकोर्ट ने नगर निगम से बाढ़ नियंत्रण कक्ष में दर्ज शिकायतों, उनके समाधान और एनडीएमए को भेजे गए प्रस्ताव की मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी देने को कहा है। शहर के रिहायशी इलाकों में भरा पानी, जलजमाव की समस्या दरअसल, बारिश के दौरान शहर की निचली बस्तियों और कई रिहायशी इलाकों में महज एक घंटे में पानी भर जाता है। कई जगह नालियों का गंदा पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। इससे हर साल लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। नगर निगम हर साल नाले-नालियों की सफाई और नए नालों के निर्माण का दावा करता है, लेकिन बारिश होते ही जलभराव की समस्या फिर सामने आ जाती है। वहीं, बारिश के दौरान बिजली व्यवस्था भी बिगड़ जाती है और कई इलाकों में रातभर बिजली गुल रहती है। इन समस्याओं को देखते हुए हाईकोर्ट ने मामले को जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है।