समाचार · मध्य प्रदेश
विजयवर्गीय बोले-खूब महंगी हो जाए शक्कर, मैं मीठा नहीं खाता:मंत्री के बयान पर लोगों ने कहा- हर किसी को मधुमेह नहीं; समाधान चाहिए
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शक्कर की बढ़ती कीमतों पर कहा कि “90 फीसदी लोग मीठा खाना पसंद नहीं करते हैं। मैं भी नहीं खाता हूं। अच्छा है, मैं तो कहता हूं शक्कर खूब महंगी हो जाए। इस बयान पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। लोगों का कहना है कि त्योहार के समय शक्कर के बढ़ते दाम से जुड़े सवाल पर समाधान बताने के बजाय मिठाई कम खाने की सलाह देना समस्या से बचने जैसा है। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधि से अपेक्षा होती है कि वह जनता की परेशानी के साथ खड़ा हो, न कि उसे टालने का रास्ता बताए। युवाओं ने उठाया जिम्मेदारी का सवाल युवाओं का कहना है कि जनता ने नेताओं को वोट देकर जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि वे ऐसी नीतियां और व्यवस्थाएं बनाएं, जिनसे आम लोगों को राहत मिले। उनके मुताबिक, अगर जनता की रोजमर्रा की परेशानियों का समाधान नहीं हो रहा है तो यह सरकार और जनप्रतिनिधियों की विफलता को दर्शाता है। लोगों बोले- हर किसी को मधुमेह नहीं लोगों का कहना है कि शक्कर से परहेज करने की सलाह हर व्यक्ति पर लागू नहीं की जा सकती। उनका तर्क है कि यदि स्वास्थ्य विशेषज्ञ ऐसी सलाह दें तो उसका संदर्भ अलग है, लेकिन मंत्री के तौर पर जनता की खाद्य जरूरतों और महंगाई से जुड़े सवाल का जवाब सिर्फ कम मीठा खाने की सलाह नहीं हो सकता। मीठे से ही हर खुशी की शुरुआत
लोगों के मुताबिक, रक्षाबंधन पर मिठाई सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते में मिठास का प्रतीक है। सुबह की मीठी चाय से लेकर त्योहारों की मिठाई तक, भारतीय परिवारों में मिठास रोजमर्रा और परंपराओं का हिस्सा है। ऐसे में त्योहार के ठीक पहले ‘40 के बाद मिठाई मत खाइए’ कहना लोगों को भावनात्मक रूप से भी खटक रहा है। पार्टी के पहले के बयानों पर भी सवाल जनता का कहना है कि पार्टी के बयानों को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। लोगों ने पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि कभी सोना न पहनने, पेट्रोल महंगा होने पर अनावश्यक बाहर न निकलने और रुपए की कीमत गिरने पर विदेश यात्रा से बचने की सलाह दी गई, अब शक्कर महंगी होने पर मिठाई कम खाने की बात कही जा रही है। लोगों का सवाल है कि अगर इसी तरह हर महंगाई का समाधान चीजें कम इस्तेमाल करना है, तो आम आदमी की परेशानियों का समाधान आखिर कैसे होगा?