Thursday, 27 August 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

समाचार · पंजाब

पंजाब में कर्मचारी सड़कों पर उतरे:डीए-पुरानी पेंशन बहाली को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, पब्लिक डीलिंग वाले दफ्तर पूरी तरह बंद

INT News27 August 2026 at 02:52 pm

पंजाब सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों, डीए की किस्तें रोकने और पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल न करने के विरोध में आज पूरे राज्य के सरकारी कर्मचारियों ने पूर्ण हड़ताल कर राज्यव्यापी प्रदर्शन किया। इस राष्ट्रव्यापी/राज्यव्यापी आह्वान के तहत मानसा समेत पंजाब के सभी जिलों में सरकारी दफ्तरी कामकाज पूरी तरह ठप रहा। कर्मचारियों ने जिला कचहरी में एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और बाद में पूरे मानसा शहर में रोष मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। हड़ताल के कारण मानसा में जनता से सीधे जुड़े सभी प्रमुख सरकारी कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। जिला कॉम्प्लेक्स और तहसील कॉम्प्लेक्स, सिविल अस्पताल और जच्चा-बच्चा अस्पताल (ओपीडी सेवाएं प्रभावित), जिला फूड सप्लाई कार्यालय, जमीन की फर्द निकालने वाला फर्द केंद्र कार्यालयों के बंद होने से दूर-दराज के गांवों से आए आम लोगों को बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए अस्पतालों में आपातकालीन (Emergency) सेवाएं सामान्य दिनों की तरह जारी रखी गईं। साढ़े चार साल की बैठकें बेनतीजा, लाठीचार्ज से भड़के कर्मचारी प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे कर्मचारी नेताओं हरप्रीत सिंह प्रधान, प्रताप सिंह, गुरप्रीत कौर, डॉक्टर गुरमेल सिंह और डॉक्टर गुरजीवन सिंह ने पंजाब सरकार पर वादाखिलाफी और तानाशाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी पिछले लंबे समय से अपने हक जैसे महंगाई भत्ते (DA) की किस्तें जारी करने और पुरानी पेंशन को पूरी तरह बहाल करने की मांग कर रहे हैं। पिछले साढ़े चार साल में सरकार और प्रशासन के साथ हमारी कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन सरकार ने हर बार केवल आश्वासन दिया और ये बैठकें पूरी तरह बेनतीजा रहीं।" कर्मचारी नेताओं ने हाल ही में प्रदर्शनकारी कर्मचारियों पर हुए पुलिसिया एक्शन की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जायज मांगें मानने के बजाय कर्मचारियों पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया और पानी की बौछारें (वाटर कैनन) छोड़कर उन्हें लहूलुहान किया। इसी दमनकारी नीति के विरोध में आज पूरे पंजाब का कर्मचारी सड़कों पर उतरने को मजबूर हुआ है। 2027 के विधानसभा चुनाव में सबक सिखाने की चेतावनी यूनियन नेताओं ने पंजाब सरकार को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि वे कर्मचारियों के सब्र का इम्तिहान न लें। यदि रोकी गई डीए की किस्तें, ओपीएस बहाली और अन्य जायज मांगें जल्द से जल्द लागू नहीं की गईं, तो वर्तमान सरकार को आगामी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों में कर्मचारियों और उनके परिवारों के कड़े विरोध और बड़े राजनीतिक नुकसान का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।