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राम रहीम पर मेहरबानी, बंदी सिंहों से ‘डबल स्टैंडर्ड': जत्थेदार गड़गज्ज
| अमृतसर एसजीपीसी ने 1947 के बंटवारे में जान गंवाने वाले 10 लाख पंजाबियों की याद में श्री अकाल तख्त साहिब पर विशेष अरदास करवाई। संगत को संबोधित करते हुए जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने इसे पंजाब की भयानक तबाही बताया। जत्थेदार ने कहा कि सिख भावनाओं का सम्मान करते हुए भारत-पाक सरकार को तुरंत बातचीत कर पिछले डेढ़ साल से बंद पड़े श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर को खोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बार गुरुपर्व पर श्री ननकाना साहिब जाने के लिए एसजीपीसी के पास रिकॉर्ड पासपोर्ट पहुंचे हैं। ऐसे में दोनों देशों की सरकारों को चाहिए कि वे तीर्थयात्रियों का कोटा बढ़ाएं। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने सरकारों पर बंदी सिखों के साथ 'डबल स्टैंडर्ड' अपनाने का कड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल मिल जाती है, वहीं सजा पूरी कर चुके बंदी सिखों से सरकार भेदभाव कर रही है। उन्होंने राजोआणा की फांसी उम्रकैद में बदलने और हवारा की उनकी बीमार मां से मुलाकात करवाने की मांग उठाई। जत्थेदार ने सिखों में मतभेद की बातों को महज गलत प्रचार बताया। गुरुद्वारों पर हो रहे हमलों को पंथ के खिलाफ बताते हुए उन्होंने संगत से अपील की। उन्होंने कहा कि आंतरिक गृहयुद्ध से बचकर पूरी कौम को आपसी गिले-शिकवे भुलाने चाहिए और श्री अकाल तख्त साहिब की छत्रछाया में एकजुट होना चाहिए।