Monday, 17 August 2026
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जालंधर में हवाई जहाज वाला गुरुद्वारा:विदेश जाने की मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाते हैं जहाज, यहां खिलौना जहाज की सैकड़ों दुकानें

INT News17 August 2026 at 07:55 am

जालंधर शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूरी पर स्थित गुरुद्वारा श्री तलहन साहिब जी जिसे (शहीद बाबा निहाल सिंह जी) गुरुद्वारा साहिब के नाम से भी जाना जाता है।

इस गुरुद्वारा साहिब से लोगों ओर श्रद्धालुओं की आस्था श्रद्धा काफी हद तक जुड़ी हुई है।यह गुरुद्वारा साहिब अपनी अनूठी परंपरा के लिए पंजाब ओर विदेश में बहुत प्रसिद्ध भी है।

गुरुद्वारा साहिब आने वाले लोग विदेश जाने की मन्नत मांगते है और मन्नत पूरी हो जाने पर खिलौने वाला हवाई जहाज चढ़ाते हैं, जिस कारण इसे लोकप्रिय रूप से "हवाई जहाज वाला गुरुद्वारा" भी कहा जाता है। यह प्रथा कई सालों से चली आ रही है और लोगों का अटूट विश्वास भी गुरुद्वारा साहिब से जुड़ा हुआ है।

जालंधर के गांव तलहन में स्थित (शहीद बाबा निहाल सिंह जी गुरुद्वारा साहिब) को लेकर मान्यता है कि यहां जो लोग विदेश जाने की मनोकामना लेकर आते हैं उनकी मन्नत अवश्य पूरी होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार माना जाता है यदि किसी व्यक्ति का पासपोर्ट या वीजा बनने में कोई रुकावट आ रही है तो यहां खिलौने वाला हवाई जहाज चढ़ाकर अरदास करने से विदेश जाने में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

जब लोगों की मनोकामना पूरी हो जाती है तब वह यहां खिलौने वाला हवाई जहाज चढ़ाने आते हैं और साथ में गुरुद्वारा साहिब की सेवा करते हैं।लोगों द्वारा यहां चढ़ने वाले खिलौने के हवाई जहाजों को आसपास के बच्चों में बांट दिया जाता है। हर महीने हजारों लोग यहां अपना वीजा या पासपोर्ट पूरे होने की मनोकामना लेकर आते हैं। खासतौर पर रविवार के दिन यहां भक्तों की काफी भीड़ रहती है। लोगों ने कहा-उनकी मन्नत पूरी हुई है

धार्मिक स्थल पर पहुंच कर श्री गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने आये लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि उनकी मन्नत पूरी हुई है इसलिए आज गुरुद्वारा साहिब नतमस्तक होने आए हैं और खिलौने वाला हवाई जहाज चढ़ाने आए।गुरुद्वारा साहिब आए प्रदीप ने कहा कि उनके भाई के विदेश जाने की मन्नत मांगी गई थी और इसलिए वह गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक होने आए हैं।

प्रदीप ने कहा साल दो साल पहले उनके पारिवारिक सदस्यों ने मन्नत मांगी थी कि उनका भाई विदेश चला जाए और पिछले महीने ही उनका भाई विदेश किया है और मन्नत पूरी होने पर वह खिलौने वाला हवाई जहाज चढ़ाने गुरुद्वारा साहिब आए है। प्रदीप ने कहा कि वह 6 साल से इस गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने आ रहे हैं और यहां लोगों की मन्नतें पूरी होती है।

अमृतसर से जहाज चढ़ाने के लिए पहुंचे सतिंदर सिंह

अमृतसर से आए सतिंदर सिंह ने कहा कि वह विदेश जाने के इच्छुक हैं और अब उनकी मन्नत पूरी हो गई है इसलिए वह भी गुरुद्वारा साहब में माथा टेकने आए हैं और खिलौने वाला जहाज चढ़ाने आए हैं। सतिंदर सिंह ने कहा कि वह पंजाब पुलिस विभाग में कार्यकर्त है लेकिन विदेश जाने का उनका सपना अब पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने विदेश जाने के लिए मन्नत मांगी थी और अगले साल में न्यूजीलैंड जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा साहिब की जानकारी काफी लोगों से और सोशल मीडिया से ली है कि इस गुरुद्वारा साहिब में मनोकामना पूरी होती है तो उनकी भी मनोकामना पूरी हो गई है इसलिए वह भी खिलौने वाला हवाई जहाज चढ़ाने आए है।सतिंदर ने कहा कि लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है इसलिए लोग यहां पर आते हैं। आस्ट्रेलिया जाने की मनोकामना लेकर पहुंचा दंपति

अमृतसर के परमजोत सिंह ने कहा कि 4 साल पहले भी वे इस गुरुद्वारा साहिब में आए थे तब वह अपनी पत्नी के साथ थे और अब 4 साल बाद फिर से अपनी पत्नी ओर बेटे के साथ आए है। परमजोत सिंह ने कहा कि विदेश जाने के लिए गुरुद्वारा साहिब अपनी मनोकामना लेकर आए है। परमजोत सिंह ने कहा कि विदेश जाने के लिए गुरुद्वारा साहिब में खिलौने वाले हवाई जहाज चढ़ाने आते है और लोगों के वीजा लगते है। उन्होंने कहा कि पहली बार वह अपनी मां के साथ आए थे अब उनकी मां ऑस्ट्रेलिया में है और अब वह भी अपनी मनोकामना लेकर आए हैं कि उनका भी ऑस्ट्रेलिया जाने का वीजा लग जाए और वह अपने परिवार के साथ विदेश चले जाएं। मेयर सिंह बोले-वह 32 सालों से यहां माथा टेकने आ रहे

फगवाड़ा के रहने वाले मेयर सिंह ने कहा कि हम गुरुद्वारा साहिब 32 सालों से आ रहे हैं और इस गुरुद्वारा साहब में लोगों की मनोकामना पूरी होती है। मेहर सिंह ने कहा कि उनके बुजुर्ग यहां आते थे और वह भी यहां आ रहे है और यह प्रथा चली आ रही है।मेयर सिंह ने कहा कि हर रविवार को गुरुद्वारा साहिब आते है। मेयर सिंह ने कहा जिन लोगों का वीजा नहीं आता या विदेश जाने में अड़चन या परेशानी आती है तो लोग अपनी मन्नत यहां मांगते हैं और मनोकामना पूरी होने पर लोग यहां खिलौने वाला जहाज चढ़ाने आते हैं।