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पावर हाउस जमीन से 65 लोगों को कब्जा छोड़ना होगा:याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- बालाघाट तहसीलदार के सामने रखे पक्ष
जबलपुर उच्च न्यायालय ने बालाघाट शहर के पावर हाउस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के मामले में प्रभावितों की याचिका खारिज कर दी है। शुक्रवार को आए इस फैसले से अतिक्रमणकारियों को बड़ा झटका लगा है। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को 13 जुलाई को बालाघाट तहसीलदार के सामने हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह याचिका उन लोगों ने दायर की थी जिन्होंने पावर हाउस क्षेत्र की सरकारी जमीन पर अस्थायी मकान बनाकर कब्जा किया हुआ था। प्रशासन इस जमीन पर तहसील भवन का निर्माण करना चाहता है, जिसके लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि तहसीलदार याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का मौका दें और एक महीने के भीतर उन्हें वैकल्पिक आवास (दूसरे घरों) में शिफ्ट करने पर निर्णय लें। इसी निर्देश के तहत याचिकाकर्ताओं को आने वाली 13 जुलाई को तहसीलदार के सामने अपना पक्ष रखने को कहा गया है। नोटिस और विरोध के बाद कोर्ट पहुंचे थे लोग दरअसल, पावर हाउस क्षेत्र की सरकारी जमीन पर रहने वाले लगभग 60 से 65 लोगों को बेदखली के लिए महीनों पहले नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब प्रशासनिक अमला अतिक्रमण हटाने पहुंचा, तो वहां भारी विरोध हुआ। इस दौरान आम आदमी पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी मनोज पमनानी ने बरसात के मौसम तक अतिक्रमण न हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। इसके बाद अतिक्रमणकारियों ने राहत पाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका को स्वीकार नहीं किया। ठुकराया था पीएम आवास का प्रस्ताव इससे पहले, प्रशासन ने कब्जाधारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों में शिफ्ट होने का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। न्यायालय ने अब साफ कर दिया है कि यदि याचिकाकर्ता तहसीलदार द्वारा तय किए गए वैकल्पिक आवास में जाने से मना करते हैं, तो तहसीलदार आदेश के आधार पर कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे।