समाचार · उत्तराखंड
अब Gen Z डॉक्टरों ने खोला मोर्चा; भाजपा सरकार के खिलाफ X पर मुहिम, हड़ताल की चेतावनी

चांद मोहम्मद, देहरादूनजेन-जी आंदोलन अब उत्तराखंड राज्य में तेजी से बढ़ रहा है। कुछ दिन पहले जेन जी छात्रों ने अपनी मांगों के लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ हल्ला-बोल किया था। अब जेन-जी डॉक्टरों ने मोर्चा खोल दिया है। उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर (पीजी) रेजीडेंट डॉक्टर्स कम स्टाइपेंड को लेकर आक्रोश जता रहे हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर अकाउंट बनाया है। जिससे मुख्यमंत्री, मंत्री, सचिव, निदेशक और विधायकों को लगातार पोस्ट कर रहे हैं।डॉक्टरों का दावा है कि उत्तर भारत के 11 राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में सबसे कम स्टाइपेंड मिल रहा है। मंत्री, सचिव और निदेशक को ज्ञापन भेजने के बाद डॉक्टरों ने अब सोशल मीडिया पर भी विशेष अभियान शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे हड़ताल का रास्ता अपना सकते हैं।तीन मेडिकल कॉलेजों में 600 पीजी डॉक्टरप्रदेश के तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इस समय 600 से अधिक पीजी डॉक्टर अध्ययनरत या कार्यरत हैं। हल्द्वानी में 250, देहरादून में 210 और श्रीनगर में 150 पीजी डॉक्टर हैं। उन्होंने यूपी के समान स्टाइपेंड की पुरजोर मांग उठाई। इधर, अगर पीजी डॉक्टर हड़ताल पर चले गए तो स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी के बीच पीजी डॉक्टर कई जगह ड्यूटी संभालते हैं।कठिन ड्यूटी के बावजूद स्टाइपेंड कम क्यों?दून मेडिकल कॉलेज आरडीए के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत राठी, महासचिव डॉ. हिमांशु कुमार, उपाध्यक्ष डॉ. राहुल कुमार और डॉ. प्रतिमा अरोड़ा समेत हल्द्वानी एवं श्रीनगर के पीजी डॉक्टरों ने बताया कि 24 से 36 घंटे की कठिन ड्यूटी के बावजूद महज 69 से 73 हजार रुपये का ग्रॉस स्टाइपेंड मिलता है। कटौती के बाद खाते में करीब 62 से 68 हजार रुपये ही पहुंचते हैं।सोशल मीडिया पर मुखरसरकार तक आवाज पहुंचाने के लिए पीजी डॉक्टरों ने ‘उत्तराखंड रेजीडेंट डॉक्टर्स यूनाइटेड’ नाम से ‘एक्स’ पर अकाउंट बनाया है। वे मुख्यमंत्री, मंत्री, सचिव, निदेशक और विधायकों को पोस्ट कर रहे हैं। व्हाट्सऐप ग्रुपों में डॉक्टरों को भी जोड़ा जा रहा।क्या कह रहे अधिकारीस्वास्थ्य निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना का कहना है कि पीजी डॉक्टरों का ज्ञापन मिला है। इस पर निदेशालय स्तर पर दूसरे राज्यों में दिए जा रहे स्टाइपेंड को लेकर अध्ययन किया जा रहा है। जल्द ही बढ़ोतरी का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। हड़ताल समस्या का समाधान नहीं है।