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ग्वालियर में फ्री फायर गेम का जाल:15 साल का 'एक्सपर्ट' 7 दिन से लापता, कोलकाता में मिली संदिग्धों की लोकेशन
ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र स्थित मेहरा कॉलोनी निवासी 15 वर्षीय छात्र पिछले 7 दिनों से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता है। परिजनों ने दोस्तों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तलाश शुरू की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ऑनलाइन गेम 'फ्री फायर' का शौक किस तरह मासूम बच्चों को अंतरराष्ट्रीय अपराधियों और साइबर ठगों के चंगुल में धकेल रहा है, इसका यह एक बेहद डरावना मामला है। परिजनों के मुताबिक, प्रिंस ऑनलाइन गेमिंग सिंडिकेट के ऐसे जाल में फंस चुका था, जिसके तार बिहार, झारखंड और कोलकाता से जुड़े हैं। नाबालिग स्टेशन पर केरल से दिल्ली जाने वाली ट्रेन में चढ़ता दिखाई दिया है। पुलिस ने संदिग्धों की लोकेशन कोलकाता में ट्रेस की है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि मामले की संवेदनशीलता के बावजूद थाटीपुर पुलिस गंभीरता से कार्रवाई नहीं कर रही, जिससे बच्चे की जान को खतरा बना हुआ है। 30 जून की सुबह लापता हुआ प्रिंस
पीड़ित जनवेद सिंह दोहरे और उनकी पत्नी सीमा देवी दोहरे, निवासी बालाजी वाटिका के पास, मेहरा कॉलोनी (थाटीपुर) ने बताया कि उनका 15 वर्षीय बेटा प्रिंस दोहरे 30 जून 2026 की सुबह करीब 8 बजे बिना बताए घर से निकल गया। उसका रंग सांवला, कद करीब 5 फीट है। घर से निकलते समय उसने हरे रंग की शर्ट और काले रंग की पैंट पहन रखी थी। काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं मिला तो थाटीपुर थाने में अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने का मामला दर्ज कराया गया। आखिरी बार वह अपने एक ऐसे दोस्त के साथ देखा गया था, जिसे परिजन नहीं जानते। हालांकि, उन्हें इतना पता था कि दोनों की दोस्ती 'फ्री फायर' गेम के जरिए हुई थी। 8 साल से खेल रहा था गेम, महंगी आईडी बेचने का था झांसा
प्रिंस के लापता होने के बाद परिवार ने उसके दोस्तों और छोटे भाई अनुज से पूछताछ की। इसके बाद पूरे ऑनलाइन गेमिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ। प्रिंस पिछले 8 साल से 'फ्री फायर' खेल रहा था। वह गेम का प्रो-प्लेयर था और उसकी गेमिंग आईडी की अच्छी कीमत लगती थी। दोस्तों ने बताया कि आईडी खरीदने-बेचने के बहाने बाहरी राज्यों के कुछ संदिग्ध लोग लगातार प्रिंस और उसके दोस्तों के संपर्क में थे। वे वॉट्सऐप मैसेज, कॉल और ग्रुप कॉल के जरिए उनसे जुड़े रहते थे। प्रिंस के मोबाइल से कई फर्जी नामों वाली आईडी, वॉट्सऐप ग्रुप, कॉल रिकॉर्डिंग और संदिग्ध ट्रांजैक्शन आईडी (रुपए के लेनदेन से जुड़े साक्ष्य) मिले हैं। परिजनों ने यह सभी जानकारी पुलिस को सौंप दी है। बिहार, झारखंड और कोलकाता से ऑपरेट हो रहा नेटवर्क
प्रिंस के दोस्तों के अनुसार, बच्चों का भरोसा जीतकर उन्हें अपने जाल में फंसाने वाले लोग मध्य प्रदेश से बाहर के हैं। उनका नेटवर्क बिहार, झारखंड और कोलकाता से संचालित होता है। परिजनों की शिकायत के बाद साइबर सेल ने शुरुआती जांच में संदिग्धों की मौजूदा मोबाइल लोकेशन कोलकाता में ट्रेस की है। परिजनों को मानव तस्करी और अंग तस्करी की आशंका
प्रिंस की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि 'फ्री फायर' से जुड़े कई गंभीर मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें गेमिंग के बहाने बच्चों को फंसाया गया। टीआई बोले- बच्चे की ढूंढ निकालना हमारी प्राथमिकता
नाबालिग की गुमशुदगी का मामला दर्ज है। परिजनों ने ऑनलाइन गेमिंग और बाहरी लोगों के संपर्क से जुड़े जो नंबर और अन्य जानकारी दी है, उन्हें साइबर सेल को भेज दिया गया है। तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन के आधार पर संदिग्धों की तलाश की जा रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में जल्द ही एक विशेष टीम बाहरी राज्य रवाना की जाएगी। बच्चे को सकुशल दस्तयाब करना हमारी प्राथमिकता है।