Wednesday, 15 July 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

समाचार · झारखंड

देश की ऊर्जा राजधानी बना रहेगा धनबाद, कोयला कम होने पर क्रिटिकल मिनरल्स संभालेंगे कमान

INT News15 July 2026 at 01:55 pm

Dhanbad News: दुनिया तेजी से ऊर्जा परिवर्तन के दौर से गुजर रही है. सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ विकल्पों का विस्तार हो रहा है, लेकिन भारत जैसे विकासशील देश में आने वाले वर्षों तक कोयले की भूमिका कम होने वाली नहीं है. बढ़ती बिजली मांग, औद्योगिकीकरण और आधारभूत संरचना के विस्तार के कारण कोयला अभी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी बना रहेगा. ऐसे समय में धनबाद एक नये दौर की दहलीज पर खड़ा है. एक ओर झरिया कोलफील्ड सहित इसके विशाल कोयला भंडार वर्ष 2038 तक देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में इसकी भूमिका को मजबूत बनाए रखेंगे, वहीं दूसरी और कोयला खनन से निकले ओवरबर्डन (ओबी), फ्लाई ऐश और अन्य खनन अपशिष्टों में छिपे क्रिटिकल मिनरल्स इसे भारत की नयी खनिज अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाने की क्षमता रखते हैं. यानी भविष्य का धनबाद केवल कोयले की राजधानी नहीं, बल्कि ऊर्जा और भविष्य के खनिजों की संयुक्त राजधानी बन सकता है.

खनन की पर्याप्त संभावनाएं

धनबाद के अधिकांश कोयला क्षेत्रों में अभी भी खनन की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं. वर्तमान में संचालित ओपनकास्ट परियोजनाओं में भी काफी कोयला भंडार शेष है, जबकि भविष्य में भूमिगत खनन का दायरा भी बढ़ेगा. झरिया और आसपास के क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल का विशाल भंडार आज भी उपलब्ध है. आधुनिक खनन तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों के उपयोग से इन संसाधनों का अधिक सुरक्षित और अधिकतम दोहन संभव होगा. यही कारण है कि आने वाले वर्षों में भी धनबाद देश के सबसे महत्वपूर्ण कोयला उत्पादक क्षेत्रों में अपनी अग्रणी भूमिका बनाये रखेगा. धनबाद की अर्थव्यवस्था आज भी बड़े पैमाने पर कोयला उद्योग पर आधारित है. बीसीसीएल और अन्य खनन कंपनियों के माध्यम से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जबकि परिवहन, मशीनरी, ठेका कार्य, कोयला लोडिंग, होटल, व्यापार, सुरक्षा, मरम्मत, छोटे उद्योग और सेवा क्षेत्र से जुड़े लाखों लोग अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर हैं. अगले एक दशक से अधिक समय तक इस व्यवस्था में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है.

ऊर्जा व्यवस्था आज भी मुख्य रूप से कोयले पर आधारित

कोयला उद्योग का प्रत्येक विस्तार स्थानीय बाजार, परिवहन, व्यापार और सेवा क्षेत्र को नई गति देता रहेगा. देश की ऊर्जा व्यवस्था आज भी मुख्य रूप से कोयले पर आधारित है. लगभग 74 प्रतिशत बिजली का उत्पादन ताप विद्युत संयंत्रों से होता है. सौर और पवन ऊर्जा का विस्तार अवश्य हो रहा है, लेकिन उनका उत्पादन मौसम पर निर्भर है. इसके विपरीत कोयला आधारित बिजली संयंत्र चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराते हैं. अस्पताल, रेलवे, मेट्रो, डेटा सेंटर, इस्पात संयंत्र और बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की निर्बाध बिजली जरूरत फिलहाल सबसे विश्वसनीय रूप से कोयले से ही पूरी हो रही है. वर्तमान में देश हर वर्ष लगभग एक बिलियन टन (100 करोड़ टन) कोयले का उत्पादन कर रहा है और सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है. विभिन्न सरकारी आकलनों के अनुसार वर्ष 2035 तक कोयला उद्योग की विकास गति बनी रहने तथा वर्ष 2038 के बाद ही इसके सामने बड़े स्तर की चुनौतियां उभरने की संभावना है. हालांकि, धनबाद का भविष्य केवल पारंपरिक कोयला खनन तक सीमित नहीं रहेगा. कोलबेड मीथेन (सीबीएम), कोल माइन मीथेन (सीएमएम), कोयला गैसीफिकेशन, क्लीन कोल टेक्नोलॉजी, सुपरक्रिटिकल और अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र तथा कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (सीसीएस) जैसी तकनीकें इस क्षेत्र को नई पहचान देंगी. भविष्य में कोयले के साथ प्राकृतिक गैस उत्पादन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

यदि रेलवे ढुलाई क्षमता बढ़ती है, आधुनिक खदानों का विकास होता है और नई तकनीकों को तेजी से अपनाया जाता है, तो धनबाद ऊर्जा उत्पादन के साथ ऊर्जा प्रौद्योगिकी और अनुसंधान का भी प्रमुख केंद्र बनेगा. धनबाद की सबसे बड़ी नयी संभावना कोयले से निकलने वाले अपशिष्टों में छिपी है. जिस ओवरबर्डन, फ्लाई ऐश और माइन टेलिंग्स को अब तक पर्यावरणीय समस्या माना जाता था, वही भविष्य में देश की सबसे मूल्यवान खनिज संपदा बन सकते हैं. यही वह परिवर्तन है, जो धनबाद को केवल कोयला राजधानी से आगे बढ़ाकर भारत का क्रिटिकल मिनरल हब बनाने की क्षमता रखता है.

2024 में 30 क्रिटिकल मिनरल्स की सूची जारी

भारत सरकार ने वर्ष 2024 में 30 क्रिटिकल मिनरल्स की सूची जारी की है. इनमें से 24 खनिजों की नीलामी शुरू हो चुकी है और वर्ष 2031 तक 100 से अधिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी का लक्ष्य रखा गया है. अनुमान है कि वर्ष 2030 तक केवल लिथियम का वैश्विक बाजार 500 करोड़ तक पहुंच सकता है. तांबा का बाजार 500 अरब डॉलर और रेयर अर्थ एलिमेंट्स का बाजार 60 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. इस क्षेत्र में चीन का दबदबा बना हुआ है, इसलिए भारत सहित कई देश वैकल्पिक स्रोत विकसित करने में जुटे हैं. इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने वर्ष 2025 से 2031 तक राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के लिए 16,300 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है. इसके अतिरिक्त सार्वजनिक उपक्रमों तथा निजी निवेश के माध्यम से लगभग 18,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की संभावना है. मिशन के तहत प्रतिवर्ष लगभग 40 हजार टन क्रिटिकल मिनरल उत्पादन, 2.70 लाख टन पुनर्चक्रण क्षमता विकसित करने, लगभग 8,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने तथा करीब 70 हजार रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है. भारत केवल खनिज निकालने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि पूरी मूल्य श्रृंखला में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

क्या कहता है आइआइटी (आइएसएम) का शोध

आइआइटी (आइएसएम) के शोध ने यह साबित किया है कि धनबाद के ओबी डंप, फ्लाई ऐश और अन्य खनन अपशिष्टों में पोटाश, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, वैनेडियम, गैलियम, नियोबियम, टेल्यूरियम, टिन, जिरकोनियम, स्कैंडियम, यिट्रियम, लैंथेनम और यिटरबियम जैसे महत्वपूर्ण तत्व मौजूद हैं. यदि इनका व्यावसायिक स्तर पर निष्कर्षण संभव होता है, तो वर्षों से बेकार समझे जाने वाले खनन अपशिष्ट हजारों करोड़ रुपये की राष्ट्रीय संपदा में बदल सकते हैं. भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की कई खदानों से लिए गए नमूनों पर आइआइटी (आइएसएम) उन्नत हाइड्रोमेटलजीं और सतत फिल्म सांद्रण जैसी तकनीकों के माध्यम से रेयर अर्थ एलिमेंट्स निकालने पर काम कर रहा है. इसके अलावा कोयले की फ्लाई ऐश, अम्लीय खदान जल तथा अन्य खनन अपशिष्टों से भी क्रिटिकल मिनरल्स की पुनर्प्राप्ति पर शोध जारी है. यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो धनबाद केवल कोयला उत्पादन का नहीं, बल्कि उच्च मूल्य वाले खनिजों का भी प्रमुख केंद्र बन जायेगा. आइआइटी (आइएसएम) की भूमिका अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है. संस्थान भारत-ब्रिटेन क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी परियोजना का प्रमुख भागीदार है. इसके अलावा भारत-ब्रिटेन की स्ट्राटा पहल तथा राजस्थान के 39 जिलों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मिनरल टार्गेटिंग प्रणाली विकसित करने के कार्य में भी टेक्समिन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. इससे स्पष्ट है कि धनबाद अब वैश्विक खनिज अनुसंधान के मानचित्र पर भी अपनी पहचान बना रहा है.

दुनिया अब सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा की ओर बढ़ रही है, जिसमें अपशिष्ट को भी संसाधन के रूप में उपयोग किया जाता है. धनबाद इस दिशा में देश का सबसे बड़ा उदाहरण बन सकता है. यदि आधुनिक कोयला खनन, क्लीन कोल टेक्नोलॉजी, कोयला गैसीफिकेशन, सीबीएम, सीएमएम, क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग, ग्रीन मेटलर्जी, पुनर्चक्रण इकाइयों और मूल्य संवर्धन उद्योगों का समानांतर विकास होता है, तो वर्ष 2038 तक धनबाद केवल देश की ऊर्जा राजधानी ही नहीं रहेगा, बल्कि भारत का सबसे महत्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल और ऊर्जा प्रौद्योगिकी हब बनकर उभरेगा. यही धनबाद की नई पहचान होगी-जहां वर्तमान की ताकत कोयला होगा और भविष्य की ताकत क्रिटिकल मिनरल्स.

आइआइटी (आइएसएम) को सौंपी गयी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन में धनबाद की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण बनकर उभर रही है. मिशन के तहत धनबाद स्थित आइआइटी (आइएसएम) और उसके टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन रिसर्च पार्क टेक्समिन को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. यह केवल किसी संस्थान को मिली जिम्मेदारी नहीं, बल्कि झारखंड की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था को नयी दिशा देने वाला कदम है.

बनी रहेगी कोयले की आवश्यकता

21 मई 2026 को देश में पीक आवर के दौरान बिजली की मांग 270 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गयी, जबकि वर्ष 2019 में यह लगभग 180 गीगावाट थी. केवल सात वर्षों में करीब 90 गीगावाट की वृद्धि बताती है कि आने वाले वर्षों में भी कोयले की आवश्यकता बनी रहेगी.

भारत में अभी और बढ़ेगी कोयले की मांग

भारत दुनिया के सबसे बड़े कोयला उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन प्रति व्यक्ति कोयले की खपत अभी भी कई औद्योगिक देशों से काफी कम है. भारत में प्रति व्यक्ति औसत खपत लगभग 700 किलोग्राम प्रतिवर्ष है, जबकि चीन में यह करीब 3,500 किलोग्राम है. यह अंतर बताता है कि औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के साथ देश में कोयले की मांग अभी और बढ़ेगी. बिजली, इस्पात, सीमेंट और अन्य आधारभूत उद्योगों की ऊर्जा जरूरतों के कारण निकट भविष्य में कोयले की भूमिका बनी रहेगी. यही वजह है कि ऊर्जा परिवर्तन के दौर में भी धनबाद जैसे कोयला क्षेत्रों का रणनीतिक महत्व कम होने वाला नहीं है.

विशेषज्ञों की राय

धनबाद का भविष्य केवल कोयले तक सीमित नहीं रहेगा. देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में पहचान रखने वाला यह शहर आने वाले वर्षों में क्रिटिकल मिनरल्स, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और खनिज अनुसंधान का भी राष्ट्रीय केंद्र बन सकता है. के स्थापना दिवस विशेषांक के लिए देश के दो प्रमुख खनन एवं ऊर्जा विशेषज्ञों - केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (सिंफर) के निदेशक प्रो. अरविंद कुमार मिश्र और आइआइटी (आइएसएम) के माइनिंग इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एवं टेक्समिन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर व पूर्व उपनिदेशक प्रो धीरज कुमार ने धनबाद के भविष्य पर अपने शोध व आकलन साझा किये हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि एक ओर झरिया के विशाल कोयला भंडार देश की ऊर्जा सुरक्षा की मजबूत आधारशिला बने रहेंगे, वहीं दूसरी ओर ओबी डंप, फ्लाई ऐश और खनन अपशिष्टों में छिपे क्रिटिकल मिनरल्स धनबाद को भारत की नयी खनिज अर्थव्यवस्था का केंद्र बना सकते हैं. यानी आने वाले समय में धनबाद की पहचान 'कोल कैपिटल' से आगे बढ़कर 'एनर्जी एंड क्रिटिकल मिनरल कैपिटल' के रूप में स्थापित हो सकती है.