Saturday, 24 October 2026
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पानीपत में ऑपरेशन से डरकर निकला, ट्रेन से टकराया, मौत:शेव की बात कह निकला, परिजन सीसीटीवी तलाशते पीछा करते रहे, अस्पताल में मिला शव

INT News23 October 2026 at 02:52 pm

पानीपत रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की चपेट में आने से एक करीब 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की पहचान करनाल के घोघड़ीपुर गांव निवासी अशोक कुमार के तौर पर हुई है। अशोक कैंसर से पीड़ित था और पानीपत के एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। शुक्रवार को उसका ऑपरेशन होना था इसलिए यहां वार्ड 11 चुंगी के पास सैनी कॉलोनी में वह अपनी ससुराल में रुका हुआ था।

इस औपरेशन के डर से अशोक शुक्रवार सुबह शेव करवाने का बहाना बना कर शुक्रवार सुबह ही घर से निकल गया। जब काफी देर तक नहीं लौटा तो परिजनों ने उसे ढूंढा। कॉलोनी से लेकर सनौली रोड तक परिजन सीसीटीवी तलाशते उसकी खोजबीन करते रहे। बाद में रेलवे स्टेशन पर एक व्यक्ति के ट्रेन की चपेट में आने की सूचना मिली। वहां से वे जिला नागरिक अस्पताल के शवगृह पहुंचे। शिनाख्त करने पर पहचान अशोक की हुई। दो दिन से चल रहे थे टेस्ट, शुक्रवार को होना था ऑपरेशन अशोक कुमार करनाल जिले के घोघड़ीपुर गांव का रहने वाला था। उसकी ससुराल पानीपत में वार्ड-11 चुंगी के पास सैनी कॉलोनी में है। वह इन दिनों यहीं रुका हुआ था। साले धर्मबीर के अनुसार, अशोक कई साल से बीमार था। शुरुआत में उसे बवासीर की शिकायत थी और बार-बार शौच के लिए जाना पड़ता था। बाद में जांच में गुदा द्वार पर कैंसर होने का पता चला। इसके बाद से उसका इलाज चल रहा था। बीमारी के कारण वह घर पर ही रहता था। पानीपत के एक निजी अस्पताल में उसका उपचार किया जा रहा था। पिछले दो दिनों से उसके टेस्ट हो रहे थे और शुक्रवार को ऑपरेशन होना था। परिजनों के अनुसार, अशोक ऑपरेशन को लेकर घबराया हुआ था। शुक्रवार सुबह वह शेव करवाने की बात कहकर घर से निकला, लेकिन वापस नहीं लौटा। सीसीटीवी में तलाशते हुए सनौली रोड पहुंचे परिजन अशोक के काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने पहले आसपास उसकी तलाश की। कोई सुराग नहीं मिला तो सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखनी शुरू की। परिवार एक कैमरे से दूसरे कैमरे तक उसकी गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश करता रहा। तलाश करते हुए वे सनौली रोड तक पहुंचे। यहां फुटेज में अशोक एक ऑटो में बैठता दिखाई दिया। इसके बाद परिजनों ने बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक जगहों पर उसकी तलाश की। हर जगह उसके बारे में पूछताछ की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। रेलवे स्टेशन पर पूछताछ के दौरान उन्हें ट्रेन की चपेट में आए एक व्यक्ति की सूचना मिली। इसके बाद वे जिला नागरिक अस्पताल के शवगृह पहुंचे। शवगृह में हुई पहचान, दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया शव देखकर परिजनों ने अशोक की पहचान की। सुबह तक वे उसे ढूंढने के लिए शहर में भटक रहे थे, लेकिन अंत में उसकी तलाश अस्पताल के शवगृह में जाकर खत्म हुई। परिवार के लिए यह बड़ा सदमा था। जिस दिन अशोक के ऑपरेशन की तैयारी थी, उसी दिन उन्हें उसकी मौत की खबर मिली। अशोक अपने पीछे दो बच्चों को छोड़ गया है। परिवार कई साल से उसकी बीमारी से जूझने में उसका साथ दे रहा था। सभी को उम्मीद थी कि इलाज और ऑपरेशन के बाद उसकी हालत में सुधार होगा। लेकिन यह उम्मीद पूरी होने से पहले ही परिवार को उसे खोना पड़ा।