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बेमेतरा के माता सिद्धि मंदिर में 9,740 ज्योतियां प्रज्वलित:111 फीट ऊंचा मंदिर, संतान प्राप्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु
बेमेतरा मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित मंदिर में अष्टमी और नवमी के अवसर पर हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। सुबह 4 बजे से शुरू हुआ भक्तों के पहुंचने का सिलसिला देर रात 12 बजे तक जारी रहता है। श्रद्धालु माता के दरबार में माथा टेककर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं। मंदिर में इस वर्ष कुल 9,740 मनोकामना ज्योतियां प्रज्वलित की गई हैं। इनमें 121 आजीवन ज्योतियां और 95 घी की ज्योतियां शामिल हैं। रंग-बिरंगी रोशनी से सजे मंदिर परिसर में भक्ति गीतों की गूंज है। मंदिर के बाहर सैकड़ों दुकानें लगी हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में मेले जैसा माहौल बना हुआ है। 1965 में किसान को खेत में मिली थी माता की प्रतिमा मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, माता सिद्धि का प्राकट्य वर्ष 1965 में हुआ था। बताया जाता है कि उस समय जीवन साहू नामक किसान अपने खेत में हल चला रहे थे। इसी दौरान हल की नोक जमीन में स्थित माता की प्रतिमा से टकराई। प्रतिमा मिलने के बाद किसान ने खेत में ही माता की पूजा-अर्चना शुरू कर दी। स्थानीय मान्यता है कि माता ने जीवन साहू को स्वप्न में दर्शन दिए थे। किसान ने माता के सामने अपनी पारिवारिक परेशानियां रखीं और सुख-समृद्धि की कामना की। कहा जाता है कि मनोकामनाएं पूरी होने के बाद माता के प्रति उनकी आस्था और मजबूत हो गई। इसके बाद संतान प्राप्ति की मन्नत पूरी होने की मान्यता भी प्रचलित हुई। धीरे-धीरे माता की महिमा आसपास के गांवों में फैलने लगी और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं दंपती माता सिद्धि मंदिर की पहचान संतान प्राप्ति की कामना से भी जुड़ी हुई है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, संतान की इच्छा रखने वाले कई दंपती माता के दरबार में मन्नत मांगने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से माता की आराधना करने पर उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवरात्र के दौरान भी बड़ी संख्या में भक्त संतान प्राप्ति, परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना लेकर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार ज्योति प्रज्वलित करवाते हैं। सात ज्योतियों से शुरुआत, अब संख्या 9,740 पहुंची मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, वर्ष 1998 के आसपास यहां सात ज्योतियों से शुरुआत हुई थी। समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई और मनोकामना ज्योतियों की संख्या में भी इजाफा होता रहा। आज मंदिर में 9,740 ज्योतियां प्रज्वलित की जा रही हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था के साथ मंदिर का भी विस्तार हुआ। यहां करीब 111 फीट ऊंचे भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर की भव्यता और नवरात्र के दौरान प्रज्वलित हजारों ज्योतियां भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। 124 पंडा और 30-40 कार्यकर्ता संभाल रहे व्यवस्था मंदिर समिति के रजीत सिंह राजपूत ने बताया कि इस वर्ष अष्टमी और नवमी तिथि एक साथ पड़ने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ी है। दूर-दराज के क्षेत्रों से भी भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस वर्ष मंदिर में 9,740 मनोकामना ज्योतियां प्रज्वलित की गई हैं, जिनमें 121 आजीवन ज्योतियां और 95 घी की ज्योतियां शामिल हैं। मंदिर में सेवा कार्यों से जुड़े पंडा नारायण साहू ने बताया कि नवरात्र के नौ दिनों तक वे और उनके साथी माता की सेवा में लगे रहते हैं। मंदिर में करीब 124 पंडा और 30 से 40 कार्यकर्ता श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए काम कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि भक्तों को दर्शन और पूजा-अर्चना में किसी तरह की परेशानी न हो। भक्ति गीतों से गूंज रहा मंदिर परिसर नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में लगातार भक्ति गीतों की गूंज सुनाई दे रही है। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से भी व्यवस्था की जा रही है। सुबह से देर रात तक भक्तों के पहुंचने के कारण मंदिर परिसर में चहल-पहल बनी हुई है। 9,740 प्रज्वलित ज्योतियां, 111 फीट ऊंचा मंदिर और संतान प्राप्ति की कामना लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालु माता सिद्धि मंदिर की धार्मिक पहचान को दर्शाते हैं। वर्षों से चली आ रही मान्यताओं के बीच यहां भक्तों की आस्था लगातार बढ़ रही है।