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शिबू सोरेन की याद में सजेगा विश्व आदिवासी दिवस, ट्राइबल फैशन शो से लेकर बिरसा चौक तक निकलेगी भव्य जतरा

रांची : विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राजधानी रांची का ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान एक बार फिर भव्य सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्सव का गवाह बनने जा रहा है. आगामी 9 और 10 अगस्त को आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय राज्य स्तरीय समारोह में आम लोगों और कलाकारों के लिए 100 निःशुल्क स्टॉल लगाए जाएंगे. सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) ने इसके लिए सरकारी विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs), सहकारी समितियों, निजी संस्थानों और कला दलों से आवेदन आमंत्रित किए हैं.
निःशुल्क स्टॉल के लिए 3 अगस्त तक कर सकेंगे आवेदन
विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, स्टॉल आवंटन पूरी तरह निःशुल्क रहेगा. ऐसे सभी संस्थान जो आदिवासी समाज की कला, शिल्प, व्यंजन, साहित्य, कल्याणकारी योजनाओं, निजी उद्यम, पोस्टर और फोटो प्रदर्शनी आदि का प्रदर्शन करना चाहते हैं, वे 3 अगस्त तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं. इसके अलावा राज्य भर के निबंधित कला दलों, सांस्कृतिक संस्थाओं और लोक कलाकारों से भी भागीदारी के लिए आवेदन मांगे गए हैं.
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ट्राइबल फिल्म फेस्टिवल होंगे मुख्य आकर्षण
इस वर्ष विश्व आदिवासी दिवस समारोह में कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इसके तहत आदिवासी संस्कृति, वेशभूषा और सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए विशेष ट्राइबल फिल्म फेस्टिवल और ट्राइबल फैशन शो का आयोजन होगा. इसके अलावा शाम के वक्त पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ मोरहाबादी मैदान में विशेष लाइटिंग और आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स का शानदार प्रदर्शन किया जाएगा. साथ ही रांची के मोरहाबादी मैदान से लेकर बिरसा चौक तक एक विशाल और भव्य आदिवासी शोभायात्रा (जतरा) निकाली जाएगी.
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की स्मृति को समर्पित होगा आयोजन
यह पूरा भव्य आयोजन 'दिशोम गुरु' शिबू सोरेन को समर्पित किया जाएगा. उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष उनके निधन के कारण विश्व आदिवासी दिवस का आधिकारिक कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था. इसलिए इस बार उनकी पावन स्मृति में समारोह को और भी धूमधाम से आयोजित करने की तैयारी है. राज्य सरकार की योजना केवल रांची तक सीमित न रहकर देश की राजधानी दिल्ली में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की है. इसके अलावा झारखंड के सभी जिला मुख्यालयों में भी विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन होगा. इस मौके पर देश भर से 5,000 से अधिक आदिवासी कलाकारों, लोक नर्तकों और सांस्कृतिक दलों के शामिल होने की पूरी उम्मीद है.
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