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बड़वानी में मछुआरों ने मत्स्य विभाग घेरा:बोले- 5 किलो जाल योजना आजीविका पर हमला; ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने की मांग
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिला मुख्यालय पर बुधवार को सैकड़ों मछुआरों ने नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले मत्स्य विभाग के दफ्तर का घेराव किया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं वरिष्ठ नेत्री मेधा पाटकर ने सरकार की "4 परिवार = 1 नाव + 5 किलो जाल" योजना को विस्थापितों की रोजी-रोटी छीनने वाली नीति बताया। मछुआरों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। RTI का हवाला: शासन स्तर पर 5 किलो जाल का कोई नियम नहीं प्रदर्शनकारियों ने आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि भोपाल संचालनालय और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के अनुसार 5 किलो जाल का कोई आधिकारिक नियम नहीं है। आंदोलनकारियों का कहना है कि नर्मदा जैसी विशाल नदी में मछली पकड़ने के लिए कम से कम 25 से 30 किलो जाल की जरूरत होती है। ऐसे में 5 किलो जाल की सीमा तय करना विस्थापित मछुआरों के साथ अन्याय है। न्यायाधिकरण के आदेशों और महाराष्ट्र पैटर्न का दिया हवाला मेधा पाटकर ने नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश को अपने डूब क्षेत्र में मछली पकड़ने और नौका संचालन का पूरा अधिकार है। उन्होंने महाराष्ट्र की तर्ज पर मत्स्य पालन का अधिकार सीधे स्थानीय समितियों और मत्स्य विभाग को देने तथा जलाशयों से ठेकेदारी प्रथा को पूरी तरह खत्म करने की मांग की। सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा, बैन पीरियड में मांगी आर्थिक सहायता आंदोलनकारियों ने मत्स्य विभाग को सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा, जिसमें मुख्य मांगें शामिल हैं।