Tuesday, 4 August 2026
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स्कूटी चोरी के दो आरोपियों को एक-एक साल ट्रिपल सजा:3 महीने के ट्रायल में राजीनामा हो चुका था; हाईकोर्ट से भी खारिज हुई थी जमानत

INT News3 August 2026 at 10:21 pm

खंडवा की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने स्कूटी चोरी और फर्जी नंबर प्लेट लगाकर उसे चलाने के मामले में दो आरोपियों को 3 अलग-अलग धाराओं में एक-एक साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक धारा में 500-500 रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया है। इस तरह दोनों आरोपियों को एक-एक साल की सजा और 3 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। खास बात यह रही कि, मामले के दौरान फरियादी ने आरोपियों से राजीनामा कर लिया था, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध मानते हुए सजा सुनाई। पुलिस के अनुसार अभियोग पत्र पेश होने के बाद महज 3 माह 22 दिन में मामले का फैसला आ गया। अदालत ने जिन आरोपियों को दोषी ठहराया, उनमें युसुफ उर्फ गोलू, पिता फैय्याज खान, निवासी बंगलादेश घासपुरा और छोटू, पिता इकबाल पठान, निवासी पड़ावा शामिल हैं। घर के बाहर से चोरी हुई थी स्कूटी

कोतवाली थाना पुलिस के अनुसार, विठ्ठल मंदिर क्षेत्र निवासी आनंद राधेश्याम सोनी (27) ने 18 फरवरी 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी कि 15-16 फरवरी की रात उसके घर के बाहर खड़ी एक्टिवा स्कूटी चोरी हो गई। इस पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। फर्जी नंबर प्लेट से चला रहे थे चोरी की स्कूटी 21 फरवरी को फरियादी ने रेलवे स्टेशन तिराहे पर अपनी स्कूटी जैसी एक गाड़ी देखी। रंग, डेंट और अन्य निशानों से उसने स्कूटी पहचान ली। हालांकि उस पर MP12MH2611 नंबर की प्लेट लगी हुई थी। शक होने पर उसने स्कूटी चला रहे युवक युसुफ उर्फ गोलू को पकड़कर कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने इंजन और चेसिस नंबर की जांच की तो पुष्टि हुई कि वह स्कूटी आनंद सोनी की ही है। जांच में सामने आया कि चोरी छिपाने के लिए स्कूटी पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई थी। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(3) और 340 (2) भी जोड़ी। साथी आरोपी के घर से मिली असली नंबर प्लेट

पूछताछ में युसुफ ने अपने साथी छोटू का नाम बताया। पुलिस ने छोटू को गिरफ्तार किया और उसके घर से स्कूटी की मूल नंबर प्लेट बरामद की। दोनों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने की धारा 61(2) भी जोड़ी गई। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने 8 अप्रैल 2026 को अदालत में चालान पेश किया। फरियादी ने समझौता किया, साक्ष्यों के आधार पर सजा

मुकदमे की सुनवाई के दौरान फरियादी आनंद सोनी ने आरोपियों से समझौता कर लिया था। इसके बावजूद अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत तकनीकी और मौखिक साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। मामले में अनुसंधान अधिकारी उपनिरीक्षक रामप्रकाश यादव की विवेचना महत्वपूर्ण रही। पुलिस ने जिस वाहन का नंबर फर्जी तरीके से उपयोग किया गया था, उसके वास्तविक वाहन स्वामी के बयान दर्ज कराए। साथ ही जिस दुकान से फर्जी नंबर प्लेट बनवाई गई थी, उसके संचालक के बयान भी अदालत में पेश किए गए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला मजबूत हुआ। हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों की जमानत याचिका भी पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर से खारिज हो चुकी थी। गिरफ्तारी के बाद से ही दोनों न्यायिक हिरासत में थे। खंडवा पुलिस ने बताया कि, मामले में उप निरीक्षक राम प्रकाश यादव ने उत्कृष्ट विवेचना करते हुए पर्याप्त साक्ष्य जुटाए, समय पर गवाहों के बयान कराए और अभियोजन के समन्वय से कम समय में प्रकरण का निराकरण कराया। अदालत का यह फैसला वाहन चोरी और फर्जी नंबर प्लेट के मामलों में सख्त कार्रवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।