Monday, 17 August 2026
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53 साल से सांपों का रेस्क्यू कर रहे कैलाशनाथ:12 फीट के सांप से 30 मिनट तक मुकाबला भी किया; नाग पंचमी पर इंदौर में टीमें तैनात

INT News17 August 2026 at 06:05 am

इंदौर में बारिश शुरू होते ही सांपों के निकलने का सिलसिला बढ़ जाता है। कहीं घर में सांप घुस जाता है तो कहीं गाड़ी, ऑफिस, गार्डन या खाली जगह में दिखाई देता है। फोन आते ही 65 वर्षीय कैलाशनाथ अपना सामान उठाकर निकल पड़ते हैं। समय चाहे दिन का हो या रात के 2-3 बजे का, वे मौके पर पहुंचने की कोशिश करते हैं। पिछले कई दिनों से उन्हें रोजाना 2 से 4 सांप पकड़ने की सूचना मिल रही है। कैलाशनाथ के लिए यह कोई नया काम नहीं है। उन्होंने 12 साल की उम्र में हाथ में छड़ी लेकर सांप पकड़ना शुरू किया था। अब 65 साल के हो चुके हैं, लेकिन सांपों को सुरक्षित पकड़ने का सिलसिला आज भी जारी है। वे बताते हैं कि उन्होंने अपने माता-पिता को यही काम करते देखा और वहीं से सीखा। धीरे-धीरे सांपों की पहचान और उन्हें सुरक्षित पकड़ने का तरीका समझ में आया। उनके मुताबिक, इंदौर में रोजाना करीब 40 सांप निकलने की सूचना मिलती है। इनमें बहुत कम सांप जहरीले होते हैं। वे और उनके समुदाय के अन्य लोग सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ने का काम करते हैं। आज नाग पंचमी पर सांपों के प्रदर्शन और उन्हें लेकर घूमने वालों पर वन विभाग इस बार भी सख्ती करेगा। इसके लिए इंदौर में तीन दल बनाए गए हैं। 12 फीट के सांप से 30 मिनट तक चला मुकाबला कैलाशनाथ को सांप पकड़ने के दौरान कई ऐसे अनुभव हुए हैं, जिन्हें वे आज भी नहीं भूलते। किला मैदान का एक मामला याद करते हुए बताते हैं कि वहां करीब 12 फीट लंबा सांप मिला था। सांप बड़ा था और आसानी से काबू में नहीं आ रहा था। करीब 30 मिनट तक उसे पकड़ने की कोशिश चलती रही। कैलाशनाथ बताते हैं कि उस दौरान उनकी सांस तक फूल गई थी। आखिरकार सांप को काबू में कर सुरक्षित जगह छोड़ दिया गया। रात 2 बजे भी फोन आए तो पहुंच जाते हैं कैलाशनाथ कैलाशनाथ कहते हैं कि सांप देखकर ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं। ऐसे में उन्हें सबसे पहले ऐसे व्यक्ति की तलाश होती है, जो सांप को सुरक्षित पकड़ सके। वे कहते हैं, "लोगों की परेशानी हमारे लिए सबसे पहले है। रात में 2-3 बजे भी फोन आ जाए तो कोशिश रहती है कि मौके पर पहुंचें। समय देखकर काम नहीं करते। सांप एक जगह हो तो छड़ी, भाग रहा हो तो कैचर से पकड़ते हैं कैलाशनाथ के पास सांप पकड़ने के अपने तरीके हैं। वे बताते हैं कि अगर सांप एक जगह बैठा है या धीरे-धीरे चल रहा है तो छड़ी की मदद से उसके शरीर के बीच वाले हिस्से को नियंत्रित किया जाता है। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से पकड़कर थैली में रखा जाता है। अगर सांप तेजी से भाग रहा हो तो कैचर की मदद ली जाती है। वहीं, सांप किसी छेद, बिल या सामान के पीछे छिपा हो तो पहले आसपास का सामान धीरे-धीरे हटाया जाता है। जैसे ही सांप बाहर निकलता है, उसे सुरक्षित तरीके से काबू में किया जाता है। कैलाशनाथ के मुताबिक, सबसे ज्यादा खतरा तब होता है जब लोग खुद सांप को पकड़ने या डंडे से दबाने की कोशिश करते हैं। चोट लगने पर सांप अधिक आक्रामक हो सकता है। सांप दिखे तो रेस्क्यू टीम को बुलाएं कैलाशनाथ कहते हैं कि वर्षों के अनुभव के कारण वे सांपों की कई प्रजातियों को देखकर पहचान लेते हैं। उनके मुताबिक, इंदौर में मिलने वाले ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते। कोबरा और कुछ वाइपर जैसी प्रजातियां जहरीली होती हैं। हालांकि, आम लोगों के लिए सांप को देखकर उसकी पहचान करना सुरक्षित नहीं है। सांप दिखाई देने पर उसे छेड़ने, पकड़ने या मारने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना देना बेहतर है। सांप के काटने पर झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खे न अपनाएं सांप के काटने पर किसी भी घरेलू नुस्खे, जैसे नीम की पत्ती या नमक से जहर की पहचान करने, पर भरोसा नहीं करना चाहिए। काटे गए स्थान पर रस्सी या कपड़ा कसकर बांधना भी नुकसानदायक हो सकता है। पीड़ित को शांत रखें और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल ले जाएं। घाव को काटना, जहर चूसना या घरेलू उपचार करना नहीं चाहिए। नाग पंचमी पर वन विभाग की भी नजर नाग पंचमी पर सांपों के प्रदर्शन और उन्हें लेकर घूमने वालों पर वन विभाग इस बार भी सख्ती करेगा। इसके लिए इंदौर में तीन दल बनाए गए हैं। ये दल शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी निगरानी करेंगे। नवलखा, भंवरकुआं, रिंग रोड और आसपास के क्षेत्र की जिम्मेदारी कोमल पालीवाल को दी गई है। राजबाड़ा, विजय नगर और शहरी क्षेत्र की जिम्मेदारी आशीष यादव संभालेंगे। वहीं, अन्नपूर्णा, लाबरिया भेरू और आसपास के क्षेत्रों की जिम्मेदारी महेश सोनगरा को दी गई है।