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मैं जिंदा हूं...किसान को रिकॉर्ड में बताया मृत:खाद का टोकन बनवाने पहुंचा तो पता चला, सरपंच-सचिव पर राशि निकलवाने का आरोप
बैतूल के खपरिया गांव के 56 वर्षीय मंगलू परते खुद को सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा साबित करने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। मंगलू का आरोप है कि पंचायत स्तर पर हुई गलती के कारण उन्हें रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया गया। इससे उनका आधार डिएक्टिवेट हो गया। अब वे खाद का टोकन भी नहीं बनवा पा रहे हैं। खाद का टोकन बनवाने पहुंचे तो पता चला मंगलू के मुताबिक परेशानी जून 2026 में शुरू हुई। उन्हें खेती के लिए खाद की जरूरत थी। खाद का टोकन बनवाने पहुंचे तो पता चला कि उनका आधार डिएक्टिवेट है। बैंक में जानकारी लेने पर बताया गया कि रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज किया गया है। इसके बाद मंगलू आधार केंद्र और सरकारी कार्यालयों में सुधार के लिए पहुंचे। पंचायत से उन्हें जनपद कार्यालय भेजा गया। वहां से जिला और फिर भोपाल जाने की बात कही गई। मंगलू का कहना है कि भोपाल में भी उन्हें पंचायत स्तर से प्रक्रिया पूरी कराने को कहा गया। सचिव और रोजगार सहायक पर लगाया आरोप मंगलू ने कलेक्टर को दिए आवेदन में ग्राम पंचायत खपरिया के सचिव और रोजगार सहायक को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। मंगलू ने सरकारी सुविधाएं रुकने से हुए नुकसान की भरपाई की मांग भी की है। जनपद सदस्य रामनारायण कलमे के मुताबिक, वर्ष 2025 में मंगलू का मकान आग लगने से जल गया था। इसके बाद उन्होंने प्राकृतिक आपदा के तहत मुआवजे की मांग की थी। मंगलू का आरोप है कि उस समय पंचायत के सचिव और रोजगार सहायक ने दस्तावेज मांगे थे। उन्होंने मुआवजा दिलाने के बदले 5 हजार रुपए की मांग की थी। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मंगलू के मुताबिक उन्होंने कहा था कि मुआवजा मिलने के बाद वे पैसे दे देंगे। इसके बाद 2026 में खाद का टोकन बनवाने के दौरान उन्हें रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने की जानकारी मिली। अधिकारी बोले- मृत्यु रिकॉर्ड होने पर आधार डिएक्टिवेट हो सकता है ई-गवर्नेंस मैनेजर विवेक सूर्यवंशी ने बताया कि किसी व्यक्ति की मृत्यु का रिकॉर्ड दर्ज होने पर आधार डिएक्टिवेट किया जा सकता है। ऐसा गलत इस्तेमाल रोकने के लिए किया जाता है। उनके मुताबिक परिवार की ओर से मृत्यु की जानकारी दर्ज होने या किसी स्तर पर डेथ रिकॉर्ड तैयार होने की भी संभावना है। मामले में संबंधित आधार कार्यालय से प्रक्रिया पूरी करानी होगी। ‘मृत’ दिखाकर राशि निकालने की भी जांच मामला सामने आने के बाद मंगलू और उनका परिवार यह भी पता कर रहा है कि कहीं उन्हें मृत दिखाकर अंत्येष्टि सहायता, मुआवजा या किसी अन्य सरकारी योजना की राशि तो जारी नहीं हुई। पंचायत और संबंधित विभाग के अधिकारी इस पहलू की भी जांच कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक ऐसी किसी राशि के निकाले जाने की पुष्टि नहीं हुई है। मंगलू की जन्मतिथि 1 जनवरी 1971 बताई गई है। उनका कहना है कि वे पूरी तरह जीवित हैं। रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के कारण उन्हें खेती और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सुविधाएं लेने में परेशानी हो रही है।