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बॉलीवुड में बंद हुए रास्ते, तो अनजान देश में जा बसे Chunky Panday... वहां मचाया गदर, फिर 'आखिरी पास्ता' ने पलट दी किस्मत

INT News26 September 2026 at 07:00 am

Chunky Panday Birthday Special: सोचिए, एक्टर की फिल्में हिट हो रही हों, करियर रफ्तार पकड़ रहा हो... और फिर अचानक उसे बॉलीवुड छोड़कर दूसरे देश जाना पड़े, आखिर ऐसी क्या नौबत आ गई थी? चंकी पांडे के साथ यही कहानी हुई. 80 के दशक में हीरो बनकर छाए चंकी का करियर जब ढलान पर आया, तो उन्होंने बांग्लादेश का रुख किया और वहां ऐसा स्टारडम हासिल किया कि लोग उन्हें अपने चहेते सितारों में गिनने लगे. लेकिन असली ट्विस्ट उनकी वापसी के बाद आया. बॉलीवुड में लौटे तो कहानी बिल्कुल बदल चुकी थी,हीरो वाली चमक पीछे छूट गई थी, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ ऐसा बचाकर रखा था, जिसने आने वाले सालों में उनकी पहचान ही बदल दी. 26 सितंबर को जन्मदिन पर खोलते हैं चंकी पांडे की जिंदगी का वो दिलचस्प किस्सा, जहां एक खत्म होती पारी ने अचानक नया रंग पकड़ लिया.

शुरुआत ऐसी हुई कि लगा था लंबी चलेगी पारी

साल 1987. चंकी पांडे ने 'आग ही आग' से बॉलीवुड में कदम रखा और फिल्मी दुनिया को अपना चेहरा दिखाया. इसके बाद 'पाप की दुनिया' और 'तेजाब' जैसी फिल्मों ने उनके नाम को पहचान दिलानी शुरू कर दी. खास बात ये थी कि चंकी सिर्फ फिल्मों में नजर नहीं आ रहे थे, बल्कि उनके करियर में लगातार रफ्तार दिखाई दे रही थी. 80 के दशक के आखिर तक वह उन चेहरों में शामिल हो चुके थे, जिनसे दर्शकों को आगे काफी उम्मीदें थीं.

फिर आई 'तेजाब' और कहानी को एक और मोड़ मिला. फिल्म में अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित जैसे बड़े सितारों के बीच भी चंकी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. ऐसा लग रहा था कि अब चंकी पांडे का नाम बॉलीवुड की अगली बड़ी लिस्ट में शामिल होने वाला है. लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में सबसे बड़ा सवाल यही होता है, आज जो सितारा ऊपर जा रहा है, क्या वह कल भी वहीं रहेगा?

जब चमकने लगा था करियर, तभी बदल गया बॉलीवुड का खेल

90 के दशक में चंकी लगातार फिल्मों का हिस्सा बने. लेकिन धीरे-धीरे इंडस्ट्री का माहौल बदलने लगा. फिल्मों में काम करने का तरीका बदला और चंकी को पहले जैसे मौके मिलना कम होने लगे. यहां से उनके करियर में वो दौर शुरू हुआ, जिसके बारे में शायद उन्होंने खुद भी नहीं सोचा होगा. एक तरफ बॉलीवुड में उनका काम कम हो रहा था और दूसरी तरफ उनके सामने एक ऐसा रास्ता खुला, जो उन्हें भारत से बाहर ले जाने वाला था. चंकी ने वो रास्ता चुना और पहुंच गए बांग्लादेश. अब सवाल था कि क्या एक भारतीय अभिनेता दूसरे देश में जाकर अपनी जगह बना पाएगा? चंकी ने इस सवाल का जवाब अपने काम से दिया.

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बॉलीवुड में काम कम हुआ तो बांग्लादेश में चमक उठा सितारा

बांग्लादेश पहुंचने के बाद चंकी पांडे ने वहां की फिल्मों में काम करना शुरू किया. यहां कहानी ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी शायद किसी ने उम्मीद नहीं की थी. जिस अभिनेता का नाम हिंदी सिनेमा में धीरे-धीरे पीछे छूट रहा था, उसे बांग्लादेशी दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया. उन्होंने वहां कई फिल्मों में काम किया और देखते ही देखते उनकी अपनी पहचान बन गई. यानी भारत में जहां उनके करियर की रफ्तार कम हो रही थी, वहीं दूसरे देश में उनके लिए नए दरवाजे खुल रहे थे. उनका यह दौर इतना अहम रहा कि बांग्लादेश में उन्हें एक लोकप्रिय भारतीय अभिनेता के तौर पर पहचान मिली. लेकिन क्या चंकी हमेशा के लिए वहीं रहने वाले थे? बिल्कुल नहीं. कहानी में अभी एक और वापसी बाकी थी.

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फिर क्यों लौटे बॉलीवुड?

बांग्लादेश में कामयाबी मिलने के बाद भी चंकी का सफर वहीं रुकने वाला नहीं था. सालों बाद उन्होंने फिर बॉलीवुड का रुख किया. लेकिन इस बार तस्वीर पहले जैसी नहीं थी. जब वह इंडस्ट्री में आए थे, तब उनके सामने हीरो बनने के बड़े मौके थे. अब समय बदल चुका था. नई पीढ़ी के सितारे आ चुके थे और चंकी के लिए वही पुरानी जगह दोबारा बनाना आसान नहीं था. यही वह वक्त था जब किसी भी अभिनेता के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है. क्या वह बदलते वक्त के साथ खुद को बदल सकता है? चंकी ने भी यही किया. उन्होंने हीरो की छवि से चिपके रहने के बजाय अलग-अलग तरह के किरदार स्वीकार करने शुरू किए. और यहीं से उनके करियर की दूसरी पारी शुरू हुई.

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हीरो नहीं मिला, लेकिन किस्मत ने कुछ और ही सोच रखा था

बॉलीवुड में वापसी के बाद चंकी ने सहायक भूमिकाओं की तरफ कदम बढ़ाया. उन्होंने यह साबित करना शुरू किया कि किसी अभिनेता की पहचान सिर्फ उसके हीरो बनने से तय नहीं होती. लेकिन अभी उनकी सबसे बड़ी पहचान उनसे दूर थी. साल 2010 में 'हाउसफुल' आई. फिल्म में चंकी पांडे का किरदार बाकी भूमिकाओं से अलग था. शुरुआत में शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह किरदार आगे चलकर चंकी के नाम का पर्याय बन जाएगा. लेकिन पर्दे पर आते ही उनकी कॉमेडी, बोलने का अंदाज और अजीबोगरीब आत्मविश्वास दर्शकों को पसंद आने लगे. धीरे-धीरे एक नाम लोगों की जुबान पर चढ़ गया आखिरी पास्ता. और यहीं चंकी की दूसरी पारी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने उनकी पहली पारी की पहचान तक बदल दी.

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'आखिरी पास्ता' ने बदल दिया चंकी का पूरा खेल

कभी चंकी पांडे का नाम सुनते ही 80-90 के दशक के हीरो की तस्वीर सामने आती थी. लेकिन 'हाउसफुल' के बाद नई पीढ़ी के लिए उनकी पहचान कुछ और हो गई. अब लोग उन्हें उनके पुराने हीरो वाले किरदारों से ज्यादा 'आखिरी पास्ता' के लिए याद करने लगे. यह किरदार उनके लिए सिर्फ एक कॉमेडी रोल नहीं रहा. इसकी लोकप्रियता ने चंकी को उन दर्शकों तक पहुंचाया, जो शायद उनके शुरुआती दौर से परिचित भी नहीं थे. यानी जिस कलाकार को एक समय लगा था कि उसका हीरो वाला दौर पीछे छूट चुका है, उसी ने अपनी कॉमिक टाइमिंग के दम पर नई पीढ़ी में जगह बना ली.

फिर बेटी के साथ बदल गई पहचान

चंकी पांडे की जिंदगी में एक और बड़ा मोड़ तब आया, जब उनकी बेटी अनन्या पांडे ने बॉलीवुड में कदम रखा. अनन्या के फिल्मों में आने के बाद चंकी की पहचान एक नए रिश्ते के साथ भी जुड़ गई- अनन्या पांडे के पिता. दिलचस्प बात यह है कि चंकी ने इस पहचान को कभी बोझ की तरह नहीं देखा. वह अपनी बेटी के करियर को लेकर खुलकर बात करते रहे हैं और कई मौकों पर पिता-बेटी की बॉन्डिंग भी देखने को मिली है. अब एक ही परिवार की दो पीढ़ियां बॉलीवुड का हिस्सा हैं.लेकिन चंकी की कहानी की खूबसूरती यही है कि वह सिर्फ किसी स्टार के पिता बनकर नहीं रुके. उन्होंने अपनी पहचान पहले ही इतने अलग-अलग रंगों में बना ली थी कि आज भी उनका नाम अपने आप में एक पहचान है.

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