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छत्तीसगढ़ की जेलों से 94 उम्रकैदी रिहा:बिलासपुर से सबसे ज्यादा 29 और रायपुर से 23 कैदी आजाद, सात और कैदी छूटेंगे
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ की पांच केंद्रीय जेलों में उम्रकैद की सजा काट रहे 101 बंदियों को समय से पहले रिहाई दे दी गई है। जेल डीजी हिमांशु गुप्ता ने बताया के आंकड़ों के मुताबिक 13 और 14 अगस्त को 94 बंदी जेल से बाहर आएंगे, जबकि बाकी 7 बंदियों की रिहाई 17 और 18 अगस्त को होगी। रिहाई अच्छे आचरण और जेल में व्यवहार के आधार पर तय प्रक्रिया के तहत की जा रही है। जेलवार आंकड़ों में सबसे ज्यादा 29 बंदी केंद्रीय जेल बिलासपुर से हैं। यहां 13 अगस्त को 14 और 14 अगस्त को 15 बंदियों की रिहाई हुई। इसके बाद रायपुर से 23 बंदी रिहा हुए। रायपुर केंद्रीय जेल में 13 अगस्त को 9 और 14 अगस्त को 14 बंदियों को रिहा किया गया। केंद्रीय जेल दुर्ग से कुल 21 बंदियों की रिहाई हुई। इनमें 13 अगस्त को 13 और 14 अगस्त को 8 बंदी शामिल हैं। अंबिकापुर केंद्रीय जेल से 16 बंदी रिहा हुए। यहां दोनों दिन 8-8 बंदियों को जेल से बाहर किया गया। वहीं जगदलपुर केंद्रीय जेल से 13 अगस्त को 5 बंदियों की रिहाई हुई। 14 अगस्त को यहां किसी बंदी की रिहाई नहीं है। 7 बंदियों की रिहाई बाद में 13 और 14 अगस्त के बाद 17 और 18 अगस्त को भी बंदियों की रिहाई होगी। इन दो दिनों में 7 और बंदियों को रिहा किया जाना है। इस तरह पूरी प्रक्रिया में पांचों केंद्रीय जेलों से समय-पूर्व रिहा होने वाले बंदियों की कुल संख्या 101 होगी। देखिए तस्वीरें:
बिलासपुर में सबसे ज्यादा, जगदलपुर में सबसे कम पूरे आंकड़े को देखें तो 101 में से करीब 29% बंदी अकेले बिलासपुर केंद्रीय जेल से हैं। रायपुर से करीब 23%, दुर्ग से 21%, अंबिकापुर से 16% और जगदलपुर से करीब 5% बंदी रिहा किए जा रहे हैं। 13 और 14 अगस्त की रिहाई को देखें तो 94 बंदियों में बिलासपुर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। इन दो दिनों में बिलासपुर से 29, रायपुर से 23, दुर्ग से 21, अंबिकापुर से 16 और जगदलपुर से 5 बंदी रिहा हुए। इनका कुल योग 94 है। अच्छे आचरण के आधार पर मिलती है सजा में छूट रायपुर जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने बताया कि कैदियों को जेल में उनके काम और अच्छे व्यवहार के आधार पर सजा में छूट दी जाती है। यह फैसला किसी एक अधिकारी के स्तर पर नहीं होता, बल्कि पूरी प्रक्रिया के बाद लिया जाता है। सबसे पहले जिस जगह कैदी काम करता है, वहां से उसके व्यवहार और काम की रिपोर्ट ली जाती है। इसके बाद अलग-अलग अधिकारियों से भी उसके आचरण के बारे में जानकारी ली जाती है। सभी रिपोर्ट देखने के बाद जेलाध्यक्ष अंतिम मंजूरी देते हैं। अगर कोई बंदी जेल में दिया गया काम ठीक से करता है, जेल के नियमों का पालन करता है और अनुशासनहीनता नहीं करता है तो उसके आचरण को अच्छा माना जाता है। जेल आने के बाद बनती है पूरी हिस्ट्री टिकट किसी व्यक्ति को सजा होने के बाद उसे कन्विक्ट बंदी के रूप में जेल की दंडित शाखा में दर्ज किया जाता है। उसकी हिस्ट्री टिकट तैयार की जाती है, जिसमें उसकी सजा और केस से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज होती है। उससे अपील के बारे में भी जानकारी ली जाती है। अगर उसने अपील नहीं की है तो जरूरत पड़ने पर विधिक सहायता के जरिए अपील कराई जाती है। इसके बाद उसका स्वास्थ्य परीक्षण होता है और उसकी रुचि के अनुसार उसे जेल में काम दिया जाता है। काम शुरू करने से पहले बंदी को यह भी बताया जाता है कि अच्छा काम और अच्छा आचरण रखने पर उसे हर महीने तय नियमों के अनुसार सजा में माफी मिल सकती है। हर महीने मिलती है तय माफी जेल अधीक्षक के मुताबिक, अच्छे आचरण और काम के आधार पर बंदियों को हर महीने माफी मिलती है। इसमें सामान्य तौर पर 3 दिन और 3 दिन यानी कुल 6 दिन की माफी का प्रावधान बताया गया है। यह माफी धीरे-धीरे उसकी कुल सजा में कमी के रूप में जुड़ती रहती है। इसी प्रक्रिया के तहत पात्र बंदियों की शेष सजा में छूट देकर उन्हें समय से पहले रिहा किया जाता है।