Wednesday, 21 October 2026
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Explainer: सलमान को धमकी, मूसेवाला-बाबा सिद्दीकी की हत्या से टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग तक, पढ़ें लॉरेंस विश्नोई की क्राइम हिस्ट्री

INT News20 October 2026 at 09:50 pm

Explainer: 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू में एक्टर टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई गई. टाइगर सुरक्षित बच गए, जबकि उनके ड्राइवर फिरदौस समेत दो लोग घायल हुए. लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े संदेश में हमले की जिम्मेदारी लेते हुए सलमान खान से नजदीकी को वजह बताया गया.

एक दौर था, जब मुंबई में दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील की डी-कंपनी का बोलबाला हुआ करता था. लेकिन आज जेल की सलाखों के पीछे बैठा 32 साल का गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई भी उसी तरह का खौफ फैला चुका है. साबरमती जेल की हाई-सिक्योरिटी सेल से संचालित होने वाला उसका नेटवर्क अब केवल मुंबई और पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका, कनाडा और यूरोप तक अपने पैर पसार चुका है. आइए, जानते हैं लॉरेंस बिश्नोई के उभार, उसके आपराधिक नेटवर्क और जुर्म की इस खौफनाक दास्तान को.

बॉलीवुड में फिर लौटा 90 के दशक का डर

10 फरवरी 2026 को बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के मैनेजर के फोन पर एक अज्ञात नंबर से वॉयस नोट आया, तो मायानगरी में सन्नाटा पसर गया. अमेरिका के नंबर से आए इस कॉल में 20 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी और न देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई. धमकी देने वाले ने अपना नाम बताया, 'हैरी बॉक्सर, बिश्नोई गैंग'. इससे कुछ ही समय पहले निर्देशक रोहित शेट्टी के घर के बाहर गोलियां चलाई गई थीं. ऐसा लगा मानो 90 के दशक में दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी का वो दौर लौट आया है, जब निर्माता-निर्देशक दुबई से आने वाले एक कॉल पर थर-थर कांपते थे.

गंगनहर का इतिहास और बिश्नोई समाज का आगमन

लॉरेंस बिश्नोई की कहानी बंदूक की गोली से नहीं, बल्कि प्यास और एक महाराजा की दूरदर्शिता से शुरू होती है. साल 1899 के छप्पनिया अकाल ने थार के रेगिस्तान को श्मशान बना दिया था. तब बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने सतलुज नदी का पानी मरुस्थल तक लाने का संकल्प लिया. सन् 1927 में गंगनहर के शुरू होते ही पंजाब और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में नए गांव बसे. इन्हीं में से एक गांव था फाजिल्का जिले का दुतारावाली. इसी उपजाऊ जमीन पर राजस्थान से आकर बसे बिश्नोई समाज के लोग, जो पर्यावरण और वन्यजीवों की रक्षा को अपना धर्म मानते हैं.

जंभाजी के 29 नियम और काले हिरण का संकल्प

साल 1485 में संत जंभेश्वर (जंभाजी) ने बिश्नोई संप्रदाय की स्थापना की और 29 नियम दिए. इनमें हरे पेड़ों को न काटना, जीवों पर दया करना और शराब-मांस से दूर रहना प्रमुख था. बिश्नोई समाज के लिए काला हिरण (ब्लैकबक) प्राणों से भी बढ़कर पवित्र माना जाता है. 16वीं सदी से चली आ रही यह परंपरा 1998 में तब राष्ट्रीय सुर्खियों में आई, जब जोधपुर में फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के दौरान अभिनेता सलमान खान पर काले हिरण के शिकार का आरोप लगा.

‘मिल्की’ से गैंगस्टर बनने का सफर

12 फरवरी 1993 को पुलिस कांस्टेबल लविंदर सिंह के घर जन्मे बालक का नाम उसकी मां ने बलकरण रखा, लेकिन गोरे रंग के कारण उसे प्यार से ‘मिल्की’ कहा जाने लगा. बाद में उसका नाम लॉरेंस पड़ा. साल 2010 में चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में दाखिला लेने के बाद वह छात्र राजनीति में उतरा. यहीं उसकी मुलाकात सतविंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ से हुई. वर्चस्व की जंग और कॉलेज की रंजिशों के बीच लॉरेंस पर हत्या के प्रयास, मारपीट और डकैती के मामले दर्ज होने लगे और देखते ही देखते वह जुर्म की दुनिया में उतर गया.

जेल बनी जुर्म की ‘फिनिशिंग स्कूल’

साल 2014 में राजस्थान पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद 21 साल की उम्र में लॉरेंस को गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन जेल उसके लिए सजा नहीं, बल्कि अपराध का 'फिनिशिंग स्कूल' बन गई। उसने समझ लिया कि सिर्फ रंगदारी और छोटी-मोटी गुंडागर्दी से बड़ा साम्राज्य नहीं खड़ा किया जा सकता. उसने जेल के भीतर से ही रियल एस्टेट, बिल्डरों और जबरन वसूली का ऐसा अंतरराज्यीय सिंडिकेट तैयार किया जो उसके बंद होने के बावजूद बिना रोक टोक के चलता रहा.

सलमान खान को धमकी और सिद्धू मूसेवाला का कत्ल

साल 2018 में जोधपुर कोर्ट में पेशी के दौरान लॉरेंस ने खुलेआम सलमान खान को जान से मारने की धमकी देकर सनसनी फैला दी. इसके बाद 29 मई 2022 को पंजाब के मानसा में मशहूर गायक सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े 28 गोलियां मारकर हत्या कर दी गई. इस हाई-प्रोफाइल मर्डर की जिम्मेदारी गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली. इस घटना ने साबित कर दिया कि बिश्नोई गैंग का शूटर नेटवर्क कितना सटीक और घातक हो चुका है.

कनाडाई कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

जून 2023 में कनाडा के सरे में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद जब भारत और कनाडा के रिश्तों में तनाव आया, तब कनाडाई एजेंसियों के दावों में बिश्नोई गैंग का नाम फिर उभरा. हालांकि, जेल से जारी बयानों में लॉरेंस ने खुद को कट्टर देशभक्त और राष्ट्रवादी बताया. उसने दावा किया कि वह किसी का मोहरा नहीं है और खालिस्तान आंदोलन का सख्त विरोधी है. लेकिन इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि फाजिल्का के एक गांव से शुरू हुआ यह गैंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव रखने लगा है.

मुंबई में बाबा सिद्दीकी की हत्या और डर का विस्तार

12 अक्टूबर 2024 की रात मुंबई के बांद्रा में एनसीपी नेता और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई. सिद्दीकी को सलमान खान का बेहद करीबी माना जाता था. हत्या के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर इस वारदात की जिम्मेदारी बिश्नोई गैंग ने ली. इस हत्याकांड ने संदेश दिया कि मुंबई की अंडरवर्ल्ड में दाऊद का वर्चस्व खत्म हो चुका है और अब नए सिंडिकेट का दायरा महाराष्ट्र तक फैल चुका है.

'राष्ट्रवाद' का चोला और मीडिया मैनेजमेंट

अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद बिश्नोई गैंग ने पाकिस्तान और आतंकी हाफिज सईद को खुलेआम धमकी दी. गैंग का कहना था कि वह देश के दुश्मनों को बख्शेगा नहीं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह बिश्नोई गैंग की सोची-समझी पीआर (PR) रणनीति का हिस्सा है. गैंग पहले सलमान खान के मुद्दे पर खुद को धार्मिक भावनाओं का रक्षक बताता है और फिर देशप्रेम का कार्ड खेलकर युवाओं को अपने जाल में फंसाता है.

सलाखों के पीछे से कॉर्पोरेट जैसा सिंडिकेट

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई ने जेल में रहते हुए एक कॉर्पोरेट कंपनी की तर्ज पर अपना सिंडिकेट खड़ा किया है. इसमें पदानुक्रम (Hierarchy), क्षेत्रीय कमान, एनक्रिप्टेड कॉलिंग और सोशल मीडिया मैनेजमेंट शामिल है. साबरमती जेल की ए-श्रेणी सुरक्षा में रहने के बावजूद वह वीओआईपी (VoIP) और एंक्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भारत, कनाडा, अमेरिका, थाईलैंड, आर्मेनिया और अजरबैजान में फैले अपने 800 से अधिक शार्पशूटरों को निर्देश देता है.

पुराने दोस्तों से दुश्मनी, अनमोल की गिरफ्तारी और गोल्डी से दरार

नवंबर 2025 में लॉरेंस के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से डिपोर्ट कर भारत लाया गया और उसे तिहाड़ जेल में बंद किया गया. अनमोल की गिरफ्तारी के बाद 15 साल पुराने साथियों, लॉरेंस और गोल्डी बराड़ के बीच दूरियां बढ़ गईं. बिश्नोई गैंग को लगता था कि गोल्डी ने अमेरिका में अनमोल को कानूनी मदद नहीं दी. दिसंबर 2025 में लॉरेंस के पुराने साथी इंदरप्रीत सिंह उर्फ पर्री की चंडीगढ़ में हत्या कर दी गई, जिसकी जिम्मेदारी खुद बिश्नोई गैंग ने ली. इसके बाद गोल्डी बराड़ ने ऑडियो मैसेज जारी कर लॉरेंस को अंजाम भुगतने की खुली चुनौती दे दी.

कानून की धीमी चाल और महिमामंडन का खतरा

साल 2026 की शुरुआत तक दर्जनों मामलों और 84 से ज्यादा FIR के बावजूद कानून की नजर में लॉरेंस बिश्नोई अभी भी एक विचाराधीन कैदी (Undertrial) है. दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर रील्स, फैन पेजों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए उसके व्यक्तित्व का महिमामंडन किया जा रहा है. यहां तक कि बाजार में 'लॉरेंस बिश्नोई जैकेट' जैसे उत्पाद बिकने लगे हैं, जो युवाओं को जरायम की दुनिया की तरफ आकर्षित करने का बेहद खतरनाक रुझान है.

झूठ, हकीकत और बिश्नोई समाज का अंतद्वंद्व

जेल की दीवारों के पार लॉरेंस के बारे में कई कहानियां मशहूर हैं. कोई उसे एक समय का भोजन करने वाला संन्यासी बताता है, तो कोई उसे 'स्टेट का हथियार'. लेकिन इन मिथकों के पीछे खौफ और खून-खराबे की एक बदसूरत सच्चाई छिपी है. सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि जीवों की रक्षा करने वाली 'जीव रक्षा समिति' की युवा शाखा का अध्यक्ष रहा व्यक्ति आज देश के सबसे बड़े मर्डर सिंडिकेट का आका बना बैठा है. गंगनहर आज भी बह रही है, लेकिन जिस अहिंसक संस्कृति से बिश्नोई समाज की पहचान बनी थी, आज वह एक नाम के खौफ से जूझ रही है.

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