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पंजाब में मनरेगा कर्मचारियों को 8 माह से वेतन नहीं:अब नौकरी से भी निकालने का आदेश, कांग्रेस नेता मालविका सूद मान सरकार को घेरा
कांग्रेस हलका इंचार्ज मालविका सूद ने खन्ना में अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे मनरेगा कर्मचारियों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे कर्मियों पर बल प्रयोग करना पूरी तरह से अनुचित और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। मालविका सूद ने बताया कि बीते 15 जुलाई को खन्ना में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर पुलिस ने पानी की बौछारें (वाटर कैनन) छोड़ीं, आंसू गैस के गोले दागे और बल प्रयोग किया। पंजाब सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए सूद ने कहा कि सरकार को पिछले आठ महीनों से बकाया वेतन जारी कर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए था। लेकिन इसके विपरीत, सरकार ने उन्हें नौकरी से निकालने के आदेश जारी कर दिए हैं, जो कि एक "तानाशाही फरमान" है। उन्होंने चेतावनी दी कि पंजाब की जनता आने वाले विधानसभा चुनावों में सरकार के इस रवैये का मुंहतोड़ जवाब देगी। 16 वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य पर संकट सूद ने जानकारी दी कि पिछले 16 वर्षों से ठेका (कॉन्ट्रैक्ट) आधार पर कार्यरत लगभग 2,100 मनरेगा कर्मचारी अपनी बुनियादी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। आठ महीने से वेतन न मिलने के कारण इन परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसके बावजूद सरकार उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। मालविका सूद ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो पार्टी खुद धरनों और आंदोलनों से सत्ता में आई थी, वही आज शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का दमन कर रही है। मनरेगा मजदूरों को धरनों में शामिल होने से रोकना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। उन्होंने मांग है कि मनरेगा कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला तुरंत वापस लिया जाए। पिछले आठ महीनों का लंबित वेतन शीघ्र जारी किया जाए। कर्मचारियों के साथ बातचीत के जरिए उनकी सभी जायज मांगों का स्थायी समाधान निकाला जाए।