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प्रभु श्री राम के ‘राजतिलक’ का आयोजन, गूंजे जयकारे
| अमृतसर श्री दुर्ग्याणा मंदिर स्थित गोस्वामी तुलसीदास मंदिर में चल रहे अखंड श्री रामचरित मानस पाठ के दौरान भक्ति और उल्लास का दृश्य देखने को मिला। पाठ के पावन अवसर पर प्रभु श्री राम जी के ‘राजतिलक’ का भव्य एवं अलौकिक आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर प्रबंधकों धर्मपाल अरोड़ा और रवि अरोड़ा की देखरेख में चल रहे पाठ के दौरान जैसे ही श्री राम जी के अयोध्या लौटने और राज्याभिषेक का प्रसंग आया, पूरा परिसर "जय श्री राम" के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। पुजारियों व श्रद्धालुओं ने प्रभु श्री राम जी का मनमोहक शृंगार कर तिलक लगाया और आरती उतारी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भजनों और हरिनाम संकीर्तन के बीच पुष्प वर्षा कर अपनी खुशी का इजहार किया। समारोह में रवि अरोड़ा ने श्री रामचरित मानस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रभु श्री राम का जीवन सत्य, धर्म, त्याग और मर्यादा का संदेश देता है। उनके राज्याभिषेक का यह प्रसंग समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर पंडितों ने गोस्वामी तुलसीदास जी का भी सुंदर शृंगार कर उनकी आरती उतारी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।